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Tuesday, 21 April 2015

10 साल पहले आपका मनपसंद फोन कौन सा था

आज हर रोज कोई न कोई बेहतरीन स्मार्टफोन देखने को मिल रहा है। परंतु यदि आप किसी से ये पूछें कि 10 साल पहले आपका मनपसंद फोन कौन सा था तो शायद इसका जवाब उसके पास न हो क्योंकि तब ऐसे बहुत से फोन थे जो आज भी लोगों की पसंद होंगे और जुबान पर होंगे। ऐसे ही कुछ बेहद लोकप्रिय फोन है जो तब बड़े पसंद किए जाते थे :-

1. Nokia 1100
ये अभी तक नोकिया के सबसे कामयाब फोंस में एक हैं जिसकी करीब 150 मिलियन यूनिट बिंकी है।

2. Nokia N73
ये फोन अपनी बेहतरीन आवाज के कारण बड़ा फेमस रहा है। इसमें ड्यूल स्पीकर दिए गए थे। ये फोन नोकिया की एन सीरीज का हिस्सा था।  

3. Sony Ericsson K750
तब के सबसे बेहतरीन फोंस की गिनती में सोनी एरिक्‍सन का ये फोन आता था। इसमें इसमें 2 मेगापिक्‍सल का कैमरा लगा हुआ था, जो तब के बड़े बड़े स्मार्टफोंस 

4. Motorola Razr V3
रेजर वी3 एक ऐसा फोन था जो प्रोफेशनलों की पहली पसंद था। इन्‍हीं में से एक हैं मोटो रेजर जो 2004 में लांच किया गया है। यह फोन अपने स्मार्ट और स्‍लीक डिजाइन के कारण हाथ की शौभा बड़ाता था।

5. BlackBerry 7100
2005 ब्‍लैकबेरी में ने 7100 में एडवांस बीबी ओएस दिया था। जिससे ईमेल की सुविधा थी और आज बिजनेस क्लास लोगों की पहली पसंद ब्लैकबेरी ही है।

6. Nokia 6600
इसके अलावा नोकिया के 6600 का तो क्या कहना। नोकिया के कई लोकप्रिय स्मार्टफोंस में एक नाम 6600 का भी है और इसके लोकप्रिय होने का एक कारण इस फोन का कैमरा भी रहा।

7. Sony Ericsson P900
इसके अलावा सोनी का P900 भी काफी लोगों द्वारा पसंद किया जाता था। सोनी का ये स्मार्टफोन टच स्क्रीन के साथ आता ता और इस्तेमाल के लिए साथ में पेन भी होता था जैसा कि सैमसंग की नोट सीरीज में होता है।

Thursday, 16 April 2015

टैवल करने का शौक, तो देखें दुनिया की Best 10 जगहें


योसेमिट नेशनल पार्क, कैलिफोर्निया
लाइफस्टाइल डेस्क ट्रैवल का मतलब होता है कुछ नया देखना, कुछ नया एक्सीपिरिएंस करना। दुनिया देखना, घूमना और नई-नई चीजें डिस्कवर करना। अपने कल्चर से अलग कुछ नया सीखना और दूसरों के कल्चर से कुछ नया सीखना। यह सब बातें सिर्फ वही समझ सकता है, जो ट्रैवल को बहुत पसंद करता हो। जिसके लिए ट्रैवल करना ही दुनिया की बेस्ट चीज हो। अगर आपको भी है ट्रैवल करने का शौक, तो हम आपके लिए लेकर आएं है वो 10 बेहतरीन जगहें, जिन्हें आपको एक बार तो जरूर देखनी चाहिए।
1. योसेमिट नेशनल पार्क, कैलिफोर्निया
यह पार्क यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल है। यहां मौजूद पहाड़, वाटरफॉल और वाइल्डलाइफ दुनिया में और कहीं नहीं है। यहां के खूबसूरत सीन स्विट्जरलैंड से कम नहीं है। 1,200 स्क्वैयर मील में फैला हुआ पार्क वाइल्डलाइफ से भरा हुआ है। 1890 में बने इस पार्क को अभी तक करोड़ों लोग देख चुके हैं। इसीलिए अगर आप भी कैलिफोर्निया जाएं, तो इस पार्क को जरूर देखें।

