फसल बर्बाद होने और कर्ज के बोझ से दबे खरखौदा क्षेत्र के किसान ने
शुक्रवार को मोबाइल टावर से कूदकर खुदकुशी कर ली। करीब सवा चार घंटे तक
किसान टावर पर रहा, मगर मौके पर मौजूद पुलिस और नायब तहसीलदार तमाशबीन बने
रहे।
इस दौरान वह लगातार फसल के नुकसान पर मुआवजे की मांग करता रहा, लेकिन उसकी बात सुनने कोई सक्षम अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। किसान की मौत के बाद भड़के लोगों ने अफसरों और पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। बंधक भी बना लिया।
खरखौदा थाना क्षेत्र के रसूलपुर धनतला निवासी योगेंद्र पुत्र लीलू (38) पुत्र हरीश चंद्र के पास सात बीघा जमीन है। पहले वह शाहदरा स्थित एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। तीन साल पहले जॉब छूट गई। इसके बाद गांव में आकर परिवार पालने के लिए खेती करने लगा।
कभी मौसम तो कभी अन्य कारण से खेती में लगातार घाटा हुआ, तो उसने कर्ज लेना शुरू कर दिया। इस बीच उस पर साहूकारों के पांच लाख कर्ज हो गए। इसकी वजह से मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था। शुक्रवार दोपहर लगभग 11 बजे वह खेत पर पहुंचा तो गेहूं की बर्बाद फसल देखकर व्यथित हो गया।
इसके बाद वह अनमने मन से खेत से चला तो लगभग 11:30 बजे गांव के ही दयाराम की जमीन पर लगे मोबाइल कंपनी के टावर के पास रुक गया। कुछ क्षण खड़े-खड़े सोचता रहा और फिर बाउंड्री फांदकर अंदर घुसा और टावर पर चढ़ने लगा। ऐसा करते देख गांव के ही राजकुमार ने उसे रोका, लेकिन वह नहीं माना।
योगेंद्र के टावर पर चढ़ने की सूचना राजकुमार ने ही पुलिस कंट्रोल रूम और गांव वालों को दी। इस पर लगभग� 40 मिनट बाद खरखौदा थाने से एक दरोगा और तीन सिपाही पहुंचे। ग्रामीणों के साथ योगेंद्र की पत्नी कृष्णा और अन्य परिजन भी पहुंच गए।
ग्रामीण और परिजन उससे नीचे उतरने की गुजारिश करते रहे, लेकिन वह नहीं माना। इस पर योगेंद्र के भतीजा शैंकी के अलावा महावीर सिंह और ओमेंद्र टावर पर चढ़े और उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन उसने नीचे उतरने से साफ मना कर दिया। हां, शैंकी से मंगाकर टावर पर ही पानी जरूर पीया।
सारा घटनाक्रम पुलिस की आंखों के सामने चलता रहा। लगभग एक बजे नायब तहसीलदार (तृतीय) जयेंद्र सिंह पहुंचे, लेकिन वह अपनी कार से नहीं उतरे। फायर स्टेशन ऑफिसर संतोष राय टीम के साथ पहुंचे तो सीढ़ी छोटी पड़ गई। इस पर टावर पर चढ़ने में मजबूरी जता दी। लंबी सीढ़ी मंगाने के लिए दमकल वाहन भी लौटा दिया। वहीं टावर गार्ड सुरक्षा की टीम भी कुछ नहीं कर सकी।
...और 120 फीट ऊंचे टावर से कूद गया
योगेंद्र लगभग 11:30 बजे 120 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ा। इस दौरान वह बार-बार बर्बाद फसल का मुआवजा मांगता रहा। सारा घटनाक्रम पुलिस वालों के अलावा नायब तहसीलदार आदि के सामने होता रहा, लेकिन उसकी बात को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया।
कोई सक्षम अधिकारी भी उसकी बात सुनने नहीं पहुंचा। न ही उसे उतारने के लिए कोई ठोस प्रयास किया गया। इस पर लगभग 3:40 बजे योगेंद्र ने टावर से छलांग लगा दी। नीचे गिरते ही दम तोड़ दिया।
दयाराम की जमीन पर लगे मोबाइल कंपनी के टावर पर योगेंद्र को चढ़ते देख गांव के ही राजकुमार भड़ाना ने उसे रोका। कारण भी पूछा। इस पर योगेंद्र ने जवाब दिया कि सब बर्बाद हो गया है, अब कुछ नहीं बचा, तुम टेंशन मत लो, मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।
अफसरों और पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा
किसान योगेंद्र की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार और पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। एफएसओ (फायर सर्विस ऑफिसर) को बंधक भी बना लिया। जमकर हंगामा हुआ। फिर करीब साढ़े चार बजे एसओ खरखौदा और पांच बजे एसपी क्राइम, एसडीएम रवीश गुप्ता फोर्स के साथ पहुंचे। एडीएम (प्रशासन) एके उपाध्याय भी पहुंचे और ग्रामीणों से वार्ता की।
