Sunday, 19 April 2015

ओशो सत्संग और मेडिटेशन


कार्यक्रम प्रारम्भ होने के अवसर पर एडवोकेट प्रकाशवीर जी ने ओशो और श्रीकृष्ण जी के सामने दीप-प्रज्वलित किया।
कार्यक्रम के सत्र में कैवल्य उपनिषेद के भाग ५ प्रवचन पूरा श्रवण कराया उस प्रवचन में ओशो कहते है। एकान्त क्या है? कैसे सुखासन में बैठके अपने शरीर ग्रविटेशन मुक्त कर उर्जावान बनायें। बुद्ध के वचन साधक के लिए कैसे महत्वपूर्ण होते है। हदय में करुणा और मैत्री, मुदिता और उपेक्षा कैसे जागे।
स्वामी आत्मो कामरान ने साधको का साधना के गहरे सूत्रों की व्याख्या की और ध्यान की सुगम विधि प्रयोगों द्वारा अनुभव कराया। कुण्डलनी, ओशो की शन्तिपात का ज्ञान कराते हुए नटराज, नादवृहम ध्यान में डूबकी लगवाई।
ओशो प्रेमी और गहरे साधक बिटटू बाबू, सत्यवीर गर्ग, वन्दना, मौनिक मैडम, राकेश कुमार त्यागी, स्वामी रामानन्द इन्सा डा0 राकेश सिंह आदि ने शिविर में सहयोग दिया। यह कार्यक्रम प्रत्येक रविवार १२ से शाम ५ बजे तक चलता है। यहां प्रातरू ६ बजे सक्रिय ध्यान और सायं ३ बजे से ७ बजे तक कार्यक्रम चलते रहते है।
सद्भावना समिति (पंजी.) स्वामी आत्मो कामरान 8057982656, 8273548730

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