2. क्योटो, जापान
अगर जापान जाएं, तो इस शहर को देखना न भूलें। यह जापान के खूबसूरत शहरों में से एक है, यहां का फूड, स्ट्रीट्स, टेंपल, हेरिटेज साइट्स, विला, आदि सब कुछ मौजूद है। यहां का सबसे खास अट्रैक्शन मंदिर हैं। ज्यादातर मंदिर गोल्डन रंग में हैं। जापान की पॉलिटिक्स और कल्चर का यह सबसे खास शहर है।

3. मस्कट, ओमन
नीले पानी से भरे समुद्र और ऊचें-ऊंचे पहाड़ों से भरा यह शहर बहुत शानदार है। यहां मॉर्डन आर्किटेक्चर के साथ ही कई प्राचीन हेरिटेज कल्चर भी मिलता है। यहां मौजूद घरों, छोटी-छोटी दुकानों, बाजारों, गलियों और बिल्डिंग्स में ओमन का कल्चर मिलता है। यहां कई मस्जिद भी मौजूद हैं, जिन्हें देखने का अपना अलग ही अहसास है। 

4. बाली, इंडोनेशिया
अगर आप नीले समंदर और प्राचीन मंदिरों वाली जगह की सैर करना चाहते हैं, तो आप इंडोनेशिया में बाली द्वीप की यात्रा जरूर करें। बाली की खूबसूरती आंखों और मन को सुकून देती है। इस इंडोनेशियाई प्रांत की 84 प्रतिशत आबादी हिंदुओं की है। यहां का मौसम जुलाई-अगस्त महीने में बहुत अच्छा होता है। इसके साथ ही यहां इंडोनेशिया से जुड़ी कला, संस्कृति सब कुछ मिल जाएगा। 

5. बार्सिलोना, स्पेन
स्पेन के इस शहर में कई खूबसूरत आर्किटेक्चर मिल जाएंगे। यहां का स्पैनिश खाना जैसे स्वीट्स, सी-फूड भी काफी फेमस है। यहां मौजूद घर, होटल्स और इतिहास से जुड़ी इमारतों का आर्किटेक्चर देखने में बहुत खूबसूरत लगता है। यहां पर मौजूद आर्किटेक्चर दुनिया में और कहीं नहीं है। यहां के चर्च भी काफी फेमस हैं। 

6. इस्तांबुल, तुर्की
यहां के कई मस्जिद, बाजार और टर्किश बाथ आपको बहुत पसंद आएंगे। यहां हजारों फीट की ऊंचाई पर बना एक खास ब्रिज भी है जिसका नाम है फैथ सुल्तान मेहमेट ब्रिज। यह अपनी ऊंचाई और खास बनावट के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। एक समय पर यह दुनिया का छठवें नंबर का सबसे लंबा ब्रिज था। इतना ही नहीं इस्तांबुल तुर्की का सबसे बड़ा शहर है। यहां पूरी तुर्की का कल्चर दिखता है। 

7. क्वीनस्टोन, न्यूजीलैंड
ऑस्ट्रेलिया आने वालों के लिए न्यूजीलैंड हॉलिडे डेस्टिनेशन होता है। यहां पर होने वाली माउंटेन बाइकिंग, जेट बोट राइड टूरिस्ट को बहुत अट्रैक्ट करती है। न्यूजीलैंड का यह शहर पहाड़ों के घिरा हुआ है। यहां क्रिस्टल जैसे चमकते पानी की लेक, नेचर, एडवेंचर टूरिस्ट्स को अट्रैक्ट करता है।

8. राजस्थान, भारत
यह भारत का हेरिटेज और कल्चर से भरा शहर है। यहां पूरे भारत की संस्कृति और सभ्यता दिख जाती है। यहां एक से बढ़कर एक राजा-महाराजाओं के महल दिखता है। यहां का पहनावा, बाजार पूरे भारत में मशहूर है। ट्रैवल को एन्जॉय करने वालों के लिए यह शहर जन्नत है। यहां दुनियां की भूतियां जगहों में शामिल भानगढ़ किला भी मौजूद है। 

