बीकानेर से 180 किमी दूर केडब्ल्यूएस गांव। रात का वक्त। अचानक 62 साल
के मनीराम को अस्थमा का दौरा पड़ा। सांसें उखड़नें लगीं तो परिजनों ने दवा
दी, लेकिन वह बेअसर रही। शहर जाने का भी कोई साधन नहीं, गांव से बीकानेर
जाने के लिए सिर्फ एक बस चलती है, वह भी दिन में। पिता को कष्ट में देखा तो
अचानक बेटे सुभाष को कुछ सूझा, वह घर में रखा साइकिल में हवा भरने का पंप
उठा लाया। पिता के मुंह पर मास्क लगाया। मास्क की नली को पंप से जोड़ा।
दवाई डाली और हवा भरने लगा।
दवा भाप बनकर जैसे ही फेफड़ाें तक पहुंची, पिता की सांसें सध गईं। अगले
दिन डॉक्टर को दिखाया तो वह भी सुभाष का ‘इनोवेशन’ देख हैरान रह गए।
डॉक्टरों का कहना है-भले ही सुभाष का बनाया डिवाइस प्रामाणिक न हो, लेकिन
यह प्रभावी जरूर है। इसी वजह से मनीराम बच पाए। अब अस्पताल में भी डॉक्टरों
की निगरानी में इसी पंप के जरिए मनीराम को दवा दी जा रही है।
डॉक्टर बोले- यह इनोवेटिव है- सस्ता भी, कंपनियों को शोध के लिए लिखेंगे
हम इसे प्रामाणिक डिवाइस तो नहीं मान सकते लेकिन यह प्रभावी है,
इनोवेटिव भी। अभी एक्सपेरिमेंटल तौर अपनी देखरेख में इसका उपयोग करने की
इजाजत दे रहे हैं। कोई दिक्कतें भी होगी तो वे सामने आ जाएगी। अभी तक नतीजे
अच्छे हैं। नेबुलाइजर कंपनियों से संपर्क कर कहेंगे, इस तरह की सस्ती और
सब जगह उपयोग हो सकने वाली डिवाइस बनाएं।
-डा.गुंजन सोनी, एसोसिएट प्रोफेसर एवं कार्यवाहक विभागाध्यक्ष श्वसन रोग विभाग, एसपी मेडिकल कॉलेज, बीकानेर
-डा.गुंजन सोनी, एसोसिएट प्रोफेसर एवं कार्यवाहक विभागाध्यक्ष श्वसन रोग विभाग, एसपी मेडिकल कॉलेज, बीकानेर
बेटे ने कहा- मैंने तो वैसे ही किया जैसा देखा था
सिर्फ 5वीं पास 23 साल के सुभाष ने कहा-मैं तो बस इतना जानता हूं कि
मेरे पिताजी बीमार थे। डाॅक्टर ने कहा था- जब दौरे जैसी हालत हो तो भाप
बनाने वाली मशीन में दवाई डालकर उसे सांस के जरिये फेफड़ों तक पहुंचाना।
पिताजी पहले हॉस्पिटल में भर्ती थे, मैंने वहीं पर मशीन देखी थी। बस, उसी
के बारे में सोचता रहा और पंप से जोड़कर नेबुलाइजर बना दिया।
कंपनियां 1000 रु. में देती हैं, 5वीं पास किसान ने सिर्फ डेढ़ सौ में बना दिया
अमूमन अच्छी क्वालिटी के नेबुलाइजर की कीमत बाजार में एक हजार रुपए तक
होती है। 5वीं पास 23 साल के सुभाष ने सिर्फ डेढ़ सौ रु. में नेबुलाइजर
जैसा डिवाइस तैयार कर दिया। यह दवा को भाप के रूप में फेफड़ों तक पहुंचाता
है। अस्थमा और सांस से जुड़ी दूसरी बीमारियों में काम आता है।

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