Sunday, 3 May 2015

स्वच्छ भारत अभियान, चढ़े परवान

प्रधानमंत्री के ‘स्वच्छ भारत’ अभियान से स्वयं को बड़ा प्रतिष्ठित व ख्याति प्राप्त समझने वाले लोग भी जुडने की घोषणा करते आ रहे है। क्या अपना दोहरा चरित्र जीने वाले इन लोगो से पूछा गया कि वे कहां-कहां सफाई-अभियान में लोगो को जागरूक करने गये। एक दिन हाथ में झाडू लेकर सफाई नही हो सकती। लोगो को समझाये कि वे सफाई की आदत बनाये यहां तो लोग अपने घर को साफ कर कूड़ा सडक पर बिखेर देते है। नाली में थूकने के बजाय सडक के बीच में थूकना अपनी शान समझते है। पान व गुटका खाकर लोग सार्वजनिक स्थलो की दीवारो पर आधुनिक पेन्टिंग बना देते है। ऐसे लेागो को कौन समझा सकता है, कानून का पालन करवा सकता है सफाई के लिए सभी को सचेत होना होगा। पश्चिम के लोग खुद ही पहल करते है। उनके कानून भी सख्त है पकड़े गये तो भारी जुर्माना अदा करना ही पड़ेगा।
पॉलीथीन सफाई का सबसे बड़ा दुश्मन हैं। यह पर्यावरण के लिए घातक है। उसी के प्रयोग से नाली, सीवर तो चोक होते ही है। यह नदियो के लिए भी गंभीर समस्या है। पॉलीथीन का बढ़ता प्रयोग हमारी धरा की जल शोषण की क्षमता क्षीण कर रहा है। जिससे कृषि जगत पर भी एक अदृश्य काला साया मंडरा रहा है। नगरों में ही नही देहातो में भी हवा में उड़ता, बिखरा पॉलीथीन इस बात को बार-बार समझा रहा है कि मेरा उपयोग बड़ा घातक है इसका प्रयोग रोको किन्तु इस ओर न तो हम देखना चाहते है और न ही कुछ करना चाहते है। आज जिस थोड़ी सुविधा के लिए हम पोलीथीन की पन्नियों का प्रयोग करते है यही सुविधा हमारे बच्चों के लिए घातक है। स्वच्छता अभियान सफल बनाने के लिये हम दृढ संकल्प ले।
 यमुना को प्रदूषण मुक्त करने हेतु राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एन.जी.टी.) की सार्थक पहल सचमुच प्रशसनीय है।
अब यमुना नदी में कूड़ा या धार्मिक सामग्री डालते पाये जाने पर ५०० रु. का जुर्माना देना होगा तथा निर्माण सामग्री फैकना भी प्रतिबंधित होगा ऐसा करने वालों पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने ५०,००० रु. का जुर्माना लगाने का निर्देश यमुना को प्रदूषण मुक्त करने हेतेु सार्थक पहल है। 

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