9. रियो डी जेनेरियो, ब्राजील
ब्राजील की यह राजधानी बहुत खूबसूरत है। यहां करीब 14 मिलियन लोग रहते हैं। इस शहर की खास बात कोरकोवाडो पर्वत पर स्थित ईसा मसीह की विशाल मूर्ति है। यह मूर्ति दुनिया के सात अजूबो में शामिल है। इस शहर में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा फ्लोरेस्ता दा तिजुका या श्तिजुका वन्य नाम का शहरी जंगल है। इतना ही नहीं यह शहर फुटबॉल लवर्स के लिए भी जाना जाता है। यहां सांबोद्रोमो नाम का दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल स्टेडियम है।  

10. रोम, इटली
अगर आप इतिहास में दिलचस्पी रखते हैं तो एक बार इटली के रोम शहर में जरूर जाएं। इस शहर में ईसाई धर्म से जुड़ा पूरा इतिहास दिखता है। इतना ही नहीं इस शहर के बार में महाभारत में भी जिक्र किया गया है। इसके अलावा यहां 300 गिरिजाघर और कई पुस्तकालय आदि हैं। साथ ही, यहां कई शानदार पैलेस, होटल्स आदि भी मौजूद हैं।


Wednesday, 15 April 2015

मॉरीशसः समुद्र का निराला संसार


दुनिया के बीच डेस्टिनेशन में जिन जगहों को मुख्य रूप से गिना जाता है उनमें मॉरीशस टॉप पर है। हिंद महासागर के नीले गहरे पानी में स्थित मॉरीशस अनूठा है। रंग, संस्कृति और स्वाद में जो विविधता यहां हैए वह यहां गुजारे पलों को यादगार बना देती है। इसकी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि लगभग पूरे साल यहां का मौसम लगभग एक सरीखा रहता है।
ना बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है और न ज्यादा ठंड। दिसंबर से मार्च के महीने सबसे ज्यादा बारिश वाले होते हैंए इसलिए उनको छोड़कर बाकी पूरे साल यहां कभी भी जाया जा सकता है। मॉरीशस के सफेद रेतीले तट कोरल रीफ बैरियर से सुरक्षित हैं। यहां का लगभग समूचा तट कोरल रीफ से घिरा है, सिवाय दक्षिणी सिरे के कुछ अपवाद को छोड़कर। इसीलिए बाकी तटों पर समुद्र जहां शांत होता है, वहीं दक्षिणी हिस्से में वह बहुत अशांत है। वहां चत्रनी तट पर समुद्र की पछाड़ें देखकर आप मुग्ध हो सकते हैं।
मॉरीशस के मुख्य द्वीप के चारों ओर कई छोटे-छोटे निर्जन द्वीप भी हैं। हम भारतीयों के लिए मॉरीशस उन जगहों में से हैए जहां से हमारा भावनात्मक लगाव है। हमारी संस्कृति साझी है और लोग भी। राजधानी पोर्ट लुई पश्चिमी तट पर स्थित है। उत्तर का इलाका मैदानी है और यहां देश के कई सबसे खूबसूरत बीच हैं। समुद्र तटों की रंगीनियत भी सबसे ज्यादा इसी इलाके में है। वहीं पूर्वी मॉरीशस के समुद्र तट सुकून से कुछ पल बिताने के लिए हैं। यहां के समुद्र तट की खूबसूरती खोह और लैगून में हैं। यहां ब्लू बे और बेले मेरे सबसे लोकप्रिय समुद्री इलाकों में से हैं।
उधर पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी तट रोमांच प्रेमियों के लिए स्वर्ग हैं। यहां आप सर्फिग, स्नोर्कलिंग, डीप शी फिशिंग, जैसे ज्यादातर समुद्री खेल का आनंद आप ले सकते हैं। यहां टेमेरिन बे के आसपास आप डॉल्फिन भी देख सकते हैं। दक्षिणी इलाके का रंगरूप बाकी देश से पूरी तरह अलग है। ग्रिस-ग्रिस ही मॉरीशस के समुद्री तट का अकेला ऐसा इलाका है जहां कोरल रीफ नहीं हैं। वहां किनारे ऊंची पहाडियां और गहरी खाइयां देखने को मिल जाएंगी। मॉरीशस का भीतरी इलाका संस्कृति के विभिन्न रंगों से रंगा है। यहां की शिवरात्रि आपको भारत की शिवरात्रि जैसी ही लगेगी।
कैसे जाएं रू मॉरीशस के लिए दिल्ली व मुंबई आदि शहरों से कई एयरलाइंस की उड़ानें हैं। दिल्ली से मॉरीशस की सीधी उड़ान लगभग साढ़े सात घंटे का समय लेती है। कई उड़ानें दुबई के रास्ते भी हैं। मॉरीशस का वापसी किराया दिल्ली से 26 हजार रुपये से शुरू हो जाता है। मॉरीशस जाना बेशक महंगा है लेकिन वहां रुकने के लिए लग्जरी रिजॉर्ट के अलावा बजट होटल भी बड़ी आसानी से मिल जाएंगे।

