Wednesday, 29 April 2015

राजस्थान में खनन माफिया चट कर गए पहाड़ भी

राजस्थान के मेवात क्षेत्र में खनन माफियाओं का खौफ किस कदर बढ़ता जा रहा है इसकी बानगी तब देखने को मिली जब प्रदेश के खुफिया विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) उत्कल रंजन साहू ने अलवर के एसपी विकास कुमार को हाल ही चिट्ठी लिखकर खनन माफियाओं से सतर्क रहने को कहा. चिट्ठी में कहा गया था, ''अलवर में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान से खनन माफियाओं और मेव कट्टर पंथियों में नाराजगी है. उनसे आपकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है. '' दरअसल कुमार ने अलवर में अवैध खनन के खिलाफ सघन अभियान चला रखा है. जनवरी 2014 से अब तक उन्होंने अवैध खनन के खिलाफ एक हजार से अधिक कार्रवाई की और सात सौ से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है. फिर भी अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली जिले में अवैध खनन का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है. यहां खनन माफियाओं की आपस में या पुलिस से आए दिन हिंसक झड़पें होने लगी हैं.
बीती 2 अप्रैल को भरतपुर जिले के पहाड़ी थाना क्षेत्र के नागल क्रेसर जोन में खनन माफियाओं के दो गुटों में हुई झड़प में दो लोगों की मौत हो गई थी जबकि पांच अन्य घायल हो गए थे. इस घटना के कुछ ही दिन पहले, 18 मार्च को करौली जिले के मासलपुर थाना क्षेत्र में खनन रोकने गई पुलिस पर खनन माफियाओं ने हमला कर दिया था. यहां से पुलिस ने पत्थरों से भरा एक ट्रक और खनन मशीन जब्त की थी. अवैध खनन के मुख्य केंद्र अलवर में तीन साल में खनन माफिया ने पचास से ज्यादा बार पुलिस और वन विभाग के दल पर हमला किया है. 16 फरवरी को अलवर के ही राजगढ़ क्षेत्र में अवैध खनन की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन ग्रीन अभियान के दौरान झोपड़ी नांगल गांव के पास अवैध खनन कर पत्थर ले जा रहे दो ट्रैक्टर चालकों ने वन विभाग की सरकारी गाड़ी को पचास फुट तक घसीट दिया था.

सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद बेहद हिंसक हो चुके खनन माफिया अलवर स्थित अरावली की पहाडिय़ों में अवैध खनन लगातार जारी रखे हुए हैं. अवैध खनन की वजह से ही भिवाड़ी, टपूकड़ा, तिजारा और किशनगढ़बास क्षेत्र से पहाडिय़ां गायब होती जा रही हैं. अलवर में डीएफओ रह चुके पी.काथिरवेल के आकलन के मुताबिक भिवाड़ी क्षेत्र में खनन माफियाओं ने बीते 15 साल में 50 हजार करोड़ रु. का अवैध खनन किया है और खनन इसी रफ्तार से जारी रहा तो इस क्षेत्र के पहाड़ तीन साल में खत्म हो जाएंगे. वन विभाग की ही एक रिपोर्ट बताती है कि टपूकड़ा क्षेत्र के चूहड़पुर, उधनवास, उलावट, ग्वालदा, इंदौर, सारे कलां, सारे खुर्द, खोहरी कलां, मायापुर, छापुर, नाखनौल, कहरानी, बनबन, झिवाणा, निंबाड़ी में हरियाणा के माफिया भी व्यापक स्तर पर फैले हुए हैं. और यहां के करीब एक हजार हैक्टेयर इलाके में पहाड़ खत्म हो चुके हैं. यहां पहाड़ों के खत्म होने के कगार पर पहुंचने के बाद माफियाओं ने तिजारा और किशनगढ़बास में अपना कारोबार फैलाया और नीमली, बाघोर, देवता, मांछा क्षेत्र के पहाड़ों में खनन शुरू कर दिया है.

काथिरवेल के मुताबिक, 1998 से 2003 के बीच एक हजार वाहनों से प्रति दिन दो ट्रिप के हिसाब से छह हजार करोड़ रु. का अवैध खनन हुआ. इसी तरह 2003 से 2008 के बीच 12 हजार करोड़ रु. और 2008 से 2013 के बीच 30 हजार करोड़ रु.का अवैध खनन हुआ है.

खनन रोकने में सबसे बड़ी परेशानी है इस कारोबार से जुड़े लोगों के पास भारी मात्रा मंड विस्फोटक और अवैध हथियारों का होना, जिनके मुकाबले पुलिस के संसाधन पर्याप्त नहीं हैं. धौलपुर के एसपी राजेश सिंह कहते हैं, ''खनन माफिया के लोग गुट बनाकर चलते हैं. ये लोग खनन के रास्ते में आने वाले की जान लेने से परहेज नहीं करते चाहे वह कितना बड़ा अधिकारी ही क्यों न हो. ''

हिंसक रुख अख्तियार कर चुके खनन माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब उनके डंपर पुलिस चौकी, थानों और वन विभाग की चौकियों के सामने से बेखौफ निकलते हैं. और अपने खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाने से वे डरते नहीं.

बूस्टर सीजन -4 का फाइनल नौ जून को

आबूलेन पीपीपी कांफ्रेंस हॉल के निकट स्थित बीट्स ऑफ डांस के डांस बूस्टर सीजन-4 का ऑडीशन मेरठ रॉकर्स एकेडमी में किया गया। ऑडीशन में बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बीट्स ऑफ डांस के डायरेक्टर समीर खुर्शीद ने बताया कि डांस बूस्टर सीजन का तीसरा और आखिरी ऑडीशन तीन मई को होगा। इसका फाइनल नौ जून को होगा। इस मौके पर डांस इंडिया डांस की कोरियोग्राफर गीता कपूर बच्चों के हुनर को परखेंगी। दूसरे ऑडीशन में जज के रूप में दिव्या जैन, मीता, समीर खुर्शीद रहे।

दुश्मन मिले सबेरे लेकिन मतलबी यार न मिले

नौचंदी के पटेल मंडप में मंगलवार रात लखनऊ से पहुंचे भोजपुरी अवध गायक सुरेश कुशवाहा एंड ग्रुप ने रंगारंग प्रस्तुति पेश करते हुए समां बांध दिया। कलाकारों के ग्रुप ने भोजपुरी गीतों के साथ नृत्य कर दर्शकों की तालियां बटोरीं।
शुभारंभ विशाल कुमार ने साई भजन से किया। भोजपुरी गायक सुरेश ने मंच संभाला और भोजपुरी स्टाइल में भगवान शिव की स्तुति का गुणगान किया। 'रटन कहने लगी राम ही राम' गीत के बाद सुरेश ने 'दुश्मन मिले सबेरे लेकिन मतलबी यार न मिले' गीत गाकर प्रेम भावना से रहने का संदेश दिया। समाज में बढ़ती जा रही दहेज प्रथा को 'दूल्हे का मुंह जैसे फैजाबादी बंडा, दहेज में मां-बाप मांगे हीरो-होंडा' से बयां कर दहेज लोभियों को करारा जवाब दिया। 'यदि घर-घर के रगड़े-झगड़े आपस में मिट जाएंगे, गांधी के पुजारी खद्दर वाले कहां जाएंगे' गीत सुनाकर राजनीति के गिरते स्तर पर तीखा कटाक्ष किया। इसके बाद गायिका जया ने मंच संभाला। उन्होंने 'रेलिया बैरन पिया को लिया जाए रे, दीन भर चाहे जहां रही हो हमार पिया' गीत की नृत्य के साथ रंगारंग प्रस्तुति दी। भोजपुरी कलाकारों के ग्रुप में आफाक वारसी ने ढोलक, लालधर वर्मा ने आर्गन, सिबले ने बैन्जों के अलावा पैड पर शिवम व जयनाथ यादव ने झींका पर सुरीले संगीत से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

Tuesday, 28 April 2015

पूरी तरह अभी भी पटरी पर नहीं आई सफाई व्यवस्था

नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने के बाद शहर की सफाई व्यवस्था अभी भी पूरी तरह पटरी पर लौटती नहीं दिख रही है। ग्यारह दिन की हड़ताल जब रविवार को टूटी तो अफसरों ने राहत की सांस ली थी। मंगलवार को नगर निगम कर्मचारी सुबह से सफाई करने के लिए जुटे। सफाई एवं खाद्य निरीक्षकों की अगुवाई में टीमें बनकर चलीं। मुख्य सड़कों के साथ ही चौराहों पर अभियान चलाया गया। कई कालोनियों से भी कूड़े का उठान हुआ।
यहां हुई सफाई
मंगलवार को बेगमपुल, हापुड़ अड्डा, गांधी आश्रम, तेजगढ़ी चौराहा, बच्चा पार्क, घंटाघर, रेलवे रोड चौराहा, मेट्रो प्लाजा आदि मुख्य चौराहों के साथ ही सड़कों पर सफाई की गयी। सड़कों पर मिट्टी व कूड़े को इकट्ठा कर ट्रालियों व निगम गाड़ियों से उठान किया गया। इसके अलावा मोहल्लों में भी सफाई की सुध ली गयी। हालांकि कई मोहल्ले मंगलवार को भी सफाई की बाट जोहते रहे। साकेत, मानसरोवर कालोनी, शास्त्रीनगर, जागृति विहार, अजंता कालोनी, दामोदर कालोनी, प्रेमप्रयाग, गंगानगर, पंचशील कालोनी, बैंक कालोनी, सूरजकुंड, फूलबाग कालोनी, नेहरूरनगर आदि क्षेत्रों के कई मुहल्लों में सफाई कर्मी दिखे। पुराना इकट्ठे कूड़े का उठान किया गया। वहीं इन कालोनियों के कुछ मोहल्लों के साथ ही शहर के कई इलाकों में गंदगी के अंबार लगे रहे। नगर आयुक्त एसके दुबे ने कहा कि सफाई व्यवस्था पटरी पर आ गयी है, एक-दो दिन में व्यवस्था सामान्य हो जाएगी।

अभियान चला शराबी चालकों की धरपकड़

शराब पीकर दोपहिया और चौपहिया वाहनों को ड्राइव करने वाले लोगों की अब खैर नहीं है। ट्रैफिक पुलिस ने मंगलवार रात से अभियान चलाया। पुलिस का अभियान बेगमपुल और जीरोमाइल के अलावा कई मुख्य चौराहें पर चला, जिसमें करीब दो दर्जन से अधिक वाहनों के चालन और कई वाहन सीज किए गए।
वाहन चेकिंग के अभियान की कमान खुद ट्रैफिक सीओ बीएस वीर कुमार ने संभाल रखी थी। चार टीएसआई और पुलिसकर्मियों को जगह-जगह लगाकर वाहनों की घेराबंदी की गई। कई कारों में शराब की बोतलें, सोड़ा और नमकीन के पैकेट मिले। वहीं दोपहिया वाहन चालकों के मुंह में एलकोहल मीटर लगाकर जांच की गई। जिन वाहन चालकों की जांच में शराब पीना आया, उनका चालान काटा गया और जिनके पास वाहन के कागजात नहीं थे, उनको सीजा किया गया। बेगमपुल पर चेकिंग में एक बाइक चालक को रोका गया, लेकिन उसने बाइक तेज कर दी। घेराबंदी कर चालक को दबोचकर सड़क पर उसकी धुनाई की गई। पुलिस चेकिंग को देख कई वाहन चालक को काफी दूर से ही वापस हो गए।

मदद को बढ़ाए हाथ

मेरठ : नेपाल में आए भूकंप में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए विभिन्न स्थानों पर शोक सभाएं हुई। इस दौरान लोगों ने दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि दी और मृतकों के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

भारतीय बौद्ध महासभा की ओर से बुद्ध विहार में लोगों ने दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान महेंद्र सिंह, ललित बौद्ध, रवि कुमार, पवन कुमार, यशपाल, श्री पाल आदि मौजूद थे। नोबल पब्लिक स्कूल में छात्र-छात्राओं ने कैंडल मार्च निकालकर दो मिनट का मौन धारण किया। श्रद्धांजलि देने वालों में प्रिंसिपल संतोष मेहता, अनिल चौधरी और अमित चौधरी शामिल रहे। डा. भीमराव अंबेडकर कल्याणकारी सेवा संस्थान के कार्यालय पर बैठक हुई, जिसमें आपदा में मारे गए लोगों को दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मोहन लाल सहगल, डा. सेवा राम कैन, जौहरी मल, रीना गौतम कैली, चतर सिंह, ज्योति प्रसाद जाटव आदि उपस्थित रहे।

उधर, भूकंप पीड़ितों की आर्थिक मदद के लिए अब अधिवक्ता भी आगे आ गए हैं। उन्होंने बुधवार से पीड़ित परिवारों की मदद के लिए धनराशि एकत्र करने का निर्णय लिया। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव कुमार त्यागी व महामंत्री संदीप चौधरी ने बताया कि भूकंप पीड़ितों की आर्थिक मदद के लिए बुधवार से कचहरी में धनराशि एकत्र करेंगे। धनराशि डीएम पंकज यादव को सौंपी जाएगी।

केदारनाथ: जहां मौत भी देती है उपहार

हिंदू धर्म में बहुत से तीर्थ स्थल हैं जिनकी यात्रा का अपना-अपना महत्व है लेकिन जब तक चार धाम यात्रा न कर लें तब तक यात्रा अपूर्ण ही रहती है। यह चार धाम है:- बद्रीनाथ, द्वारिकाधीश, जगन्नाथ और रामेश्वरम। मान्यता है की श्री हरि विष्णु बद्रीनाथ में स्नान करते हैं, द्वारिकाधीश में वस्त्र पहनते हैं, जगन्नाथ में भोजन करते हैं और रामेश्वरम में विश्राम करते हैं। शास्त्रों के अनुसार बारह ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ में स्थापित ज्योतिर्लिंग सबसे ऊंचे स्थान पर है।
धर्म शास्त्रों के अनुसार भविष्यवाणी की गई है की इस सारे क्षेत्र में जितने भी तीर्थ विद्यमान हैं वह सारे आने वाले समय में लुप्त हो जाएंगे। मान्यता है कि जब नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे उस दिन बद्रीनाथ का रास्ता पूर्ण रूप से बंद हो जाएगा। बद्रीनाथ के दर्शन सदा के लिए बंद हो जाएंगे। उत्तराखंड में धटित प्राकृतिक आपदा इस ओर संकेत करती है। भविष्य में बद्रीनाथ धाम और केदारेश्वर धाम अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और फिर लंबे समय के उपरांत भविष्य में भविष्यबद्री नाम से नए तीर्थ का उद्गम होगा।

