प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की ९ अप्रैल से १६ अप्रैल तक फ्रांस, जर्मनी और कनाड़ा की यात्रा का उद्ेदश्य भारत की अर्थ व्यवस्था को बढावा देना और रोजगार पैदा करना है। उनकी तीन देशो की यात्रा भारत के आर्थिक एजेण्डे को आगे बढाने और देश के युवाओं के लिये रोजगार सृजित करने पर केन्द्रित रहेगी। वे भारत-फ्रांस आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने पर चर्चा करेगे तथा पेरिस के बाहर कुछ अत्याधुनिक औद्योगिक ईकाइयों को देखने जायेगे। तत्पश्चात् जर्मनी में श्चांसलर ऐेंजेला मार्केल और मोदी संयुक्त रूप से हैनोवर उत्सव का उद्घाटन करेगे जिसका भारत एक साझेदार देश है। यात्रा के अन्तिम चरण में प्रधानमन्त्री कनाड़ा के साथ संबधो को सुदृढ बनाने और कनाड़ा में नेताओं, उद्योग जगत के शीर्ष नेताओ और वहां रहने वाले भारतीयो से मुलाकात करेगें।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संवाद-कुशल हैं। संवाद के माध्यम से उन्होने एक गांव बड़ नगर से दिल्ली तक का राजनीतिक सफर तय किया है। अब उनके सामने कुछ कर दिखाने का समय है। उन्हे साबित करना है कि जनता ने अगर उन पर भरोसा किया है तो यह गलत नही है। यह एक सरकार बदलना मात्र नही है। एक राजनीतिक संस्कृति का बदलाव भी है। देश की बेलगाम नौकर शाही पर नियंत्रण आवश्यक है। बदलाव के लिये लोग बेचैन है। बहुत उम्मीदो से वे मोदी को एक असंभव सी दिखने वाली जीत दिला चुके है किन्तु अब कथनी को करनी में बदलने का वक्त है। इतिहास उनसे, भाजपा, आर.एस.एस. सबसे हिसाब मांगेगा। अतरू बेहतर समन्वय के लिए निगहबानी और प्रयासो की अहम जरुरत है।
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