Thursday, 16 April 2015

कर्मक्षेत्र है दुनिया-गीता यह जीवन


पल-पल बीतता समय अपने बीतने का अहसास तभी कराता है जब हम इसके साथ चलते हुए पिछड़ जाते है या इसे बांधकर रखने की कोशिश करते है। कभी-कभी ऐसा होता है कि हमारे सपने टूटकर बिखर जाते है। हमे वक्त के हाथों मजबूर होकर समझौता करना पड़ता है। उस समय तो हम कुछ कर नही सकते परन्तु बाद में जब हम उन हालात से बाहर निकल आते है तो नये सिरे से अपनी जिन्दगी के बारे में सोचते है।
देखते ही देखते यूं वक्त गुजर जाता है।
    कोई जग में आता है, कोई जग से जाता है।।
जगत के रंगमंच पर हर व्यक्ति कलाकार।
यहां का अनुभव हमें बहुत कुछ सिखाता है।।
कहते है कि जिन्दगी में सफलता अन्दर से बाहर की ओर सफर तब तय करती है जब हमे जिन्दगी की ए.बी.सी. का मतलब पता हो। ए का मतलब अवेयरनेस, बी का मतलब बिलीव से, सी का मतलब च्वास सें, डी का मतलब डिटैचमैन्ट से और ई का मतलब एन्जायमेन्ट से है। जो लोग इनका मतलब समझ लेते है, वे अपने सपनों को, खूबसूरती को भी बखूबी समझते है। यही वजह है कि आने वाला कल उनका होता है।
जाने किस बाजी में जीता यह जीवन। हम भरते है, दुख से रीता यह जीवन।।
सुख ही उसने पाया जिसने पहचाना। कर्मक्षेत्र है दुनिया गीता यह जीवन।।
हर इंसान की जिन्दगी में सुख और दुख आते है। ऐसा नही हो सकता कि हमारे जीवन में सुख ही सुख आये और दुख का नामो-निशान न हो। सुख की तरह दुख भी जीवन का अनिवार्य अंग है। जरूरी है कि हम जीवन में सुख और दुख को लेकर एक साम्य बनाकर चले। इसी प्रकार मनुष्य की कार्य शैली में काम और आराम दोनो पहलू है। इंसान केवल काम के बदले आराम ही करना चाहे तो यह संभव नहीं क्योकि कर्म ही धर्म है और कार्य करने के बाद जो आराम करता है वह सुख का अनुभव करता है। अतरू जीवन में काम और आराम को लेकर एक साम्य बनाकर चले।

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