Topper बनना चाहते हैं तो समस्याओं का हल ढूंढना सीखो

- समय चाहे पढ़ाई का हो या परीक्षा का, समझदार छात्र अपने खानपान के साथ नींद का भी पूरा ध्यान रखते हैं। नींद न लेने से या बहुत कम लेने से भी हमारे दिमाग की याद्दाश्त क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।
- टॉपर बनने के लिए गति से अधिक दिशा महत्वपूर्ण होती है।
- वही छात्र टॉपर बन सकते हैं जो आशा धूमिल होते हुए भी प्रयास जारी रखते हैं। जिन्हें यह विश्वास होता है कि  वे सफल होंगे।
- गलतियां तो हर कोई ढूंढ लेता है, यदि टॉपर बनना चाहते हैं तो समस्याओं का हल ढूंढना सीखो ।
- टॉपर बनना उस समय तक नामुमकिन लगता है, जब तक हम उसे मुमकिन बनाने के प्रयास शुरू नहीं कर देते।
- असफलता का भय सफलता के रास्ते की सबसे प्रमुख रुकावट होती है ।
- कोई भी छात्र अपनी मेहनत और कर्मों से टॉपर बन सकता है ।
- बिना उत्साह के कभी भी कुछ महान हासिल नहीं किया जा सकता ।

सड़क पर रहने वाले बच्चे बना रहे अपना बजट

दिल्ली सरकार इन दिनों जनता से बजट तैयार करने के लिए रायशुमारी कर रही है। यह रायशुमारी वो मोहल्ला सभाओं के माध्यम से कर रही है।
दिल्ली सरकार का ये तरीका सड़क पर रहने वाले कुछ बच्चों को इतना भा गया है कि उन बच्चों को बजट से क्या चाहिए इसका पूरा मेमोरंडम तैयार कर डाला है।
इन बच्चों ने राय ‌मश्विरे करके एक मसौदा तैयार किया है जिसमें उन्होंने ये लिखा है कि बच्चों को केजरीवाल सरकार से क्या उम्मीदें हैं।
बता दें कि ये बच्चे स्ट्रीट चिल्ड्रेन की एक फेडरेशन 'बढ़ते कदम' से जुड़े हैं। शनिवार को जब सरकार दिल्ली में मोहल्ला सभाओं की श्रंखला आयोजित कर रही थी तब ये बच्चे खुद एक-दूसरे सलाह मश्विरा कर खुद के अनुभव के आधार पर अपना बजट बनाने में लगे हुए थे।
ये सभी बच्चे अपने अपने-अपने चार्ट और मार्करों के साथ अपना प्लान बनाने बैठे थे ताकि वो सरकार के बजट बनाने की प्रक्रिया में सहायता कर सकें। जब मुशरत परवीन से पूछा गया कि उस जैसे लगभग 16 साल के बच्चों की क्या जरूरत है तो अपनी मां के साथ घरों में काम करने वाली मुशरत बोली कि 'सर्वे जरूरी है।'
मुशरत की बात का समर्थन करते हुए बेघर लोगों के लिए बने रैनबसेरे में रहने वाली ज्योति कहती है कि ‌अगर सर्वे होगा तो वो और बच्चों से मिल पाएंगे और उन्हें समझा पाएंगे कि कमाई के लिए पढ़ाई कितनी जरूरी है।
इन बच्चों ने न केवल यह सुझाया है कि सर्वे होने चाह‌िए बल्कि इन लोगों ने सर्वे किस तरह से किए जाएंगे उसका पूरा विस्तार में खाका भी तैयार कर लिया है। इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे 11 जिलों में ये सर्वे होंगे और इस वक्त वो सर्वे पर कितना खर्च आएगा उसे तैयार करने में लगे हैं।
चांदनी जो शहीद कैंप वेस्ट दिल्ली में रहती है सीएम से और रैनबसेरों की मांग करने वाली है। ये बच्चे जब बजट तैयार कर रहे थे तो इनके बहस का जो सबसे बड़ा मुद्दा था वो बच्चों के लिए और रैनबसेरों की मांग का ही था।
दूसरा जो मुद्दा सबसे अहम था वो स्वास्थ्य का सामने आया। वर्तमान समय में अगर उन्हें किसी का साथ न मिले तो उन्हें स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं होती।
कूड़ा बिनने वाले बच्चों में कुत्ता काटने की समस्या आम बात है। लेकिन अगर वो इसके इलाज के लिए सरकारी अस्पताल जाते हैं तो या तो उन्हें भगा दिया जाता है या उनका इलाज करने से मना कर दिया जाता है।
इन बच्चों ने ही बताया कि कई ऐसे बच्चे रेबीज के शिकार हो जाते हैं बल्कि कई मर भी जाते हैं। वेटर का काम करने वाले चंदन ने बोला कि वो दिल्ली सरकार से कम से कम बच्चों के लिए चार अस्पताल बनाने को कहेंगे ताकि उन्हें सही इलाज मिल सके।

महान वैज्ञानिक बोले, नहीं तो मिट जाएगा इंसान का नामोनिशान

स्टीफन हॉकिंस ने कहा है कि मानव जाति को अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए पृथ्वी को छोड़कर अंतरिक्ष में कहीं और बसेरा तलाशना होगा।
मानव जाति को ऐसा 1000 साल के अंदर करना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो मानव जाति का नामोनिशान मिट सकता है। हॉकिंस ने कहा है कि मानव जाति को अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए अंतरिक्ष में जाना होगा।
उन्होंने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि अगले 1000 साल तक मानव जाति पृथ्वी से पलायन किए बगैर सुरक्षित रह सकती है। हॉकिंस ने ये बातें सिडनी ओपेरा हाउस में आयोजित वार्ता में कही।
स्टीफन हॉकिंस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उदय से मानव जाति को खतरे की चेतावनी दी है। साथ ही मानव जाति को बचाने के लिए किसी दूसरे प्लेनेट की तलाश करने को कहा है।
इस वार्ता में हॉकिंस की उपस्थिति टेक्नोलॉजी के सहारे दर्ज हुई। हॉकिंस कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के अपने ऑफिस में ही बैठे रहे और वहीं से सिडनी ओपेरा हाउस में हुई आयोजन में हिस्सा लिया।
इसके लिए होलोग्राफिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया, जिसके जरिए हॉकिंस की 3डी इमेज सिडनी ओपेरा हाउस में पहुंचाई गई।
अपने लेक्चर के अंत में हॉकिंस ने उन्हें सुन रहे सभी लोगों को उत्साहित करने के लिए कहा कि मानव जाति को अब सितारों की ओर देखने की जरूरत है, न कि अपने पैरों के नीचे।
विश्व प्रसिद्ध महान वैज्ञानिक और बेस्टसेलर रही किताब 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' के लेखक स्टीफन हॉकिंग ने शारीरिक अक्षमताओं को पीछे छोड़ते हु्ए यह साबित किया कि अगर इच्छा शक्ति हो तो व्यक्ति कुछ भी कर सकता है।
हमेशा व्हील चेयर पर रहने वाले हॉकिंग किसी भी आम इंसान से इतर दिखते हैं। कम्प्यूटर और विभिन्न उपकरणों के ज़रिए अपने शब्दों को व्यक्त कर उन्होंने भौतिकी के बहुत से सफल प्रयोग भी किए हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ़ केम्ब्रिज में गणित और सैद्धांतिक भौतिकी के प्रेफ़ेसर रहे स्टीफ़न हॉकिंग की गिनती आईंस्टीन के बाद सबसे बढ़े भौतकशास्त्रियों में होती है। उनका जन्म इंग्लैंड में आठ जनवरी 1942 को हुआ था।
यह पूछने पर कि क्या अपनी शारीरिक अक्षमताओं की वजह से वह दुनिया के सबसे बेहतरीन वैज्ञानिक बन पाए, हॉकिंग कहते हैं, ''मैं यह स्वीकार करता हूँ मैं अपनी बीमारी के कारण ही सबसे उम्दा वैज्ञानिक बन पाया, मेरी अक्षमताओं की वजह से ही मुझे ब्रह्माण्ड पर किए गए मेरे शोध के बारे में सोचने का समय मिला। भौतिकी पर किए गए मेरे अध्ययन ने यह साबित कर दिखाया कि दुनिया में कोई भी विकलांग नहीं है।''
हॉकिंग को अपनी कौन सी उपलब्धि पर सबसे ज्यादा गर्व है? हॉकिंग जवाब देते हैं ''मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई। इसके रहस्य लोगों के लिए खोले और इस पर किए गए शोध में अपना योगदान दे पाया। मुझे गर्व होता है जब लोगों की भीड़ मेरे काम को जानना चाहती है।''
हॉकिंग के मुताबिक यह सब उनके परिवार और दोस्तों की मदद के बिना संभव नहीं था।
यह पूछने पर कि क्या वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं हॉकिंग कहते हैं, ''लगभग सभी मांसपेशियों से मेरा नियंत्रण खो चुका है और अब मैं अपने गाल की मांसपेशी के जरिए, अपने चश्मे पर लगे सेंसर को कम्प्यूटर से जोड़कर ही बातचीत करता हूँ।''
मरने के अधिकार जैसे विवादास्पद मुद्दे पर हॉकिंग बीबीसी से कहते हैं, ''मुझे लगता है कि कोई भी व्यक्ति जो किसी लाइलाज बीमारी से पीड़ित है और बहुत ज्यादा दर्द में है उसे अपने जीवन को खत्म करने का अधिकार होना चाहिए और उसकी मदद करने वाले व्यक्ति को किसी भी तरह की मुकदमेबाजी से मुक्त होना चाहिए।''
स्टीफन हॉकिंग आज भी नियमित रूप से पढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय जाते हैं, और उनका दिमाग आज भी ठीक ढंग से काम करता है।
ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी को समझने में उन्होंने अहम योगदान दिया है। उनके पास 12 मानद डिग्रियाँ हैं और अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान उन्हें दिया गया है।

कहर के बाद करिश्मा, 3 दिन बाद मलबे से ‌जिंदा निकली महिला

नेपाल में कुदरत के कहर के बाद इसका करिश्मा भी देखने को मिल रहा है। बचावकर्मियों ने शनिवार के भारी भूकंप से जमींदोज हो चुके एक पांच मंजिला मकान के मलबे से मंगलवार को एक महिला को सुरक्षित निकाल लिया
कई और लोगों के साथ मलबे में फंसी सुनीता सितौला नाम की इस महिला ने बाहर निकलते ही कहा कि लगता है मैं किसी दूसरी दुनिया में आ गई हूं। ई-कांतिपुर की रिपोर्ट के मुताबिक अब यह महिला अपने पति और दो बेटों के साथ एक स्कूल में शरण लिए हुए है।
उसके पति और बच्चे उसे पाकर बेहद खुश हैं। ये लोग भूकंप के दौरान किसी तरह खुद को बचाने में सफल रहे थे। नेपाल में बड़ी तादाद में मकान धंस गए हैं और इनमें अब भी सैकड़ों लोग फंसे हैं।
देश में खाना, पानी, बिजली और दवाई की भारी किल्लत है और लोग और भूकंप आने के डर से खुले मैदान में अस्थायी शिविरों में रहे हैं। जहां तक नजर जाती है तंबू ही तंबू दिखाई पड़ते हैं।

मौत के मुंह से बचकर आई प्रीति ने सुनाई भूकंप की खौफनाक कहानी

झटके के सिवा कुछ अहसास नहीं हुआ। धरहरा भरभरा कर गिर पड़ा। नेपाल के ‘कुतुबमीनार’ माने जाने वाले दो सौ तीन फीट ऊंचे धरहरा मीनार के मलबे में दबने से शनिवार को ही 180 लोगों की मौत हो गई थी।
खुशबू, प्रीति और उनकी मां बुढाथोकी खुशकिस्मत रहीं। मां और दोनों बेटियों का इलाज राजधानी के सिविल अस्पताल में चल रहा है। चार्टर्ड एकाउंटेंसी की छात्रा प्रीति कैसे धरहरा से नीचे कुछ पता नहीं चला। वह यह भी नहीं कैसे और किसने उसे अस्पताल पहुंचाया।
इस प्राकृतिक आपदा में भले इन तीनों की जान बच गई लेकिन बुढ़ाथोकी के चार सगे-संबंधियों का अब तक कोई अता-पता नहीं है। बैंक में काम करने वाली खुशबू काफी सहमी है।
वह कुछ भी बता नहीं पा रही है लेकिन अपनी बहन और मां को अस्पताल में साथ देखकर हैरान भी है। मां को पहले अस्पताल के अलग वार्ड में रखा गया था।
बाद में अस्पताल निदेशक डॉ विमल थापा ने सभी को एक ही वार्ड में रखवाया। प्रीति को गंभीर चोट है। ट्यूब डाला गया है। कुछ दिन और अस्पताल में ही रहना होगा। अस्पताल के निदेशक ने कहा खुशबू और मैया को अब बेहतर हैं लेकिन तीनों खतरे से बाहर हैं।नेपाल में शनिवार को सरकारी छुट्टी रहती है। इस दिन अधिकांश लोग घूमने निकलते हैं। काठमांडू में धरहरा सभी के आकर्षण का केंद्र था। और तो और नए वर्ष पर एमाले के अध्यक्ष केपी ओली भी धरहरा गए थे।
तब से नेपाल के लोगों का आकर्षण और बढ़ा। धरहरा का निर्माण 1832 में प्रधानमंत्री भीमसेन थापा ने कराया था। इस मीनार से काठमांडू को देखने का खास आनंद था।
1934 के भूकंप मे भी नौ माले का धरहरा टूट गया था। इसका पुनर्निर्माण कराया गया था। धरहरा मे दो सौ 13 सीढ़ियां थीं। इसे 2005 से आम लोगों के लिए खोल दिया गया था।
‘अचानक धरहरा हिला और मैं नीचे गिर गई, इसके बाद मुझे कुछ पता नहीं।’ यह कहना है प्रीति का। प्रीति अपनी बड़ी बहन और मां के साथ धरहरा देखने गई थी। शनिवार को जब भूकंप आया तो तीनों धरहरा के सातवें मंजिल पर थीं।