इस दौरान वह लगातार फसल के नुकसान पर मुआवजे की मांग करता रहा, लेकिन उसकी बात सुनने कोई सक्षम अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। किसान की मौत के बाद भड़के लोगों ने अफसरों और पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। बंधक भी बना लिया।
खरखौदा थाना क्षेत्र के रसूलपुर धनतला निवासी योगेंद्र पुत्र लीलू (38) पुत्र हरीश चंद्र के पास सात बीघा जमीन है। पहले वह शाहदरा स्थित एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। तीन साल पहले जॉब छूट गई। इसके बाद गांव में आकर परिवार पालने के लिए खेती करने लगा।
कभी मौसम तो कभी अन्य कारण से खेती में लगातार घाटा हुआ, तो उसने कर्ज लेना शुरू कर दिया। इस बीच उस पर साहूकारों के पांच लाख कर्ज हो गए। इसकी वजह से मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था। शुक्रवार दोपहर लगभग 11 बजे वह खेत पर पहुंचा तो गेहूं की बर्बाद फसल देखकर व्यथित हो गया।
इसके बाद वह अनमने मन से खेत से चला तो लगभग 11:30 बजे गांव के ही दयाराम की जमीन पर लगे मोबाइल कंपनी के टावर के पास रुक गया। कुछ क्षण खड़े-खड़े सोचता रहा और फिर बाउंड्री फांदकर अंदर घुसा और टावर पर चढ़ने लगा। ऐसा करते देख गांव के ही राजकुमार ने उसे रोका, लेकिन वह नहीं माना।
योगेंद्र के टावर पर चढ़ने की सूचना राजकुमार ने ही पुलिस कंट्रोल रूम और गांव वालों को दी। इस पर लगभग� 40 मिनट बाद खरखौदा थाने से एक दरोगा और तीन सिपाही पहुंचे। ग्रामीणों के साथ योगेंद्र की पत्नी कृष्णा और अन्य परिजन भी पहुंच गए।
ग्रामीण और परिजन उससे नीचे उतरने की गुजारिश करते रहे, लेकिन वह नहीं माना। इस पर योगेंद्र के भतीजा शैंकी के अलावा महावीर सिंह और ओमेंद्र टावर पर चढ़े और उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन उसने नीचे उतरने से साफ मना कर दिया। हां, शैंकी से मंगाकर टावर पर ही पानी जरूर पीया।
सारा घटनाक्रम पुलिस की आंखों के सामने चलता रहा। लगभग एक बजे नायब तहसीलदार (तृतीय) जयेंद्र सिंह पहुंचे, लेकिन वह अपनी कार से नहीं उतरे। फायर स्टेशन ऑफिसर संतोष राय टीम के साथ पहुंचे तो सीढ़ी छोटी पड़ गई। इस पर टावर पर चढ़ने में मजबूरी जता दी। लंबी सीढ़ी मंगाने के लिए दमकल वाहन भी लौटा दिया। वहीं टावर गार्ड सुरक्षा की टीम भी कुछ नहीं कर सकी।
...और 120 फीट ऊंचे टावर से कूद गया
योगेंद्र लगभग 11:30 बजे 120 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ा। इस दौरान वह बार-बार बर्बाद फसल का मुआवजा मांगता रहा। सारा घटनाक्रम पुलिस वालों के अलावा नायब तहसीलदार आदि के सामने होता रहा, लेकिन उसकी बात को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया।
कोई सक्षम अधिकारी भी उसकी बात सुनने नहीं पहुंचा। न ही उसे उतारने के लिए कोई ठोस प्रयास किया गया। इस पर लगभग 3:40 बजे योगेंद्र ने टावर से छलांग लगा दी। नीचे गिरते ही दम तोड़ दिया।
दयाराम की जमीन पर लगे मोबाइल कंपनी के टावर पर योगेंद्र को चढ़ते देख गांव के ही राजकुमार भड़ाना ने उसे रोका। कारण भी पूछा। इस पर योगेंद्र ने जवाब दिया कि सब बर्बाद हो गया है, अब कुछ नहीं बचा, तुम टेंशन मत लो, मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।
अफसरों और पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा
किसान योगेंद्र की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार और पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। एफएसओ (फायर सर्विस ऑफिसर) को बंधक भी बना लिया। जमकर हंगामा हुआ। फिर करीब साढ़े चार बजे एसओ खरखौदा और पांच बजे एसपी क्राइम, एसडीएम रवीश गुप्ता फोर्स के साथ पहुंचे। एडीएम (प्रशासन) एके उपाध्याय भी पहुंचे और ग्रामीणों से वार्ता की।
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