Saturday, 11 April 2015

तंगहाली बनी खुशहाली


पांच बहन-भाइयों में सबसे बड़ी कैलाश ने बड़े-बड़े सपने नही देखें। न पिरोए बड़े अरमान। जिंदगी की मशीन पर उन्होने खुद को इस तरह बुना कि आज जम्मू कश्मीर वूमेन क्रेडिट कॉरपोरेशन लिमिटेड की चेयरपर्सन है। माइक्रो लोनिग के माध्यम से अब तक गरीब और पिछड़ी महिलाओं को साढ़े चार करोड़ रुपये से ज्यादा का लोन दे चुकी है।
पैरों पर खड़ा होने की चाहत में आईटीआई से कटिंग-टेलरिंग का डिप्लोमा किया। शादी के बाद अखनूर के गांव खरोट आ गई। इस दौरान पिताजी इतने बीमार हुए कि ३५ वर्ष तक बिस्तर पर ही रहे। कैलाश ने मायके और ससुराल की दूरी को अपनी हिम्मत से पाटा। इस लंबे अंतराल में न केवल अपने परिवार को संभाला, बल्कि चारों भाई-बहनों को पढ़ाया और शादी की। अपने जैसी ओर जरूरतमंद महिलाओं की मदद के लिए उन्होने इंडस्ट्रियल कोआपरेटिव सोसायटी बनाई। यह जज्बा आगे बढ़ा और १४ अप्रैल १९९१ को महिलाओं को संगठित कर वूमेन  डेवलपमेंट कॉरपोरेशन  बनाई। जेएडके महिला सहयोग मंडल बनाने के बाद महिलाओं के बीच जाकर देखा कि उन्हे छोटे लोन के लिए कितनी परेशानियाँ का सामना करना पड़ता है। छोटी-छोटी जरूरतों को देखते हुए वर्ष २००४ में वूमेन क्रेडिट कोआपरेटिव लिमिटेड बनाई। २००६ में इसका रजिस्टे्रेशन हुआ। जिसकी अब तक पूरे जम्मू-कश्मीर में ३७ ब्रांच बन चुकी है। नाबार्ड के प्रोजेक्ट को भी यह संस्था पूरा कर रही है।
‘जिन महिलाओ को आगे बढना है वो सबसे पहले अपने घर को संगठित करें। आगे बढने को अपनी जिद नहीं अपना संस्कार बनाएं। दूसरों की मदद करने को हमेशा तैयार रहें। इससे मन को बहुत सुकून मिलता है।

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