मुस्कराइये कि आप नौचंदी मेले में हैं

यूं तो यह दुनिया ही एक मेला है, मगर इसमें बहुत झमेला है। इसलिए झूला-सर्कस, बांसुरी-पिपिहरी, हलवा-पराठे वाले, गंवई-शहरी मिजाज वाले, मेले में चलिए। आपका अपना नौचंदी मेला। रोज के दुनियावी सर्कस से मन उचाट है तो यहां का जीवंत सर्कस देखिए। नींद न आने की बीमारी है तो मेले में आइए। मन बहलेगा। नींद भी आएगी। परंपराएं बदली हैं, मूड बदला है, लेकिन उत्सवधर्मिता बरकरार है। रोजाना हजारों की संख्या में उमड़ने वाली भीड़ गवाह है।
गंगा-जमुनी तहजीब की खुशबू से मेला गुलजार है इन दिनों। यहां, घुसते ही तरह-तरह की आवाजें, नजारे शहर की आम जिंदगी से अलग ले आते हैं। बैलों की घंटी-घुंघरू की जगह अब मोटरों की चिल्ल-पों है, पर इस शोर में भी अलग तरह का सुकून। मेले के स्वाद का कोई मेल नहीं। यहां सॉफ्टी है, भेलपूरी है। हलवा-पराठा, खजला-नान खताई की सोंधी खुशबू है। मुंह में लार है, मगर हाथ खाली। गोलगप्पे खाकर गाल कुप्पा करने का यहां अपना आनंद है। इन्हीं दुकानों पर कुछ खाते हुए, कुछ भसकते हुए तो एकाध आगे बढ़ने को लरजते हुए चेहरे नजर आते हैं। पांच रुपये, दस रुपये की वकत अभी भी यहां दुकानों पर मिल जाएगी। हालांकि इस कीमत में भी मोलभाव करने वाले कुछ चेहरे नजर आते हैं। मेला इसलिए न छोड़िए कि आगरे से घाघरा नहीं आया है, यहां सब कुछ मिलेगा। लघु उद्योगों के तमाम हुनर बिखरे पड़े हैं। आप यहां निशानेबाजी पर हाथ आजमा सकते हैं या फिर छल्ले फेंककर किस्मत। कुछ नहीं तो तजुर्बा जरूर मिलेगा। पांच मिनट में फोटो खिंचाकर मेले की स्मृतियां संजो सकते हैं। तनाव में हैं तो दस रुपये में पूरा हंसीघर मौजूद है। सात अजूबे सुने होंगे, लेकिन इसी हंसीघर के पास लगे पोस्टर में आठवें अजूबे की तस्वीर नजर आती है- 'दुनिया का सबसे लंबा शख्स।'
प्रचार-प्रसार की गरज से टेलीविजन धारावाहिकों की बड़ी-बड़ी होर्डिग भी जहां-तहां लटकी हैं। सर्कस के करतब में जीवन संघर्ष दिखेगा, मगर उनकी दिलेरी-जांबाजी आपको नई ऊर्जा देगी। दांतों तले अंगुलिया चाहे तो आप न दबाएं। यहां कमसिन बालाओं की अदाओं पर नीयतें डोलती हैं तो अब जानवरों का कमाल न देख पाने का मलाल भी है। जोकर की हरकतें मसखरी होने के साथ ही अब थोड़ी फूहड़ हो चली हैं। शायद यह वक्त की नजाकत है। और शायद वजूद बचाए रखने की कोशिश भी।
इसी मेला मैदान में भीड़ का फायदा उठाकर ठांव-कुठांव धक्का मारते छिछोरे भी नजर आते हैं। पलटकर, चढ़ी भौहों वाली कुछ नजरें घूरती हैं। जवान खून में गुदगुदी भले होती हो, मगर बुजुर्गो को मेले की यह संस्कृति मैली लगती है। लेकिन शायद यह भी मेले के मिजाज का एक हिस्सा है, यह सोचकर कदम बढ़ते जाते हैं। कुरेदने पर 'अब वह बात कहां' की शिकायतें और अफसोस जाहिर करते झुर्रीदार चेहरे मेले के सुनहरे अतीत से मुलाकात कराती हैं।
पटेल मंडप में अलग मेला आबाद है। यहां के रंगारंग कार्यक्रम मन के सरगमी तारों को झंकृत करते हैं। आसमान छूते झूलों पर बैठकर चाहें तो शहर के साथ आंखों से चहलकदमी करें या फिर ब्रेक डांस के हिचकोलों का आनंद ले सकते हैं। बशर्ते दिल बैठने का डर न हो। मेला उजड़ जाए, इससे पहले कुछ पल जरूर गुजारिए नौचंदी मैदान में!
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नदियों की रेत से फूट सकती हैं प्रलय की लहरें

भूकंप का झटका जलप्रलय का भी कारण बन सकता है। जोन चार में शुमार मेरठ समेत देश की दर्जनभर शहर नदियों में समा सकते हैं। वैज्ञानिक रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप की वजह से नदियों पर धारा बदलने का खतरा है। नदियों के बेसिन क्षेत्र में नीचे की मिट्टी नाजुक एवं रेतीली जमीन से पानी का सैलाब फूट सकता है। एनसीआर क्षेत्र में अगले 50 वर्ष के अंदर भयावह भूकंप के संकेत हैं। रेतीली जमीन के बीच से अगर पृथ्वी की ऊर्जा निकली तो वह तबाही का कारण बनेगी। नदियों की बेसिन में बसे शहर जलमग्न हो सकते हैं।

भूगर्भशास्त्र के मुताबिक उत्तर प्रदेश गंगेटिक प्लेन में बसा हुआ है। यह चार शेल्फ एरिया में बंटा है। सभी चार शेल्फ एरिया एक दूसरे से उभारों के साथ मिले हुए हैं। इनमें होने वाली कोई भी हलचल क्षेत्र में बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। इंडियन प्लेट धीरे-धीरे यूरेशियन प्लेट के नीचे खिसक रही हैं, जिससे हिमालय हर वर्ष पांच मिमी उठ रहा है। पृथ्वी के अंदर टकराने वाली प्लेटों की मोटाई पचास से सौ किमी तक आंकी गई है, जिनके आपस में टकराने की वजह से भारी पैमाने पर ऊर्जा रिलीज होती है। यही ऊर्जा जिस भी क्षेत्र से निकलेगी, वहां भयावह नुकसान होगा। अगर यह क्षेत्र बेसिन हुआ तो नदियां धाराएं बदलकर शहरों में घुस जाएंगी। नदियों की रेतीली जमीन से पानी फटकर ऊपर आ सकता है। बनारस हिन्दू विवि, इलाहाबाद विवि एवं आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के मुताबिक नई दिल्ली, श्रीनगर, जम्मू, अमृतसर, मेरठ, जालंधर, बरेली, बनारस एवं कानपुर जैसे शहर जलप्रलय की भेंट चढ़ सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक मेरठ और भुज की स्थितियों में जबरदस्त समानता है। भुज साबरमती की बेसिन में होने की वजह से उसके नीचे की मिटटी अत्यंत मुलायम है। इसी प्रकार मेरठ समेत पश्चिमी उप्र -गंगा जमुना की बेसिन में है,और यहां भी जमीन के नीचे की मिट्टी बेहद मुलायम है। उच्च तीव्रता का भूकंप आने की स्थिति में नीचे की नाजुक मिट्टी खिसक जाएगी, और जमीन के अंदर का जलभंडार पूरी तरह ऊपर आ जाएगा। इसमें बड़े पैमाने पर मानव आबादी भी जमीन में समा सकती है

कूड़े से अटा शहर, हाईकोर्ट में चमन बना देने का दावा

हड़ताल समाप्त होने के बाद सफाईकर्मियों ने सोमवार से शहर की सफाई का कार्य शुरू किया। पहले दिन शाम तक लगभग 900 टन कूड़ा उठाया गया, लेकिन फिर भी शहर दस फीसदी भी साफ नहीं हो सका।

मेरठ शहर में 11 दिन की हड़ताल के बाद सोमवार से सफाई कर्मियों ने सफाई कार्य शुरू किया। पहले दिन अधिकांश कर्मचारी अपनी बीट पर पहुंच गए तथा दोपहर तक सफाई की। नगर निगम के तीनों डिपो से सभी गाड़ियां निकली तथा शाम पांच बजे तक दौड़ी। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह ने बताया कि पहले दिन शहर में 900 टन कूड़ा उठाया गया। जबकि रोजाना 600 टन कूड़ा निगम की गाड़ियां उठाती हैं। उन्होंने बताया कि शहर को साफ करने में अभी लगभग दो से तीन दिन का समय लगेगा। शहर में अभी कूड़े के ढेर लगे हैं। सोमवार से सफाई कार्य शुरू हुआ है। खुद निगम अफसरों का कहना है कि शहर के हालात सामान्य करने में अभी दो से तीन दिन का समय लगेगा। वहीं तमाम सच्चाई को झुठलाते हुए प्रमुख सचिव नगर विकास, जिलाधिकारी व नगर आयुक्त तीनों पक्षकारों की ओर से सोमवार को नगर आयुक्त एस के दुबे द्वारा हाईकोर्ट में अनुपालन आख्या जमा कराई। दरअसल, 21 अप्रैल को मेरठ शहर में हड़ताल तथा उससे बने महामारी फैलने के हालात के खिलाफ दायर जनहित याचिका में सुनवाई करके मुख्य न्यायाधीश ने उक्त तीनों अधिकारियों को 48 घंटे में शहर साफ करके तथा जनता के संकट का समाधान करके रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। उसी आदेश की अनुपालन आख्या में नगर आयुक्त ने 11 दिन तक चली हड़ताल का जिक्र तक नहीं किया। वहीं, उन्होंने कोर्ट के सामने दावा किया कि पूरे शहर में सफाई कराकर चूना और फिनायल का छिड़काव करा दिया गया है। रिपोर्ट में दावा किया है कि कोर्ट के आदेश का पूर्णतया पालन करा दिया गया है। नगर आयुक्त के इस दावे से याचिकाकर्ता लोकेश खुराना नाराज हैं। उन्होंने कहा है कि अफसरों के इस सफेद झूठ की पोल कोर्ट में खोली जाएगी।

सफाई न हो तो यहां शिकायत करें

नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह ने शहर की जनता से कूड़ा डलावघर में डालने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में सफाई नहीं होती है तो शहर की जनता नगर निगम के नंबर 0121-2515133, नगर आयुक्त कैंप ऑफिस के नंबर 0121-2660045 पर अथवा नगर स्वास्थ्य अधिकारी के मोबाइल नंबर 9412700550 पर शिकायत दर्ज करा सकती है।

प्रेम सिंह के समर्थन में आए मनोनीत पार्षद

सफाई कर्मचारी जहां नवनियुक्त नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह को हटाने की मांग कर रहे हैं वहीं डा. प्रेम सिंह के समर्थन में नगर निगम के मनोनीत पार्षद उतर आए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, नगर विकास मंत्री आजम खां को पत्र भेजकर डा. प्रेम सिंह को न हटाने की मांग की है। पत्र में अफजाल सैफी, नरेश मलिक, राजीव शर्मा, नरेंद्र यादव, रामदत्त शर्मा, ज्योत्सना गुर्जर, आस मोहम्मद, सुनीता सिंह, अनीता राणा आदि मनोनीत पार्षदों के हस्ताक्षर हैं।

Monday, 27 April 2015

नेपाली तबाही कुछ कहती है

धरती डोली। एक नहीं, कई झटके आए। नेपाल में तबाही हुई। दुनिया की सबसे ऊँची चोटी - माउंट एवरेस्ट को जीतने निकले 18 पर्वतारोहियों को मौत ने खुद जीत लिया। जैसे-जैसे प्रशासन और मीडिया की पहुँच बढ़ती गई, मौतों का आँकड़ा बढ़ता गया। इसका कुछ दर्द तिब्बत, असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश ने भी झेला। दहशत में रात, दिल्लीवासियों ने भी गुजारी। जरूरी है कि हम सभी इससे दुखी हों। यमन की तरह, नेपाल के मोर्चे पर भारत सरकार मुस्तैद दिखी।
इस बार आपदा प्रबन्धन निगरानी की कमान, हमारे प्रधानमन्त्री जी ने खुद सम्भाली। एयरटेल ने नेपाल में फोन करना मुफ्त किया। बीएसएनएल ने तीन दिन के लिये नेपाल कॉल रेट, लोकल किया। स्वामी रामदेव बाल-बाल बचे। सोशल मीडिया पर लोगों ने सभी की सलामती के लिये दुआ माँगी। मीडिया ने भी जानकारी और दुआओं के लिये अपना दिल खोल दिया।

14 साल से कम उम्र के बच्चे भी कर सकेंगे काम

सरकार बाल मजदूरी में संशोधन की तैयारी कर रही है। ऐसी खबर है कि संसद के चालू सत्र में सरकार बाल मजदूरी रोकथाम अधिनियम में जो संशोधन प्रस्तावित है उसे पास कराना चाहती है।
इस संशोधन में प्रावधान है कि 14 साल से कम उम्र के बच्चे को भी उसके पारिवारिक कारोबार में काम करने की अनुमति दी जाएगी बशर्ते कि उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो। इसमें प्रावधान है कि अगर बाल स्कूल से आने के बाद या छुट्टियों के दौरान या तकनीकी संस्थान से लौटने के बाद अपने परिवार की खेतों, वनों या घर पर होने वाले किसी काम में सहायता करता है तो प्रतिबंध उन पर लागू नहीं होगा लेकिन 14 से 18 साल की उम्र के बच्चों को खतरनाक उद्योगों में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। श्रम मंत्रालय के अनुसार पारिवारिक कारोबार को छोड़कर बड़े या अन्य छोटे संगठनों में बाल मजदूरी के मौजूदा प्रावधान लागू रहेंगे। शीघ्र ही इससे संबंधित विधेयक को संसद में पेश किया जाएगा।

IB अलर्ट, दिल्‍ली में ड्रोन से हमला कर सकते हैं आतंकी!

