Friday, 10 April 2015

बिजली दफ्तर में सामान सप्लाई बाद भी भुगतान न होने तंग ठेकेदार ने आग लगाई

मेरठ। काम कराकर पैसा का भुगतान हो अथवा सामान मंगा कर भुगतान इसके लिए उ0प्र0 पॉवर कारपोरेशन में जिस तरह व्यवस्था चल रही है उसका एक प्रदर्शन बुधवार को हुआ जब अधीक्षण अभियन्ता विद्युत वितरण मण्डल ग्रामीण मेरठ के कार्यालय कक्ष में विभाग को स्टेशनरी सप्लाई करने वाले ठेकेदार विशाल शर्मा को आग लगाने को मजबूर होना पड़ा। आग पर आस-पास के लोगों ने व कार्यालय के कर्मचारियों ने जल्द काबू पा लिया और बड़ी जनधन हानि से बचा लिया। ठेकेदार को एक नीजि अस्पताल में भर्ती उसे पहुंचे साथियों ने कराया। जहां वह अभी विषय परिस्थितियां से नही निकला है। ठेकेदार के पिता व विभाग दोनों और से पुलिस में अभियोग दर्ज कराया गया है। घटना पर कांग्रेस के पूर्व नगर अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा व संयुक्त व्यापार संघ तथा चेम्बर ऑफ कॉर्मस एण्ड इण्ड्रस्टीज के अध्यक्षों ने दख्ुाद बताते हुए कार्यवाही की मांग की है कि ठेकेदार को इस स्थिति तक पहुंचने के जिम्मेदारों के खिलाफ कार्यवाही हो।
सयुंक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अपने पदाधिकारियों के साथ अधीक्षण अभियन्ता कार्यालय भी गये तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मिलकर पीड़ित की रिपोर्ट दर्ज कराई। गुरुवार को उ0प्र0 पावर काट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन ने अपने अध्यक्ष अनिल वर्मा पूर्व अध्यक्ष विष्णु गुप्ता व राजीव मित्तल आदि के साथ अधीक्षण अभियन्ता कार्यालय पर धरना दिया व सांय प्रबन्ध निदेशक से मिलकर कार्यवाही की मांग की। प्रबन्ध निदेशक विजय विश्वास पंत में आश्वासन दिया कि वह जांच कराकर २५ नवम्बर तक कार्यवाही करायेगे। ठेकेदार का आरोप है कि अधीक्षण अभियन्ता स्तर पर कमीशन मांगा जा रहा था जबकि उस स्तर का कमीशन वह खण्ड स्तर पर ही दे चुका था।
काम के बदले मजदूरी में हिलहुजत एक दिन पुनरावर्ती न करा दें
श्रम शिखर से बातचीत में विभाग के ही लोगों ने बताया कि इस विभाग में इस बार सैकड़ों सेवा निवृत कर्मी इस वर्ष दफ्तरों में लगाकर उनसे काम लिया जा रहा है। इन्हे भी भुगतान पर टालमटोल व प्रबन्धन की चाले दिखाई जा रहन्ी है। हजारों लोग परिचालन में ठेकेदारों के माध्यम से लगाये हुए है उन्हे भी भुगतान ६-६ माह में शोर शराबे से मिल रहे है ऐसे में यह काम करने वाले भी कही भूखे भजन न हायें गोपाला माल सप्लाई के बाद भी भुगतान को तरसे ठेकेदार की तरह पुनरावृति को विवश न हो जाये। गत वर्ष भी अप्रैल से जुलाई, अगस्त तक कम्प्यूटर आपरेटर से काम कराकर पैसा अभी तक नही दिया गया जनसूचना का जवाब भी नही।
विभाग में आर्थिक कठिनाई के नाम पर इस तरह के भुगतान नजर अंदाज हो रहे है, सेवानिवृत कहते है कि उनके चिकित्सा के बिल भुगतान का भी दो-दो वर्ष तक में किया जा रहा है, राशिकरण राशि का भुगतान नही पर पेशन से कटौती शुरु। माल सप्लाई कराना हो या अन्य ठेके की व्यवस्था में आर्डर व भुगतान की व्यवस्था नही सुधरी या फिर काम के बदले पगार देने में अपनाई जा रही गैर गम्भीरता अधिक विषम स्थिति पैदा कर सकती है इसमें मुख्यमन्त्री से हस्तक्षेप व इन मदों की व्यवस्था की जांच उच्च समिति से कराने की मांग भी हो रही है।
घटना की जांच ही प्रर्याप्त नही
विद्युत वितरण मण्डल कार्यालय में इस आग लगाकर मरने के प्रयास की जांच पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम मेरठ स्तर द्वारा कराने का एलान प्रर्याप्त नही इसके लिए जिला प्रशासनिक जांच जरुरी है कि घटना के समय मोटर साईकिल के तेल निकालने व तेल छिडने तक कार्यालय नही जबकि विभाग का राजस्व एकत्र उस परिसर में होता है। वहा सुरक्षा गार्ड भी तैनात रहता है। घटना के बाद पीडित को वाहन उपलब्धता न हो गम्भीरता है।
अधिक सख्ती उसमे बात का लहजा पीडितों का षड्यत्र नही
घटना के बाद किसी जांच विभागीय स्तर अथवा पुलिस किसी स्तर का कोई परिणाम तो नही सप्ताह में नही दिखा है पर चर्चा यह जरुर है कि अधीक्षण अभियन्ता जिस सख्त मिजाज व लहजे में कार्य कर रहे थे, उन्होने मण्डल अन्तर्गत व्यवस्था में छेद देखने की प्रवृति से पीडितों के किसी षडंयत्र का परिणाम भी हो सकता है। विभागीय स्तर की जांच समवतरू तक न पहुंचे क्योंकि ऐसा होता नही रहा है और इस घटना को किसी छोटे स्तर के सिर ठीकरा फोड दिया जाये। विभाग में ठेके पर काम कराना हो या माल सप्लाई या खरीद फरोश में पारदर्शिता लाने की सोच को निश्चय ही झटका लगना स्वामाविक है। ऐसी सोच के लोग अवश्य सोचेगें की वह सामान्य प्रक्रिया में बनें रहकर अपनी नौकरी व जान को सुरक्षित रखें।

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