दिल्ली में एक बार फिर आतंकी हमले को लेकर खुफिया ब्‍यूरो (आईबी) ने दिल्ली पुलिस को चेताया है। आईबी का कहना है कि दिल्ली शहर में ड्रोन के जरिए हमले का खतरा है। इसलिए दिल्ली पुलिस को जारी चेतावनी में खुफिया एजेंसी ने ड्रोन उड़ाने वाले व्यक्तियों पर नजर रखने को कहा है।
आईबी की इस चेतावनी के बाद अब दिल्ली पुलिस के डीसीपी स्तर के अफसर ड्रोन उड़ाने वालों पर नजर रखेंगे। वहीं, मुंबई हमले के मास्टर माइंड व लश्कर आतंकी जकीउर रहमान लखवी के पिछले दिनों पाकिस्तान की जेल से रिहा होने के बाद खुफियां एजेंसियां विशेष सर्तकता बरत रही हैं, ताकि ऐसी किसी भी योजना को विफल किया जा सके।

दुनिया में अमर रहने वाला व्यक्ति हो चुका है पैदा: साइंटिस्ट का दावा

एक ऐसा व्यक्ति जो कभी भी मरे नहीं और सभी बीमारियों से मुक्त हो, क्या संभव है? और हां, अगर यह संभव है तो उसे अमर ही माना जाएगा। हाल ही में लंदन स्थित कैंब्रिज यूनिनर्सिटी के एक साइंटिस्ट ने दावा किया है कि ऐसे ही अमर व्यक्ति का जन्म हो चुका है । जेरॉन्टोलॉजिस्ट (उम्र के बारे में सभी पहलुओं से अध्ययन करने वाला) वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत औब्रे डी ग्रे का कहना है कि अगर लोग यह सवाल करते हैं कि क्या दुनिया में किसी ऐसे व्यक्ति का अस्तित्व संभव है जो काफी वर्षों से जिंदा हो और उसे किसी भी तरह की बीमारी न हो, तो उन्हें मेरा जवाब होगा कि ऐसी संभावना बहुत ज्यादा है कि ऐसा व्यक्ति जिंदा है।
कैलिफॉर्निया स्थित स्ट्रैटजी फॉर इंजीनियर्ड नेग्लिजिबल सिनेसेंस (एसईएनएस) रिसर्च फाउंडेशन के को-फाउंडर डी ग्रे ने कहा कि इसकी 80 फीसदी से ज्यादा संभावना है कि ऐसे लोग हैं। उन्होंने कहा कि अमरत्व एक जिंदा शब्द है और इस शब्द का इस्तेमाल करना गलत नहीं है। डी ग्रे के मुताबिक, अमरत्व का मतलब होता है किसी भी बीमारी से पूरी तरह सुरक्षा। इसके कारण किसी भी व्यक्ति की बढ़ती उम्र का उसके स्वास्थय पर असर नहीं पड़ता है और वह मौत की वजहों को दरकिनार करता रहता है।

9000 एनजीओ के पंजीकरण निरस्त

विदेश से चंदा लेने वाले गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर एक और कड़ी कार्रवाई की गई है। इसी क्रम में सरकार ने विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) का उल्लंघन करने वाली 8,975 गैर सरकारी संगठनों के पंजीकरण रद कर दिए हैं।
गृह मंत्रालय ने अपने एक आदेश में कहा है कि साल 2009-10, 2010-11 और 2011-12 के लिए सालाना रिटर्न नहीं भरने वाले 10,343 एनजीओ को नोटिस जारी किए गए थे। गत वर्ष 16 अक्टूबर को जारी किए गए इन नोटिसों में कहा गया था कि वे एक माह के भीतर अपने-अपने सालाना रिटर्न दाखिल करें। इसमें उन्हें यह भी बताना था कि विदेश से उन्हें कितना चंदा मिला, चंदे का स्रोत और इसे लेने के पीछे उद्देश्य क्या था। साथ ही यह जानकारी भी देनी थी कि एनजीओ ने इस चंदे का क्या उपयोग किया।
रविवार को गृह मंत्रालय से जारी अधिसूचना के अनुसार, 10,343 एनजीओ में से महज 229 ने ही अब तक जवाब दिए हैं। इससे पहले, सरकार ग्रीनपीस इंडिया का एफसीआरए लाइसेंस निरस्त कर चुकी है। साथ ही कथित रूप से कई कानूनों का उल्लंघन करने पर उसके सात बैंकों के खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। गत सप्ताह सरकार ने अपने आदेश में कहा था कि कोई भी बैंक, गृह मंत्रालय से आवश्यक अनुमति लिए बगैर, अमेरिका की फोर्ड फाउंडेशन से प्राप्त होने वाली किसी भी राशि को, किसी भी भारतीय एनजीओ के खाते में जारी नहीं करे।

भविष्यवाणी: फिर मिल रहे हैं प्राकृतिक आपदाओं के संकेत

शनिवार दिनांक 25.04.15 को सुबह 11 बजकर 41 मिनट पर आए 7.9 तीव्रता के भीषण भूकंप से नेपाल, उत्तरपूर्व भारत, बंगलादेश इत्यादि देशों मे तबाही मच गई है। हजारों की तादात में लोगों की मृत्यु हुई है वहीं दूसरी ओर असंख्य इमारतें भी धराशाई हुई हैं। 24 जून 2013, उत्तर भारत में भारी बारिश के कारण उत्तराखण्ड में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा हो गई तथा इस भयानक आपदा में भी हजारों की संख्या मे लोग मारे गए थे। बीते कई दशकों में ऐसी कई प्राकृतिक आपदाएं हमें संकेत देती है कि मानव मस्तिष्क व तकनीकी विज्ञान मिलकर भी प्रकृति के स्वाभाव को समझ नही पाएं हैं। आज के इस वैज्ञानिक युग में भी अभी तक मौसम, वर्षा, बाड़, भूकंप ज्वालामुखी विस्फोट आदि उत्पातों का सटीक अनुमान लगाना असंभव है। सुनामी व भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा का रहस्य अभी तक सुलझाया नहीं जा सका है।
नवसंवत्सर की प्रातः अर्थात शाक संवत 1937 व विक्रम संवत 2072 के सूर्योदय कालीन कुंडली के अनुसार अर्थात शनिवार दिनांक 21.03.15 की प्रातः 06 बजकर 26 मिनट की कुंडली के आधार पर सूर्य, चंद्र, मंगल, शुक्र व वृहस्पति राहु व केतु के मध्य मे स्थित थे। विक्रम संवत 2072 के राजा शनिदेव हैं तथा मंगलदेव इस वर्ष के मंत्री हैं। यह दोनों ग्रह एक दुसरे के परम शत्रु हैं। शुक्रवार दिनांक 20.03.15 चैत्र अमावस्या के दिन संपूर्ण खगोलीय सूर्य ग्रहण लगा था तथा शनिवार दिनांक 04.04.15 चैत्र पूर्णिमा के दिन संपूर्ण खगोलीय चंद्रग्रहण लग था। दोनों ग्रहण 16 दिन के अंतराल पर लगे थे। इस से तात्पर्य यह है कि विक्रम संवत 2072 का आधा हिस्सा अर्थात मंगलवार दिनांक 13.10.15 शारदीय नवरात्र की घट स्थापना तक का समय भूकंप सुनामी व प्राकृतिक आपदाओं हेतु अत्यधित प्रलयंकारी सिद्ध हो सकता है।
इस वर्ष शनिवार दिनांक 21.03.15 से मंगलवार दिनांक 13.10.15 तक का यह लगभग 6 महीने का समय अनेक प्राकृतिक आपदाओं के संकेत दे रहा है। इस समयावधि में कुछ ऐसे दिन, नक्षत्र और तारीखें हैं जो अशुभता का हमें संकेत दे रही हैं। इस छ: महीने की आवधि ये तारीखें इस प्रकार हैं।
1. दिनांक 28.04.2015 इस दिन मंगलवार है व केतु का नक्षत्र मघा भी है तथा अंकशास्त्र के अनुसार इस दिन का समग्र अंक 4 है जो राहू को संबोधित करता है।
2. दिनांक 02.05.2015 इस दिन शनिवार है व मंगल का नक्षत्र चित्रा भी है तथा अंकशास्त्र के अनुसार इस दिन का समग्र अंक 6 है जो शुक्र को संबोधित करता है।
3. दिनांक 05.05.2015 इस दिन मंगलवार है व शनि का नक्षत्र अनुराधा भी है तथा अंकशास्त्र के अनुसार इस दिन का समग्र अंक 9 है जो मंगल को संबोधित करता है।
4. दिनांक 12.05.2015 इस दिन मंगलवार है व राहू का नक्षत्र शतभिषा भी है तथा अंकशास्त्र के अनुसार इस दिन का समग्र अंक 7 है जो केतु को संबोधित करता है।
5. दिनांक 23.05.2015 इस दिन शनिवार है व शनि का नक्षत्र पुष्य भी है तथा अंकशास्त्र के अनुसार इस दिन का समग्र अंक 9 है जो मंगल को संबोधित करता है।
इस वर्ष पुनः रविवार 13 सितंबर 2015 के दिन हिंद महासागर के दक्षिणी छोर में आंशिक सूर्यग्रहण पड़ रहा है तथा सोमवार 28 सितंबर 2015 के दिन आंशिक चंद्रग्रहण भी लग रहा है। पुनः एक पक्ष अर्थात 16 दिन के अंतराल पर दो ग्रहण पड़ रहे हैं। प्राकृतिक आपदा अत्यधिक रूप से अरब खाड़ी से सटे देशों, अफ्रीका, हिमालय का तलहटी क्षेत्र, पूर्वी अफ़्रीका महाद्वीप के देश, पश्चिमी रूस और यूरोपीय देशों में देखे जाएंगे।

राहत अभियान के साथ भूकंप के एपीसेंटर पहुंची भारतीय सेना, काठमांडु तक सड़क खोली

भारतीय सेना भूकंप के एपीसेंटर बारपाक गांव में पहुंच गई है. ये गांव नेपाल के गोरखा जिले में लामजंग के पास है. इस गांव में आपरेशन मैत्री का दायरा बढ़ाते हुए भारतीय सेना ने सोमवार को राहत अभियान चलाया.
वहीं, दूसरी ओर सेना के इंजीनियरों ने भारत से काठमांडू तक की सड़क खोल दी. भारत से काठमांडू तक सड़क खोलने का मतलब है कि राहत सामग्री और उपकरण अब सड़क के रास्ते से भी भेजे जा सकते हैं.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'बारपाक भूकंप का असल एपीसेंटर है, जिस वजह से शनिवार को नेपाल में तबाही मची. बारपाक गांव में झटके बहुत तेज थे, हेलीकॉप्टर से ही 150 शव देखे गए थे. अब यहीं पर टास्क फोर्स राहत कार्य और सड़क मार्ग खोलने में जुटी है, जिससे नेपाल के हर कोने में संभव मदद पहुंचाई जा सके.'
विनाशकारी भूकंप के बाद ऐसी सामग्री पहले केवल हवाई मार्ग से ही भेजी जा रही थी. सेना के अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सेना की ओर से व्यक्त की गई प्राथमिकताओं के तहत काठमांडु में मेजर जनरल जे एस संधू के नेतृत्व में एक टास्कफोर्स हेडक्वाटर बनाया गया है.
एक अन्य टास्कफोर्स बारपाक में ब्रिगेडियर जे गामलिन के नेतृत्व में चल रही है. नेपाल भेजे जाने वाले उपकरण के बारे में पूछे जाने पर अधिकारियों ने कहा, नेपाल को वही सहायता भेजी जा रही है, जिसकी मांग नेपाल सेना कर रही है. हम उनकी जरूरत के मुताबिक मदद कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि नेपाल भारतीय कर्मी नहीं बल्कि उपकरण और विशेषग्यता मांग रहा है. अधिकारियों ने भारतीय सेना के राहत अभियान के बारे में कहा कि रविवार को इंजीनियर टास्कफोर्स ने काठमांडु से पोखरा तक की सड़क खोल दी. उन्होंने कहा कि नेपाली मिलिट्री हेडक्वाटर और भारतीय सेना इंजीनियर टास्कफोर्स के बीच एक उपग्रहीय संचार सम्पर्क स्थापित किया गया है. इसके साथ ही काडमांडु में एक मूवमेंट कंट्रोल टीम स्थापित की गई है


ज्योतिर्लिंग केदारनाथ के कपाट खुले

भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ के कपाट शुक्रवार की सुबह परम्परागत विधि विधान के साथ वैदिक मंत्रोच्चार और सेना के बैण्ड की धुन के बीच ग्रीष्मकाल में दर्शन के लिए खुल गए. गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट 21 अप्रैल को खुल गए थे और बद्रीनाथ के कपाट 26 अप्रैल को खुलने हैं.
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल के अनुसार, पूर्व निर्धारित लग्नानुसार शुक्रवार को प्रात: 8 बज कर 50 मिनट पर रुद्रप्रयाग के जिला प्रशासन और मंदिर समिति के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में समुद्रतल से 3581 कि.मी. की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ मंदिर के सीलबन्द कपाट खोले गए. इसके साथ ही मंदिर में दर्शन कार्यक्रम शुरू हो गया.
शुक्रवार की सुबह जिला प्रशासन, मंदिर समिति के पदाधिकारियों की मौजूदगी में मंदिर के दक्षिणी गेट की सील खोली गई. फिर रावल, मुख्य पुजारी मंदिर समिति के कर्मचारियों और हक-हकूकधारियों के मंदिर में प्रवेश के बाद गर्भ गृह पर लगी सील खोली गई. इसके बाद मुख्य द्वार भी खोला गया. 25 अप्रैल को भैरवनाथ के कपाट खोलने के बाद केदारनाथ में सुबह की दैनिक पूजा एवं अन्य विधि विधान संपन्न किए जाएंगे.
गोदियाल के अनुसार, इस अवसर पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, राज्यपाल डॉ के.के. पॉल, मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अंबिका सोनी, जितिन प्रसाद और राज्य कैबिनेट के कई सदस्य उपस्थित थे. इन दिनों पूरा केदारनाथ धाम बर्फ की मोटी चादर से ढका हुआ है. इस अवसर पर प्रख्यात सूफी गायक कैलाश खेर भी धाम में मौजूद थे.
शीतकाल में केदार की पूजा उनके शीतकालीन गद्दी स्थल उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में होती है. वहां से केदार की डोली कल शाम ही केदारधाम पहुंची थी. केदारनाथ जाने के लिए ऋषिकेश से 207 किलोमीटर तक वाहन से गौरीकुण्ड तक जाना पड़ता है फिर वहां से लगभग 19 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है. बैकुण्ठ धाम के नाम से भी विख्यात बद्रीनाथ के कपाट 26 अप्रैल को खुल रहे हैं.

Sunday, 26 April 2015

अर्जुन पुरस्कार के लिए रोहित शर्मा के नाम की सिफारिश

बीसीसीआई ने इस साल के अर्जुन पुरस्कार के लिए रविवार को बल्लेबाज रोहित शर्मा का नाम प्रस्तावित किया। बीसीसीआई वर्किंग कमिटी ने 2015 के अर्जुन पुरस्कार के लिए रोहित शर्मा का नाम प्रस्तावित किया है। रोहित ने पिछले साल र्ईडन गार्डंस में श्रीलंका के खिलाफ 264 रनों की पारी खेलकर वनडे में सबसे बड़े निजी स्कोर का रिकॉर्ड बनाया था।

इसके अलावा रोहित ने जब पिछले साल वल्र्ड कप में बांग्लादेश के खिलाफ 126 गेंदों में 137 रनों की पारी खेली तो वह मेलबर्न क्रिकेट मैदान पर दो शतक लगाने वाले दुनिया के तीसरे विदेशी बल्लेबाज बन गए। इससे पहले इंग्लैंड के डेविड गोवर और वेस्टइंडीज के विवियन रिचड्र्स ने यह उपलब्धि हासिल की थी।

गौरतलब है कि 2006 में श्रीलंका में हुए अंडर-19 वल्र्ड कप में भारतीय टीम का हिस्सा रहे रोहित के प्रदर्शन ने सभी का ध्यान आकर्षित किया था। इसके बाद उन्हें सीनियर टीम में मौका मिला। हालांकि वह प्रदर्शन में निरंतरता नहीं होने के चलते 2013 तक टीम से अंदर-बाहर होते रहे। बीसीसीआई वर्किंग कमिटी ने बंगाल के दिवंगत युवा क्रिकेट खिलाड़ी अंकित केसरी, झारखंड के गौरव कुमार और नेपाल तथा भारत में भूकंप से मारे गए लोगों को भी श्रद्धांजलि दी।

नेपाल में जली सैकड़ों अर्थियां, जहां जगह मिली लोगों ने वहीं किया अंतिम संस्कार

नेपाल में शोकाकुल परिवारों ने भूकंप में जान गंवाने वाले अपने प्रियजनों का रविवार को यहां के सुप्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर के पास अंतिम संस्कार किया। भ्रमपूर्ण स्थिति और भीड़भाड़ के बीच अंत्येष्टि संपन्न हुई। शवों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि खाली भूखंड काफी बड़ा होने के बावजूद रिश्तेदार मृतकों का अंतिम संस्कार करने के लिए जगह को लेकर एक दूसरे से धक्का-मुक्की करते देखे गए। पर्याप्त जगह न मिलने पर सैकड़ों लोगों को निश्चित स्थान के बाहर अपनों का अंतिम संस्कर करना पड़ा।

रिक्टर पैमाने पर 7.9 तीव्रता के भूकंप से शनिवार को 2,300 लोगों की मौत की आधिकारिक घोषणा की गई। सरकार ने कहा है कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। ज्यादातर मौत काठमांडू घाटी और उसके आस-पास के इलाकों में हुई है। इसी वजह से भगवान शिव के इस एतिहासिक मंदिर के पास स्थित श्मशान स्थल पर अपनों का अंतिम संस्कार करने के लिए लोगों की भारी भीड़ है।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, ‘‘रविवार को बहुत कम समय में 100 से अधिक लोगों का अंतिम संस्कार किया गया। लोगों को जहां भी जगह मिल जा रही है वहां पर वे अपनों का अंतिम संस्कार कर रहे है वह भी उचित रस्मों को पूरा किए बिना।’’ सैकड़ों लोग अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए चक्करदार कतार में खड़े थे। नेपाल की कुल जनसंख्या 2.9 करोड़ है जिसमें 80 फीसदी आबादी हिंदुओं की है। वहीं 10 फीसदी आबादी बौद्धों की है।

साइकिल के पंप से लौटा दी पिता की सांसें

बीकानेर से 180 किमी दूर केडब्ल्यूएस गांव। रात का वक्त। अचानक 62 साल के मनीराम को अस्थमा का दौरा पड़ा। सांसें उखड़नें लगीं तो परिजनों ने दवा दी, लेकिन वह बेअसर रही। शहर जाने का भी कोई साधन नहीं, गांव से बीकानेर जाने के लिए सिर्फ एक बस चलती है, वह भी दिन में। पिता को कष्ट में देखा तो अचानक बेटे सुभाष को कुछ सूझा, वह घर में रखा साइकिल में हवा भरने का पंप उठा लाया। पिता के मुंह पर मास्क लगाया। मास्क की नली को पंप से जोड़ा। दवाई डाली और हवा भरने लगा।
दवा भाप बनकर जैसे ही फेफड़ाें तक पहुंची, पिता की सांसें सध गईं। अगले दिन डॉक्टर को दिखाया तो वह भी सुभाष का ‘इनोवेशन’ देख हैरान रह गए। डॉक्टरों का कहना है-भले ही सुभाष का बनाया डिवाइस प्रामाणिक न हो, लेकिन यह प्रभावी जरूर है। इसी वजह से मनीराम बच पाए। अब अस्पताल में भी डॉक्टरों की निगरानी में इसी पंप के जरिए मनीराम को दवा दी जा रही है।
डॉक्टर बोले- यह इनोवेटिव है- सस्ता भी, कंपनियों को शोध के लिए लिखेंगे
हम इसे प्रामाणिक डिवाइस तो नहीं मान सकते लेकिन यह प्रभावी है, इनोवेटिव भी। अभी एक्सपेरिमेंटल तौर अपनी देखरेख में इसका उपयोग करने की इजाजत दे रहे हैं। कोई दिक्कतें भी होगी तो वे सामने आ जाएगी। अभी तक नतीजे अच्छे हैं। नेबुलाइजर कंपनियों से संपर्क कर कहेंगे, इस तरह की सस्ती और सब जगह उपयोग हो सकने वाली डिवाइस बनाएं।
-डा.गुंजन सोनी, एसोसिएट प्रोफेसर एवं कार्यवाहक विभागाध्यक्ष श्वसन रोग विभाग, एसपी मेडिकल कॉलेज, बीकानेर
बेटे ने कहा- मैंने तो वैसे ही किया जैसा देखा था
सिर्फ 5वीं पास 23 साल के सुभाष ने कहा-मैं तो बस इतना जानता हूं कि मेरे पिताजी बीमार थे। डाॅक्टर ने कहा था- जब दौरे जैसी हालत हो तो भाप बनाने वाली मशीन में दवाई डालकर उसे सांस के जरिये फेफड़ों तक पहुंचाना। पिताजी पहले हॉस्पिटल में भर्ती थे, मैंने वहीं पर मशीन देखी थी। बस, उसी के बारे में सोचता रहा और पंप से जोड़कर नेबुलाइजर बना दिया।
कंपनियां 1000 रु. में देती हैं, 5वीं पास किसान ने सिर्फ डेढ़ सौ में बना दिया
अमूमन अच्छी क्वालिटी के नेबुलाइजर की कीमत बाजार में एक हजार रुपए तक होती है। 5वीं पास 23 साल के सुभाष ने सिर्फ डेढ़ सौ रु. में नेबुलाइजर जैसा डिवाइस तैयार कर दिया। यह दवा को भाप के रूप में फेफड़ों तक पहुंचाता है। अस्थमा और सांस से जुड़ी दूसरी बीमारियों में काम आता है।

सपेरे के पास मिला 31 किलो का किंग कोबरा

कोटा. वन विभाग ने मंडाना क्षेत्र से अलवर निवासी एक सपेरे से 13 फीट लंबा किंग कोबरा पकड़ा है। कोटा में पहली बार वन विभाग ने शिड्यूल वन में इस संरक्षित सांप सहित सपेरे को गिरफ्तार किया है, लेकिन राजस्थान के किसी भी स्नेक पार्क में इतने बड़े सांप को रखने की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते इसे अहमदाबाद या दिल्ली भेजा जाएगा।
सांप को लाडपुरा रेंज में विशेष बंदोबस्त के साथ रखवाया है। शनिवार को मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के एसीएफ राजीव कपूर की सूचना पर वन विभाग के रेंजर दीपक गुप्ता जाब्ते सहित केवलनगर से सांप का खेल दिखा रहे अलवर निवासी नवलनाथ को गिरफ्तार किया है।
31 किलो वजन, 16 हजार में खरीदा था
अधिकारियों ने बताया कि नागराज 31 किलो 700 ग्राम वजनी है। इसे 16 हजार रुपए में खरीदा गया था। यह 500 ग्राम बकरे का मीट खाता है। सामान्यतया दक्षिण पूर्व एशिया में यह सांप मिलता है। यह एशिया के सबसे बड़े खतरनाक सांपों में से एक है।
पालतू होने से स्नेक पार्क में रखना होगा
सांप को रिलीज करने के लिए चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन से परामर्श मांगा है। उच्चाधिकारियों ने कोर्ट के आदेश के अनुसार ही इसे रिलीज करने के निर्देश दिए। अफसरों ने बताया कि यह पालतू होने से इसे जंगल में छोड़ नहीं सकते। प्रदेश के चिड़ियाघरों में भी संपर्क किया, लेकिन हर जगह से कहा गया कि इसको रखने की व्यवस्था नहीं है।
सपेरे के पास मिला 31 किलो का किंग कोबरा
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जेसिका लाल के हत्यारे मनु शर्मा ने की शादी


नई दिल्ली. मॉडल जेसिका लाल की हत्या मामले में उम्र कैद काट रहे मनु शर्मा उर्फ सिद्धार्थ वशिष्ठ ने मुंबई की एक लड़की से शादी कर ली है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक ‘फरलो’ पर दो हफ्ते के लिए जेल से बाहर आए 37 साल के मनु की शादी 22 अप्रैल को चंडीगढ़ में हुई। शादी के मौके पर केवल परिवार के करीबी लोगों को ही बुलाया गया था।
पिता ने नहीं दी जानकारी

शादी के बारे में पूछे जाने पर मनु के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा ने यह कहते हुए टिप्पणी से इनकार कर दिया कि यह ‘मनु के निजी जीवन का हिस्सा’ है। सूत्रों के अनुसार, मनु और इस लड़की का परिचय 10 साल पुराना है, लेकिन साल 2006 में मनु को दिल्ली हाईकोर्ट ने जेसिका लाल मर्डर केस में दोषी करार दिया और यह शादी टल गई। इसके बाद साल 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने भी मनु की सजा को बहाल रखा।
तिहाड़ ने की ‘फरलो’ की पुष्टि

तिहाड़ जेल के एक अधिकारी ने मनु को ‘फरलो’ की पुष्टि करते हुए साफ किया कि वह पैरोल पर नहीं है जिसमें कानूनी प्रतिबंध होते हैं। हालांकि, इस अधिकारी ने यह नहीं बताया कि मनु को ‘फरलो’ किन आधारों पर दिया गया। इस साल की शुरुआत में मनु ने जेल से ही अपना पोस्ट ग्रैजुएशन पूरा किया है।
क्या है ‘फरलो’
फरलो का मतलब जेल से मिलने वाली छुट्‌टी से है। यह पारिवारिक, व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए दी जाती है।
- एक साल में कैदी तीन बार फरलो ले सकता है, लेकिन इसकी कुल अवधि 7 सप्ताह से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ठोस कारणों की स्थिति में फरलो 120 दिन के लिए मंजूर की जा सकती है।
- यह भी जरूरी है कि कैदी ने इससे पहले तीन साल की सजा पूरी कर ली हो और जेल में उसका बर्ताव अच्छा हो। इसकी मंजूरी जेल विभाग के महानिदेशक देते हैं।
क्या है जेसिका लाल हत्याकांड

मॉडल जेसिका लाल की 29 अप्रैल 1999 को मनु शर्मा ने उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी थी, जब दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके में कुतुब कोलोनाडे में सोशलाइट बीना रमानी के स्वामित्व वाले टैमरिंड कोर्ट में उसने उसे शराब परोसने से मना कर दिया था। इस मामले में निचली अदालत ने फरवरी 2006 में उसे बरी कर दिया था। इसके बाद देशभर में गुस्से की लहर फैल गई थी। बाद में हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए केस को फिर से खोला और कानूनी प्रक्रिया के बाद मनु शर्मा को हत्या का दोषी पाया। सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी सजा पर मुहर लगा दी।

भारत के सामने भी खतरा

 नेपाल में शनिवार को आए 7.9 तीव्रता वाले विनाशकारी भूकंप के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि अब उत्तर भारत में भी इतनी ही तीव्रता का भूकंप आ सकता है। अहमदाबाद स्थित भूकंप अनुसंधान संस्थान का कहना है कि कश्मीर, हिमाचल, पंजाब और उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में यह भूकंप आज या आज से 50 साल बाद भी आ सकता है। इन क्षेत्रों में सिस्मिक गैप की पहचान हो चुकी है जिसके कारण भूकंप आता है। 2000 किलोमीटर लंबी हिमालय श्रंखला के हर 100 किलोमीटर के क्षेत्र में उच्च तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, दिल्ली में शनिवार को छह तीव्रता वाला भूकंप आया था, जो 10 किलोमीटर गहरा था और भूकंप का झटका करीब एक मिनट तक आया। आईएमडी के वैज्ञानिक पी.आर. वैद्य ने कहा कि नेपाल अल्पाइन-पट्टी पर पड़ता है, जो धरती की सतह पर मौजूद तीन भूकंपीय पट्टियों में से एक है और इस क्षेत्र में दुनिया का 10 फीसदी भूकंप आता है।

रिक्टर स्केल पर तीव्रता को साधारण तौर पर कैसे समझें

भूकंप की तीव्रता अलग-अलग होती है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि अगर भूकंप आए तो आप सामान्य तरीके से कैसे समझ सकते हैं कि भूकंप कितना खतरनाक है।
0-1.9: केवल सीस्मोग्राफ से ही पता चलता है।
2-2.9: मामूली कंपन ही होता है, जो कई बार तो पता ही नहीं चलता।
3-3.9: कोई भारी वाहन पुल से निकले तो इतना कंपन होता है।
4-4.9: कांच की खिड़कियां चटक सकती है, दीवार से फ्रेम भी गिर सकते हैं।
5-5.9: भारी फर्नीचर और चीजें हिल सकती हैं।
6-6.9: इमारतों की नींव हिल सकती है। ऊपरी मंजिलों को खतरा।
7-7.9: इमारतें गिरने का खतरा, सड़कें फट सकती हैं।
8-8.9: इमारतें और पुल गिर जाएंगे।
9 से अधिक: इसमें सिर्फ तबाही होती है।

क्यों आते हैं भूकंप

विशेषज्ञों के अनुसार, हमारी धरती के नीचे कुल 12 टैक्टोनिक प्लेट्स हैं और इनके नीचे लावा बहता है। प्लेट्स इसी लावे पर तैरती हैं लेकिन जब ये आपस में टकराती हैं तो ऊर्जा निकलती है, इस ऊर्जा के कारण धरती हिलती है जिसे हम भूकंप कहते हैं। प्लेट्स एक जैसी नहीं होतीं बल्कि इनका आकार-प्रकार अलग होता है और कई बार तो केवल इस आकार के कारण ही इनके कोने आपस में टकरा जाते हैं।
कैसे तय होती है भूकंप की तीव्रता
बहुत साधारण भाषा में समझें तो धरती की जितनी ज्यादा गहराई में हलचल होगी या ये प्लेट टकराएंगी, भूकंप की तीव्रता उतनी ही कम होगी और जितनी कम गहराई होगी भूकंप की तीव्रता उतनी ही ज्यादा होगी।

नेपाल और उत्तर भारत में आए भूकंप का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं EXPERTS की चेतावनी: दो महीने तक जारी रह सकते हैं भूकंप के झटके

नई दिल्ली. नेपाल में शनिवार को आए शक्तिशाली भूकंप के झटके अगले दो महीने तक नेपाल और उत्तर भारत को हिलाते रह सकते हैं। यह आशंका भूगर्भीय विशेषज्ञों ने जाहिर की है। विशेषज्ञों ने कहा है कि नेपाल में आए भूकंप की तीव्रता काफी अधिक थी और इसी कारण इतनी तबाही देखने मिल रही है, हालांकि आफ्टर शॉक्स कम तीव्रता वाले होंगे लेकिन ये एक से दो महीने तक समूचे प्रभावित क्षेत्र को हिलाते रह सकते हैं।
भूकंप के बाद सामान्य हैं आफ्टर शॉक्स

विशेषज्ञों का कहना है कि हर शक्तिशाली भूकंप के बाद आफ्टर शॉक्स आना बिल्कुल सामान्य बात है और इसके लिए तैयार रहना चाहिए। शनिवार को आए 7.9 की तीव्रता के भूकंप के बाद रविवार को 6.9 की तीव्रता के ऑफ्टर शॉक्स आए। एक विशेषज्ञ कहते हैं कि बड़े भूकंप के पहले कई बार छोटे भूकंप भी आते हैं लेकिन ये उतने तीव्र नहीं होते। उनका कहना है कि धरती के अंदर होने वाली हलचल इसके लिए जिम्मेदार है। उनका कहना है अब तक आफ्टर शॉक्स और फोर शॉक्स (मुख्य तीव्रता वाले भूकंप के पहले हल्के झटके) का अनुमान लगाने की कोई तकनीक किसी के भी पास नहीं है, इसलिए सतर्कता बरतना ही सबसे बेहतर उपाय है।
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने भी चेताया

USGS ने नेपाल में आए भूकंप के बाद चेतावनी दी है कि नेपाल में इस सप्ताह 5 से ज्यादा तीव्रता वाले करीब 3 से 14 आफ्टर शॉक्स आ सकते हैं। संगठन ने यह चेतावनी भी दी है कि 54 प्रतिशत इस बात की संभावना है कि 6 की तीव्रता वाले झटके आएं। इसके अलावा सात फीसदी आशंका इस बात की है कि 7 से ज्यादा की तीव्रता वाले आफ्टर शॉक्स महसूस किए जाएं। USGS के मुताबिक इंडिया और यूरेशिया के नीचे की प्लेटों की हलचल के कारण यह भूकंप आया।
ये उदाहरण खास लेकिन चिंता देने वाला

विशेषज्ञों के मुताबिक साल 1950 में चीन और अरुणाचल प्रदेश में भूकंप आया, इसे इस क्षेत्र में आने वाला सबसे बड़ा भूकंप माना गया। विशेषज्ञ आज भी इस बात को लेकर हैरान हैं कि इस भूकंप के आफ्टर शॉक्स दो साल बाद तक महसूस किए गए और वो भी शक्तिशाली। नेपाल लगभग उसी क्षेत्र में आता है। 1950 का भूकंप 8.2 की तीव्रता है और इसके आफ्टर शॉक्स करीब 8 की तीव्रता वाले थे, यानी साफ तौर पर हर बार तबाही। ताजा मामले में जानकारों को इसी बात की चिंता सता रही है।

भूकंप से तबाह गोरखा में दबी हैं 1000 लाशें, नहीं पहुंची मदद

काठमांडू/गोरखा(नेपाल). नेपाल में शनिवार को आए भूकंप के बाद से 66 छोटे-बड़े झटके आए हैं। भूकंप में मरने वालों की संख्‍या आधिकारिक तौर पर 3200 को पार कर गई है। लेकिन, इसमें गोरखा में मरे लोग शामिल नहीं हैं। भूकंप ने काठमांडू के बाद सबसे ज्यादा गोरखा क्षेत्र में तबाही मचाई है। इस क्षेत्र में 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इनकी लाशें यूं ही पड़ी हैं। एक हजार से ज्यादा लोग घायल पड़े हैं। दो हजार से ज्यादा लोग अभी भी यहां पर फंसे हुए हैं, लेकिन यहां अब तक राहत के लिए कोई नहीं पहुंच पाया है। काठमांडू जाने के क्रम में हमारे संवाददाता राजेश कुमार ओझा ने सबसे पहले इस क्षेत्र का हाल जाना।
गोरखा के डीएसपी अर्जुन चंद्र का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने में अभी दो से तीन दिन लग सकते हैं। चट्टानें गिरने से रास्‍ते बंद हो गए हैं। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यहां पर हेलिकॉप्टर भी नहीं उतारा जा सकता है। इन क्षेत्रों के तकरीबन 90 प्रतिशत मकान ध्वस्त हो गए हैं। मकान धंसने के कारण ही ज्‍यादातर मौतें हुई हैं।

नामुमकिन हो रहा मदद पहुंचा पाना
रविवार को भारतीय वायु सेना का विमान इस क्षेत्र में गया था, लेकिन नहीं उतर पाया। सोमवार को इससे छोटा विमान भेज कर मदद पहुंचाने की कोशिश होगी। बिजली और मोबाइल फोन कनेक्‍शन भी नहीं होने के चलते भूकंप से बच गए लोगों की परेशानी कई गना बढ़ गई है।
रविवार को नेपाल सरकार की एक रेस्‍क्‍यू टीम सुबह आई थी, लेकिन प्रभावित लोगों तक नहीं पहुंच पाई। यहां तक जाने के रास्तों पर बड़े बड़े पत्थरों के गिरने के कारण यह क्षेत्र फिलहाल संपर्क से दूर हो गया है।
खरीददारी करने गए थे लोग
शनिवार को पहाड़ से नीचे खरीददारी करने आए लोग भी फंसे हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शनिवार सुबह गांव के कई लोग गोरखा बाजार से सामान खरीदने के लिए नीचे उतरे थे। समान खरीद कर जब ये लोग ऊपर जा रहे थे तभी भूकंप आ गया।

Saturday, 25 April 2015

एक और 'गजेंद्र', मोबाइल टावर से कूदकर मेरठ के किसान ने दी जान

फसल बर्बाद होने और कर्ज के बोझ से दबे खरखौदा क्षेत्र के किसान ने शुक्रवार को मोबाइल टावर से कूदकर खुदकुशी कर ली। करीब सवा चार घंटे तक किसान टावर पर रहा, मगर मौके पर मौजूद पुलिस और नायब तहसीलदार तमाशबीन बने रहे।

इस दौरान वह लगातार फसल के नुकसान पर मुआवजे की मांग करता रहा, लेकिन उसकी बात सुनने कोई सक्षम अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। किसान की मौत के बाद भड़के लोगों ने अफसरों और पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। बंधक भी बना लिया।

खरखौदा थाना क्षेत्र के रसूलपुर धनतला निवासी योगेंद्र पुत्र लीलू (38) पुत्र हरीश चंद्र के पास सात बीघा जमीन है। पहले वह शाहदरा स्थित एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। तीन साल पहले जॉब छूट गई। इसके बाद गांव में आकर परिवार पालने के लिए खेती करने लगा।

कभी मौसम तो कभी अन्य कारण से खेती में लगातार घाटा हुआ, तो उसने कर्ज लेना शुरू कर दिया। इस बीच उस पर साहूकारों के पांच लाख कर्ज हो गए। इसकी वजह से मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था। शुक्रवार दोपहर लगभग 11 बजे वह खेत पर पहुंचा तो गेहूं की बर्बाद फसल देखकर व्यथित हो गया।

इसके बाद वह अनमने मन से खेत से चला तो लगभग 11:30 बजे गांव के ही दयाराम की जमीन पर लगे मोबाइल कंपनी के टावर के पास रुक गया। कुछ क्षण खड़े-खड़े सोचता रहा और फिर बाउंड्री फांदकर अंदर घुसा और टावर पर चढ़ने लगा। ऐसा करते देख गांव के ही राजकुमार ने उसे रोका, लेकिन वह नहीं माना।

योगेंद्र के टावर पर चढ़ने की सूचना राजकुमार ने ही पुलिस कंट्रोल रूम और गांव वालों को दी। इस पर लगभग� 40 मिनट बाद खरखौदा थाने से एक दरोगा और तीन सिपाही पहुंचे। ग्रामीणों के साथ योगेंद्र की पत्नी कृष्णा और अन्य परिजन भी पहुंच गए।

ग्रामीण और परिजन उससे नीचे उतरने की गुजारिश करते रहे, लेकिन वह नहीं माना। इस पर योगेंद्र के भतीजा शैंकी के अलावा महावीर सिंह और ओमेंद्र टावर पर चढ़े और उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन उसने नीचे उतरने से साफ मना कर दिया। हां, शैंकी से मंगाकर टावर पर ही पानी जरूर पीया।

सारा घटनाक्रम पुलिस की आंखों के सामने चलता रहा। लगभग एक बजे नायब तहसीलदार (तृतीय) जयेंद्र सिंह पहुंचे, लेकिन वह अपनी कार से नहीं उतरे। फायर स्टेशन ऑफिसर संतोष राय टीम के साथ पहुंचे तो सीढ़ी छोटी पड़ गई। इस पर टावर पर चढ़ने में मजबूरी जता दी। लंबी सीढ़ी मंगाने के लिए दमकल वाहन भी लौटा दिया। वहीं टावर गार्ड सुरक्षा की टीम भी कुछ नहीं कर सकी।

...और 120 फीट ऊंचे टावर से कूद गया
योगेंद्र लगभग 11:30 बजे 120 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ा। इस दौरान वह बार-बार बर्बाद फसल का मुआवजा मांगता रहा। सारा घटनाक्रम पुलिस वालों के अलावा नायब तहसीलदार आदि के सामने होता रहा, लेकिन उसकी बात को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया।

कोई सक्षम अधिकारी भी उसकी बात सुनने नहीं पहुंचा। न ही उसे उतारने के लिए कोई ठोस प्रयास किया गया। इस पर लगभग 3:40 बजे योगेंद्र ने टावर से छलांग लगा दी। नीचे गिरते ही दम तोड़ दिया।

दयाराम की जमीन पर लगे मोबाइल कंपनी के टावर पर योगेंद्र को चढ़ते देख गांव के ही राजकुमार भड़ाना ने उसे रोका। कारण भी पूछा। इस पर योगेंद्र ने जवाब दिया कि सब बर्बाद हो गया है, अब कुछ नहीं बचा, तुम टेंशन मत लो, मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।

अफसरों और पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा
किसान योगेंद्र की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार और पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। एफएसओ (फायर सर्विस ऑफिसर) को बंधक भी बना लिया। जमकर हंगामा हुआ। फिर करीब साढ़े चार बजे एसओ खरखौदा और पांच बजे एसपी क्राइम, एसडीएम रवीश गुप्ता फोर्स के साथ पहुंचे। एडीएम (प्रशासन) एके उपाध्याय भी पहुंचे और ग्रामीणों से वार्ता की।
 

 

फंदा लगाने से पहले गजेंद्र ने बहन से क्या की थी आखिरी बात

सियासत के सर्कस में गजेंद्र सिंह की आत्महत्या नया तमाशा बन गई है। राजनीतिक दल अपनी फितरत और जरूरत की मुताबिक उनकी आत्महत्या को भुना रहे हैं।

गजेंद्र की चिता की राख जैसे-जैसे ठंडी हो रही है, उन हालात की तस्वीर अधिक साफ हो रही है, जिन हालात में उन्होंने आत्महत्या की। ये तस्वीर कम से कम ये तस्दीक तो कर ही रही है कि गजेंद्र जंतरमंतर आत्महत्या करने के इरादे से नहीं गए थे।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, बुधवार को जंतरमंतर पर गमछे से फंदा लगाने से चंद मिनट पहले गजेंद्र ने अपनी बहन से मोबाइल बात की थी। गजेंद्र की बहन रेखा कंवर ने ही उन्हें फोन किया था। बहन के मुताबि‌क, बातचीत से गजेंद्र खुश लग रहे थे और शाम तक जयपुर पहुंचने को कहा था।

गजेंद्र की बहन रेखा कंवर ने बताया, 'उनकी आवाज साफ सुनाई नहीं दे रही थी, क्योंकि वहां बहुत शोर हो रहा था। उन्होंने बताया कि वे एक रैली में हैं और शाम जयपुर लौटने का वादा किया।'

गजेंद्र ने रेखा को फोन पर बताया था कि उनके पास 1.5 लाख रुपए हैं, जो उन्होंने दिल्ली में एक शादी में पगड़ी बांधने के एक ठेके से कमाए थे। 27 अप्रैल को उनकी भतीजी की शादी थी। बहन ने बताया कि उन्हें शादी के लिए फर्नीचर और कपड़े खरीदने थे।

गजेंद्र की पांच बहनें हैं, रेखा उनमें से एक है। उनके दो भाई भी हैं। गजेंद्र खेती के अलावा साफा बांधने का बिजनेस भी करते थे। गजेंद्र ने अपनी बहन रेखा कंवर के घर को ही अपने बिजनेस के प‌ते के रूप में दे रखा था।

गजेंद्र को उनके गांव झामरवाड़ा में बबलू कहा जाता था। उनके पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने बताया कि उन्हें देखकर कभी ऐसा नहीं लगा कि वे फसलों की बर्बादी से तनाव में थे।

उन्होंने बताया कि गजेंद्र को साफे के बिजनेस से बहुत फायदा हो रहा था। रिश्तेदारों ने बताया कि 2003 में उन्होंने सपा से टिकट लेने की कोशिश की थी, हालांकि पार्टी ने मना कर दिया, जिसके बाद उनकी राजनीति महत्वाकांक्षाएं खत्म हो गई थीं। पिछले कुछ दिनों से एक बार फिर राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गए थे।

रेखा ने बताया कि इन दिनों वे बहुत खुश थे, क्योंकि उनकी भतीजी की शादी होने वाली थी और उससे वह बहुत प्यार करते थे।
 

जम्मू: ट्रैक्सी च‌िनाब में ग‌िरी, छह लोग लापता

जम्मू श्रीनगर हाईवे पर शन‌िवार तड़के हुए सड़क हादसे में छह लोगों लापता हो गए हैं। पुल‌िस के मुताब‌िक रामबन के पास एक टबेरा गाड़ी के नदी में जा ग‌िरी ज‌िससे उसमें सवार छह लोगों पानी के तेज बहाव में बह गए। जबक‌ि छह गंभीर रुप से घायल हो गए हैं। जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर रामबन के पास मेहद के पास यह सड़क हादसा हुआ है। पुल‌िस के मुताब‌िक वाहन चालक ने तेज गत‌ि के चलते टेबेरा पर से अपना संतुल‌न खो बैठा ज‌िससे ट्रैक्सी फ‌सलती हुई च‌िननाब नदी में जा ग‌‌िरी।

प‌ुल‌िस के मुताब‌िक, हादसा स्थल पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरु कर द‌‌िया है। अभी तक गंभीर रुप से घायल छह लोगों को न‌िकाला जा चुका है। टैक्सी में फंसे वाकी लोग लापता हैं। पानी ते तेज बहाव के कारण टबेरा गाड़ी भी बह गई है।

प्रशासन के मुताब‌िक अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है क‌ि वाहन में क‌ितने लोग सवार थे। वाहन के नदी में ग‌िरने से कुछ लोगों के बह जाने की संभावना है। लेक‌िन प्रशासन की ओर यह स्पष्ट नहीं क‌िया गया है क‌ि क‌ितने लोग लापता है। वाहन में सवार अध‌‌िकतर लोग मजदूर बताए जा रहे हैं।

12वीं पास की भर्ती, 35 हजार रुपए सैलरी

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पर्सनल असिस्टेंट के खाली पदों को भरने के लिए विज्ञप्ति जारी की गई है। विज्ञापित पदों की कुल संख्या 14 है, जिसमें अनारक्षित वर्ग के 09, अनुसूचित जाति के 03 और अनुसूचित जनजाति के 02 पद शामिल हैं।

विज्ञापित पदों को भरने की शैक्षिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय से 12वीं उत्तीर्ण निर्धारित की गई है। अन्य योग्यता के अंर्तगत उम्मीदवारों को शार्टहैंड (100 शब्‍द प्रति मिनट) का ज्ञान होना आवश्यक है। अनुभव के तहत उम्मीदवारों ने न्यूनतम दो वर्ष स्टेनोग्राफर के रूप में कार्य किया होना चाहिए।

विज्ञापित पदों पर उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट प्रदान की जाएगी। वेतनमान के तौर पर चयनित उम्मीदवारों को 9,300 रुपये से लेकर 34,800 रुपये व ग्रेड पे 4,200 रुपये प्रतिमाह दिया जाएगा।विज्ञापित पदों पर केवल ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं व दिए हुए निर्देशों के अनुसार सावधानीपूर्वक आवेदन पत्र को भरें।

इन पदों के लिए सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 300 रुपये का डीडी 'फाइनेंस ऑफिसर, जेएनयू नई-दिल्ली' के पक्ष में बनवाकर जमा करना होगा। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन निशुल्क है।

पूर्ण रूप से भरे हुए आवेदन पत्र का प्रिंटआउट निकालकर उसके साथ शैक्षिक प्रमाणपत्रों की प्रति और डिमांड ड्रॉफ्ट को संलग्न करें व 'डिप्टी रजिस्ट्रॉर (एडमिनिस्ट्रेशन/आर एंड सी सेल), कमरा नंबर 310, एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, न्यू महरौली रोड, नई दिल्ली-110067' के पते पर भेजें।

योग्य उम्मीदवारों को कौशल परीक्षा और लिखित परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। आवेदन पत्र निर्धारित पते पर पहुंचने की अंतिम तिथि 18 मई, 2015 निर्धारित की गई है।‌ आवेदन करने के लिए या किसी अन्य जानकारी के लिए उम्मीदवार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट www.jnu.ac.in पर लॉग ऑन करें।

भारत के दो छात्रों का कमाल : जूता चार्ज करेगा आपका फोन

यह बात सूनने में थोड़ी अटपटी लग सकती है मगर रांची के दिल्ली पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले दो छात्रो ने ऐसा जूता बनाया है जो फोन को चार्ज कर सकता है। 10वीं कक्षा के छात्र उदेश और उत्कर्ष ने मोबाइल को चार्ज करने वाले जूते का मॉडल तैयार किया है।

एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार ये छात्र गुड़गांव सेक्टर-10 स्थित ब्ल्यू बेल्स पब्लिक स्कूल में आयोजित केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में हिस्सा लेने आए थे। इस माॅडल को तैयार करने में महज 100 रुपए का खर्च आया है। छात्रों द्वारा बनाया गया यह मॉडल प्रिंसिपल ऑफ एनर्जी पर काम करता है जो मांसपेशियों की ऊर्जा को इलेक्ट्रिक ऊर्जा में बदलता है। मगर इन जूतों से उत्पन्न हुई ऊर्जा व्यर्थ नहीं होती।

इस जूते से फोन को चार्ज करने में उतना ही समय लगता है जितना आम तौर पर लगता है। छात्र उदेश और उत्कर्ष ने बताया कि जूते के नीचे एक स्प्रिंग लगाया गया है। इसके अलावा जूते के पीछे के हिस्से में छोटा सा अल्टरनेटर, कैपेस्टर, डायोड और गियर सेट तथा मोबाइल की चार्जर केबल लगाई गई है, जो फोन को चार्ज करती है।

बर्बाद फसल के सदमे ने ली 27 और किसानों की जान

लखनऊः सरकारों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से फसल बर्बादी, बैंकों व साहूकारों के कर्ज में फंसे किसानों के मरने का सिलसिला जारी है। बीते 24 घंटे में सूबे में 27 और किसानों ने दम तोड़ दिया। एटा में एक किसान ने सप्फास खाकर जान दे दी। सीतापुर में किसान ने फांसी लगा ली। बरेली व नोएडा में एक-एक किसान ने आत्महत्या का प्रयास किया।


एटा के जलेसर के गांव लालपुर में किसान नरेंद्र ने बारिश और ओलावृष्टि में पूरी तरह फसल बर्बाद होने पर शुक्रवार को सल्फास खा लिया। सीतापुर में मछरेहटा के सकरारा गांव में राम सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आगरा लाते समय मौत हो गई।
बरेली के फतेहगंज पूर्वी क्षेत्र के बाकरगंज इलाके में किसान राजू ने बर्बाद फसल और कर्ज से परेशान होकर खुद को आग लगा ली। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। नोएडा के जेवर कोतवाली के जहांगीरपुर कस्बे से सटे नेकपुर गांव में गुलबीर ने गेहूं के लांक में आग लगाकर छलांग लगा दी, लेकिन किसानों ने उसे बचा लिया। वह गेहूं की कम पैदावार से निराश था।


आगरा के फतेहाबाद तहसील के जगराजपुर में किसान ओम प्रकाश और एत्माद्पुर के गारापुरा में राजपाल की सदमे से मौत हो गई। शाहजहांपुर के खुटार के थाना क्षेत्र के गांव सिल्हुआ में रामप्रकाश और ¨सधौली के गांव खिरया रसूलपुर में दाताराम हार्टअटैक का दर्द सहन नहीं कर सके। रामपुर के सदर तहसील के आगापुर निवासी पुत्तन सलमानी और शाहबाद के तुरखेड़ा गांव की महिला किसान सरवती की भी मौत हो गई।


सम्भल जिले की सदर तहसील क्षेत्र के गांव दिलगोरा में वीरवती और बहजोई के आल पुर मैथरा में नेकपाल भी फसल की तबाही की पीड़ा बर्दाश्त नहीं कर पाए। अलीगढ़ के गभाना तहसील क्षेत्र के गांव गोकुलपुर में दरबर सिंह, गांव ओगर में ननुआ व अतरौली तहसील क्षेत्र के गांव बहरावद के संतोष की भी सदमे से मौत हो गई।


उधर, गाजीपुर के सैदपुर थाना क्षेत्र के ध्रुवार्जुन गांव में शोभा राजभर, बलिया के बैरिया तहसील क्षेत्र के सोनबरसा गांव बैरिया में शंकर यादव और मीरपुर में मेरापुर निवासी राजू निषाद हार्ट अटैक से मौत हो गई। फतेहपुर में बिंदकी कोतवाली के रैपुरवा गांव निवासी रामशरण, बांदा में नरैनी कोतवाली क्षेत्र के मोतियारी गांव निवासी शिवफल त्रिपाठी, कौशाम्बी के सदर तहसील के म्योहर गांव में एक किसान सदमे में चल बसे। प्रतापगढ़ के लालगंज तहसील में सांगीपुर के पास गोकुला गांव के राजेश वर्मा ने भी दम तोड़ दिया।


बाराबंकी के थाना जैदपुर के ग्राम इचौलिया में जंगबहादुर पटेल, लखीमपुर में सीताराम व सुदामा देवी की मौत हो गई। रायबरेली में शिवगढ़ क्षेत्र में रामेश्र्वर था बांदा में अतर्रा थानांतर्गत बल्लान गांव में धर्मराज की हार्टअटैक से मौत हो गई है। हरदोई में कोतवाली वेरुआ निजामपुर में राम आसरे भी सदमे में चल बसे।

पंचायतों में ‘सरपंच पति’ संस्कृति समाप्त करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंचायतों में ‘सरपंच पति’ संस्कृति समाप्त करने का आह्वान करते हुए आज गरीबी उन्मूलन तथा शिक्षा के प्रचार-प्रसार में निर्वाचित ग्राम प्रतिनिधियों के लिए नेतृत्व वाली भूमिका की वकालत की। सरपंच पत्नियों के कामकाज में पतियों के कथित दखल के बारे में मोदी ने एक राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र किया। उनके अनुसार किसी ने उनसे कहा कि वह एस.पी. (सरपंच पति) है।  प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘एस.पी. का काम चल रहा है। कानून ने महिलाओं को अधिकार दिए। जब कानून उन्हें अधिकार देता है तो उन्हें अवसर भी मिलना चाहिए। इस एस.पी. संस्कृति को खत्म करें। उन्हें (महिलाओं को) अवसर दिया जाना चाहिए। उन्हें आगे बढ़ाया जाना चाहिए।’’
 
प्रधानमंत्री ने पंचायत स्तर पर नेतृत्व क्षमता विकसित करने, निरक्षरता तथा गरीबी मिटाने और पंचवर्षीय योजना तैयार करने का आज आह्वान किया। मोदी ने ‘अपना गांव अपना विकास’ का नया नारा बुलंद करते हुए पंचायतों से संकल्प लेने का आह्वान किया कि उनके कार्यकाल में कोई बच्चा स्कूल नहीं छोड़ेगा और वे कम से कम 5 परिवारों को गरीबी से मुक्ति दिलाएंगे। महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘भारत गांवों में बसता है। हमें यह सोचने की जरूरत है कि हमारे गांवों का विकास कैसे हो। यहां तक कि सुदूरवर्ती गांव में भी लोगों के बड़े सपने हैं। सोचिए कि अपने गांव के लिए आप अगले 5 साल में क्या हासिल कर सकते हैं।’’
 
पंचायतों में महिलाओं के आरक्षण की अवधि 10 साल होगी
सरकार पंचायती राज्य संस्थाओं में महिलाओं का आरक्षण मौजूदा 5 साल से बढ़ाकर 10 साल करने के राज्यों के एक सुझाव को स्वीकार कर सकती है। ग्रामीण विकास मंत्री बीरेन्द्र सिंह ने आज यहां एक चर्चा के दौरान कहा कि राज्यों के कई प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया है कि आरक्षण के आधार पर 5 साल के एक कार्यकाल के लिए पंचायती राज संस्थाओं में चुनी जाने वाली महिला सदस्य ज्यादा कुछ कर पाने में अक्षम रहीं। 
 
उन्होंने बताया कि ये सुझाव हैं कि वार्ड एवं ब्लॉकों में महिला सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाकर 10 साल (दो कार्यकाल) कर दिया जाए, ताकि वे लंबी अवधि के लिए योजनाएं तैयार कर सकें। सरकार सुझाव स्वीकार कर सकती है।

Thursday, 23 April 2015

कूड़े के ढेर हटे, पानी से धुली सड़क

मेरठ : हाईकोर्ट के डंडे का असर दिखा। बुधवार को जिला प्रशासन व नगर निगम ग्रामीण क्षेत्रों से बुलाए गए सफाई कर्मियों की फौज के साथ शहर की सड़कों पर उतरा। ये काम हालांकि पहले भी किया जा सकता था, लेकिन शायद प्रशासन को अदालत की लताड़ का इंतजार था। हालांकि हड़तालियों ने मोर्चाबंदी की कोशिश की। टकराव के मद्देनजर शहर के चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात थी।
इससे पहले प्रशासन ने सुबह दस बजे तक का वक्त हड़ताली सफाईकर्मियों को फैसला लेने के लिए भी दिया। 12 बजे सफाई कर्मियों ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी हड़ताल टूटने वाली नहीं है। इसके साथ ही नगर आयुक्त एस के दुबे के नेतृत्व में जिला प्रशासन, पुलिस व निगम अफसरों की फौज ग्रामीण सफाईकर्मियों के साथ तीनों डिपो से वाहन लेकर शहर में सफाई करने निकल पड़ी। शाम तक प्रमुख चौराहों, मार्गो पर जमा कूड़ा तथा डलावघरों से कूड़े के ढेर साफ किए गए। नगर आयुक्त एसके दुबे तथा नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह ने बताया कि सफाई के लिए शहर को तीन जोन में बांटा गया जबकि कानून व्यवस्था के लिहाज से 32 सेक्टर बनाए गए। सभी सफाई निरीक्षकों तथा दोनों जोनल सेनेट्र्ी अफसरों की देखरेख में तीनों जोन में 72 से ज्यादा डलावघरों पर लगे कूड़े के ढ़ेर साफ कर दिए गए। आज तीनों जोन में 110 सफाई कर्मियों ने काम किया।
फिलहाल ये व्यवस्था
प्रत्येक वार्ड में आउटसोर्सिग पर काम करेंगे 10 सफाई कर्मचारी
नगर आयुक्त एसके दुबे ने बताया कि गुरुवार को भी ग्राम पंचायतों से सफाई कर्मियों को बुलाया जाएगा। कस्बों तथा नगर पालिकाओं से भी बेरोजगार युवकों को आउटसोर्सिग पर शहर में काम करने का मौका दिया जाएगा। महापौर के कैंप कार्यालय में बुधवार शाम को हुई कार्यकारिणी व अफसरों की बैठक में आउटसोर्सिग पर 10 सफाई कर्मचारी रखने का फैसला किया गया।
पहले दिन कितना साफ हुआ शहर
वाहन डिपो जुड़े वार्ड साफ हुए डलावघर
सूरजकुंड 34 31

दिल्ली रोड 32 21

कंकरखेड़ा 14 20

वर्जन

'देखते हैं कितने दिन चलती है ये व्यवस्था'

जिला प्रशासन द्वारा कराई जा रही सफाई का हम विरोध नहीं करेंगे। देखते हैं कि कितने दिन तक यह व्यवस्था रहती है। हाईकोर्ट का आदेश अफसरों के लिए है, शहर की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी कोर्ट ने उन्हें दी है। हम अपनी हड़ताल पर कायम हैं।

छात्रों ने डीएम से की पब्लिक स्कूलों की शिकायत

मेरठ : शहर के पब्लिक स्कूलों की मनमानी के खिलाफ डीएन डिग्री कालेज के छात्रों ने जिलाधिकारी से शिकायत की। पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अंकित चौधरी के नेतृत्व में छात्रों ने पब्लिक स्कूलों में हर साल फीस बढ़ाने, कोर्स बदलने, ड्रेस व किताबों को स्कूल में बेचने, प्रोस्पेक्टस में एकरूपता न होने व शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत दाखिले न करने का आरोप लगाया है। छात्रों की मांग पर जिलाधिकारी ने एडीएम सिटी की अगुवाई में एक समिति बनाकर प्रधानाचार्यो संग बैठक करने का आदेश दिया। डीएम से मिलने वाले छात्रों में अमित, दीपक, अभिषेक, आकाश शर्मा, आकाश, हितेश, आशीष, सुधीर, शुभम आदि शामिल रहे।

57 करोड़ रुपये में हुई टीपू सुल्तान के शस्त्रों की नीलामी

मैसूर के अंतिम बादशाह टीपू सुल्तान के शस्त्र और कवच को नीलाम किया गया. हैदर अली के बड़े बेटे और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के पहले सिपाही टीपू सुल्तान के शस्त्रों की नीलामी से लगभग 57 करोड़ रुपये मिले.
21 अप्रैल को लंदन में आयोजित बोन्हैम्स इस्लामी एवं भारतीय कला नीलामी के दौरान टीपू सुल्तान की 30 वस्तुएं नीलाम की गईं. इसके खरीदार की पहचान गुप्त रखी गई है.
इस शस्त्रों में सबसे अधिक टीपू सुल्तान की दुर्लभ रत्न-जड़ित और बाघ के सिर के मूठ वाली तलवार रही. यह 20.45 करोड़ रुपये में बिकी. जबकि इसकी नीलामी में महज 57 से 76 लाख रुपये मिलने का ही अनुमान लगाया गया था.
बाघ टीपू सुल्तान की खास पसंद का जानवर था. यही कारण था कि उनकी पसंद की कलाकृतियों और शस्त्रों में बाघ की पट्टी का डिजाइन हुआ करता था.
उनकी तीन पहिए वाली तोप के 13.54 करोड़ रुपये जबकि उनकी पुरानी बंदूक के भी, अनुमान से सात गुनी अधिक कीमत, 6.86 करोड़ रुपये मिले.

तिब्बत में खतरनाक रफ्तार से पिघल रहे हैं ग्लेशियर

चीन के ग्लेशियर खासकर तिब्बत क्षेत्र वाले ग्लेशियर में पिछले 65 साल में करीब 7,600 वर्ग किलोमीटर (करीब 18 फीसदी) के ग्लेशियर गायब हो गए हैं. माउंट एवरेस्ट के आधार शिविर के पास भी बर्फ की मोटी परत प्रदूषण के बढ़ते स्तर की वजह से गायब हो गई हैं और वहां केवल पथरीली जमीन बची है.

एक चीनी अधिकारी ने बताया कि 1950 के बाद से हर साल 247 वर्ग किलोमीटर बर्फीले ग्लेशियर गायब हो रहे हैं. यहां तक कि माउंट कोमोलांगमा (एवरेस्ट का तिब्बती नाम) के पर्वतारोही भी हैरान हैं.

तिब्बत के पर्वतारोहण प्रशासन केंद्र के निदेशक झांग मिंगशिंग ने सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ से कहा, ‘समुद्र स्तर से 5,200 मीटर उपर स्थित कोमोलांगमा आधार शिविर पर बर्फ की मोटी चादर थी, लेकिन अब वहां कुछ नहीं है केवल पत्थर हैं.’ चीन में 46,000 से अधिक ग्लेशियर हैं जो दुनिया के कुल ग्लेशियर का करीब 14.5 फीसदी है. इनमें से ज्यादातर किंगहाई-तिब्बत पठार में हैं.

ग्लेशियर न सिर्फ ताजे पानी के बड़े भंडार होते हैं, साथ ही जलवायु प्रणाली के महत्वपूर्ण भाग भी होते हैं.

चीन के ग्लेशियर का सर्वेक्षण करने वाले दल के नेतृत्वकर्ता लियू शियिन ने कहा कि ग्लेशियर पिघलने की वजह से आपदाएं आएंगी.

बेटी को देख मां-बाप के उड़े होश


शहर के डैंटल कॉलेज में बी.डी.एस. फाइनल ईयर की छात्रा ने अपने घर में फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। 
 
जानकारी के अनुसार स्थानीय कैनाल व्यू में रहती एक बी.डी.एस. की छात्रा जब घर में अकेली थी तो उसने पंखे से लटककर आत्महता कर ली। जब मां-बाप घर पहुंचे तो कमरे का दरवाजा खोलते ही दंग रह गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्रा को स्थानीय प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया है। 
 
एस.एच.ओ. एस.पी. सिंह ने बताया कि छात्रा मिलन छाबड़ा (23) पुत्री राज कुमार ने सुसाइड नोट में अपनी मौत का जिम्मेदार कॉलेज को बताया है। मृतका की मां ने भी कॉलेज की 2 लेक्चरर्स पर अपनी बेटी की मौत का कारण बताया है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि  कॉलेज वालों ने उसकी बेटी को टैंशन देकर उसकी जान ली है। 
 
फिलहाल पुलिस ने मृतका की मां के बयानों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

धार्मिक स्थल पर माथा टेकने गर्इ लड़कियों को बीच सड़क पर रोक.......

आए दिन लूटपाट और लड़कियों को तंग करने की घटनाएं सुनने को मिलती है लेकिन लुधियाना में तो बदमाशों के हौंसले ही बुलंद हो गए हैं। इसलिए उन्होंने न पुलिस की परवाह किए बगैर एक्टिवा पर जा रही 2 बहनों के साथ मारपीट करके उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया। 
 
जानकारी के अनुसार दुगरी इलाके की सी.आर.पी. कालोनी में देर सायं दो सगी बहनें अपने छोटे  भाई के साथ एक्टिवा पर घर जा रही की इसी  बीच बाइक सवारों ने पर्स छीनने की कोशिश की। 
 
एक्टिवा के पीछे बैठी बहनों ने जब पर्स नहीं छोड़ा तो उन्हें बेरहमी से पीटते हुए नीचे गिरा दिया। इस बीच बदमाशों ने बच्चे के मुंह पर मुक्का मारकर जख्मी कर दिया।
 
शोर सुनकर जब लोग इकट्ठे होने लगे तो स्नैचर फरार हो गए। जिसके बाद घायल हुए भाई-बहनों को एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया व पुलिस को सूचित किया गया। घायलों की पहचान एल.आई.जी. फ्लैट की रहने वाली अमनदीप कौर उसकी बहन मनविंद्र कौर व भाई जपनूर के रूप में हुई है। 
 
पुलिस को दी शिकायत में अमनदीप कौर ने बताया कि वह अपने भाई-बहन के साथ माडल टाऊन में स्थित धार्मिक स्थल पर शाम करीब 7 बजे माथा टेकने गई थी। रात करीब 8 बजे जब वह वापस आ रहे थे तो मोटरसाइकिल सवार स्नैचरों ने उन्हें बीच सड़क रोक लिया व पर्स झपटने का प्रयास किया। विरोध करने पर स्नैचरों ने उनसे मारपीट की। अतिरिक्त थाना प्रभारी हरिंद्र सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।

देखिए तस्वीरें, दुनिया के अंत का संकेत है यह!

प्राकृतिक ने हमें सब कुछ दिया है तो क्या यह हमारा कर्तव्य नहीं हैं कि हम इसे संभाल कर साफ-सुथरा रखें लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। बढ़ती जनसंख्या और गंदगी से धरती को खराब करते हम लोग अपने भविष्य को देख नहीं रहें हैं।
इस धरती पर 22 हजार लोग रोज पैदा होते हैं। जनसंख्या वृ‌द्घि के बारे में लोगों का ध्यान आ‌कर्षित करने के लिए एक किताब ने इन तस्वीरों को छापा गया है।  यह सभी तस्वीरें मिरर में छापी गई है।इस किताब का नाम है ओवरडेवलपमेंट, ओवरपॉपुलेशन और ओवरशूटा। आप इन तस्वीरों को देखकर समझ सकते हैं कि किस हद तक हम अपने कामों से धरती को तबाह कर चुकें हैं।
इनमें से कई तस्वीरों में हम देख रहें हैं कि कैसे हमारा पर्यावरण घनघोर प्रदूषण और जनसंख्या के बोझ से खराब होता चला जा रहा है। अगर हमने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो परिणाम बहुत ही खौफनाक हो सकते हैं। अंधा-धुंध पेड़ों की कटाई, पानी में फैक्ट्रियों का कैमिकल मिलना पेड़ों जीव-जन्तुओं की जान भी खतरे में डाल रहा है। किताब में लोगों को गंदगी कम फैलाने और  जीव-जतुंओं और पेड़ की रक्षा करने के बारे में सचेत किया गया है। जरा आप भी देखे तस्वीरें।










रबड़ के जैसे घूमता है इस शख्स का शरीर, कहते हैं उसे 'RUBBER BOY'

आपने बहुत सारे अजीबोगरीब और अनोखे लोगों को देखा होगा। किसी ने नाखून बड़ा कर रिकार्ड बनाया है तो किसी ने अपना मोटापा बढ़ा के। लेकिन इस लड़के की बात तो जरा हट के ही है।
पंजाब के रहने वाले जसप्रीत सिंह कालरा के बदन के लचीलेपन को देख लेंगे तो  सोचेंगे कि क्या ये लड़का बिना हड्डियों का है? आप देखिए किस फूर्ति से वो अपने बदन को कहीं भी कितना भी घुमा लेता है। 15 साल का जसप्रीत रबर ब्वॉय नाम से पॉपुलर है। वह अपने बदन के हर एक हिस्से को जितना चाहें जहां चाहें घुमा लेता है। जसप्रीत का कहना है कि उसका ऐसा कर पाने की पीछे की वजह योगा है। 
उन्होंने बताया कि वह पिछले 4 साल से योगा कर रहा है। बदन को घुमाने में उसे कभी भी दर्द नहीं हुआ। लोगों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है लेकिन उनके लिए ये हॉबी की तरह है। अब जसप्रीत इस काम को अपना फुल टाइम करियर बनाना चाहते हैं। वो 'इंडियाज गॉट टैलेंट' नाम के शो में भी आ चुके हैं। आप खुद ही देख सकते हैं कि कैसे जसप्रीत बदन को कहीं भी कितना भी घुमाने में जरा सी दिक्कत नहीं महसूस करता।

200 रुपए में करें केदारनाथ यात्रा

केदारनाथ की पैदल यात्रा इस बार बेहद सस्ते में की जा सकेगी। महज 200 रुपए में केदारनाथ की यात्रा कर सकेंगे। 200 रुपए में एक तीर्थयात्री को एक वक्त का नाश्ता, 2 वक्त का खाना तथा टैंट में रात गुजारने की सुविधा भी मिलेगी। इतने सस्ते में केदारनाथ की यात्रा पहले कभी नहीं की जा सकती थी।
अगर आप प्री-फैब्रिकेटिड हट्स में रात गुजारना चाहते हैं, तो फिर आपकी जेब में 300 रुपए होने चाहिएं। यानी 2 से 3 सौ रुपए में आप रहने की बेहतरीन व्यवस्था और खाने के लजीज व्यंजनों का आनंद भी ले सकते हैं। बाबा केदार के दर्शन कर पुण्य के भागीदार बन सकते हैं। इससे पहले इन सुविधाओं के लिए तीर्थ यात्रियों को 1 से 3 हजार रुपए तक चुकाने पड़ते थे, लेकिन इस बार जी.एम.वी.एन. द्वारा सस्ती दरों पर तीर्थ यात्रियों को खाने की व्यवस्था दी जा रही है और अत्याधुनिक टैंटों में रात गुजारने के लिए मामूली किराया वसूला जा रहा है।

बेहोश होने के बाद भी मिटाती रही बेटे की भूख

मां आखिर मां ही होती है, यह उस समय देखने को मिला जब एक बाइक से अपने गांव जा रहे महिला अपने पति,देवर और उनके बच्चे के साथ बिलासपुर के तखतपुर के पास एक भयानक हादसे की शिकार हो गए। जिस से दोनों दम्पति बुरी तरह से घायल हो गए। और उनके बच्चे को भी चोटे लगी।
हादसे के बाद महिला अपने बच्चे के साथ सड़क के दूसरी ओर जा गिरी और बेहोश हो गई लेकिन फिर भी मां अपने बच्चे की भूख मिटाती रही। महिला का नाम दुर्गा है और व अपने पति अजय, देवर अशोक चौहान और अपने एक साल के बच्चे अखिलेश के साथ बाइक से बुरका गांव जा रही थी। तभी रास्ते में पीछ़े से आ रही एक तेज कार ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी और व रास्ते में गिर गए और बुरी तरह से घायल हो गए। और उनका बच्चा अखिलेश अपनी मां के साथ सड़क के एक  किनारे में जा गिरा, और मां बुरी तरह से घायल हो गई लेकिन फिर भी अपने बच्चे की भूख को मिटाती रही। वहा के स्थानिय लोगों ने कार ड्राईवर को पकड़ कर बुरी तरह से पीटाई की, और घायल हुए लोगों को अस्पताल में पहुंचाया। जहा सभी की हालत ठीक बताई जा रही है।

Tuesday, 21 April 2015

गर्लफ्रेंड को खिला-खिलाकर कर दिया मोटा, फिर किया प्रपोज!

रिश्तों में कोई विवाद न हो इसलिए एक ब्वॉयफ्रेंड ने अपनी प्रेमिका का हुलिया ही बदल डाला। ईष्या के चलते प्रेमी ने लड़की को दो साल तक इतना खाने पर मजबूर किया कि वह मोटी हो गई। जानकारी के मुताबिक, येन ताइ नाम के इस शख्स ने यू पान के साथ दक्षिण चाइना के गोंगडांग प्रांत में डेटिंग शुरू की। उस समय लड़की का वजन सिर्फ 44 किलो था।

ब्वॉयफ्रेंड ने इस बात का खास ध्यान रखा कि उसकी प्रेमिका जितना खा सके उतना जरूर खाए। 20 साल की येन को ढेर सारा नाश्ता, लंच और बड़ी मात्रा में डिनर दिया गया। यहां तक कि लड़का आधी रात को उठकर भी अपनी गर्लफ्रेंड को खाने-पीने की चीजें देता था। ताकि दूसरे पुरुषों का उसके प्रति आकर्षण खत्म हो जाए। हालांकि उसने यह बात अपनी गर्लफ्रेंड से छुपाकर रखी थी। इसके दो साल बाद उसके प्रेमी ने उसे शादी के लिए प्रपोज कर दिया।

इस साल इतना भी आम नहीं है ‘आम’

इस बार गर्मी में फलों के राजा आम का स्वाद जेब पर भारी पड़ सकता है। इसके भाव इस बार 50 से 65 प्रतिशत ऊपर हैं। उत्तरी और मध्य भारत में बेमौसम की बरसात और ओलावृष्टि से आम का उत्पादन इस बार प्रभावित हुआ है और बाजार में इसकी आवक कम है। आम के उत्पादन में 50 प्रतिशत तक का नुक्सान हुआ है। 
 
उद्योग मंडल एसोचैम के एक अध्ययन में कहा गया है कि इस साल इतना भी आम नहीं है ‘आम’। बेमौसम बरसात से साधारण किस्म का आम भी 100 रुपए प्रति किलो के भाव पर है। मुम्बई में अच्छा अल्फांसो 500 से 600 रुपए दर्जन चल रहा है। 
 
अध्ययन में कहा गया है कि आम के भाव और फल-सब्जियों की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़े हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा नुक्सान हुआ है। प्रदेश में मलीहाबाद, शाहाबाद, अलोहा, उन्नाव, बुलंदशहर, हरदोई, बाराबंकी और सहारनपुर जैसे दर्जन भर इलाके आम के प्रमुख क्षेत्रों में हैं जहां आम की अनेक प्रजातियों के बाग हैं। इस बार देश में आम का उत्पादन 1.5 करोड़ टन रहने की संभावना है।