Saturday, 11 April 2015

तंगहाली बनी खुशहाली


पांच बहन-भाइयों में सबसे बड़ी कैलाश ने बड़े-बड़े सपने नही देखें। न पिरोए बड़े अरमान। जिंदगी की मशीन पर उन्होने खुद को इस तरह बुना कि आज जम्मू कश्मीर वूमेन क्रेडिट कॉरपोरेशन लिमिटेड की चेयरपर्सन है। माइक्रो लोनिग के माध्यम से अब तक गरीब और पिछड़ी महिलाओं को साढ़े चार करोड़ रुपये से ज्यादा का लोन दे चुकी है।
पैरों पर खड़ा होने की चाहत में आईटीआई से कटिंग-टेलरिंग का डिप्लोमा किया। शादी के बाद अखनूर के गांव खरोट आ गई। इस दौरान पिताजी इतने बीमार हुए कि ३५ वर्ष तक बिस्तर पर ही रहे। कैलाश ने मायके और ससुराल की दूरी को अपनी हिम्मत से पाटा। इस लंबे अंतराल में न केवल अपने परिवार को संभाला, बल्कि चारों भाई-बहनों को पढ़ाया और शादी की। अपने जैसी ओर जरूरतमंद महिलाओं की मदद के लिए उन्होने इंडस्ट्रियल कोआपरेटिव सोसायटी बनाई। यह जज्बा आगे बढ़ा और १४ अप्रैल १९९१ को महिलाओं को संगठित कर वूमेन  डेवलपमेंट कॉरपोरेशन  बनाई। जेएडके महिला सहयोग मंडल बनाने के बाद महिलाओं के बीच जाकर देखा कि उन्हे छोटे लोन के लिए कितनी परेशानियाँ का सामना करना पड़ता है। छोटी-छोटी जरूरतों को देखते हुए वर्ष २००४ में वूमेन क्रेडिट कोआपरेटिव लिमिटेड बनाई। २००६ में इसका रजिस्टे्रेशन हुआ। जिसकी अब तक पूरे जम्मू-कश्मीर में ३७ ब्रांच बन चुकी है। नाबार्ड के प्रोजेक्ट को भी यह संस्था पूरा कर रही है।
‘जिन महिलाओ को आगे बढना है वो सबसे पहले अपने घर को संगठित करें। आगे बढने को अपनी जिद नहीं अपना संस्कार बनाएं। दूसरों की मदद करने को हमेशा तैयार रहें। इससे मन को बहुत सुकून मिलता है।

Tuesday, 31 March 2015

25 साल से कोमा में पड़े शख़्स की 'प्रेम कहानी'

"लव जिहाद" के माहौल में एक अनोखी प्रेम कहानी है जो आपको जीवन और मृत्यु दोनों के बारे में सोचने पर मजबूर कर देगी। मैं इच्छा-मृत्यु पर स्टोरी करने के लिए घर से निकला था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में मेरी मुलाक़ात आइवी सिंह और उनकी मुंहबोली बेटी भूमिका से हुई। आइवी अपने ही घर में एक छोटा सा स्कूल चलाती हैं। बच्चों की चहल-पहल की आवाज़ दोपहर तक तो घर में गूंजती रहती है फिर एक चुप्पी सी छा जाती है। इस घर में एक ऐसा शख़्स भी रहता है जिनकी असाधारण कहानी, इच्छा-मृत्यु पर पहले से ही जटिल बहस को और उलझा देती है। पढ़िए आनंद सिंह की पूरी कहानी इस बेहद ख़ूबसूरत शख़्स का नाम आनंद सिंह है। जवानी की तस्वीरें देखें तो किसी फ़िल्म स्टार से कम नहीं। लेकिन ये पच्चीस साल पहले की बात है। वे भारतीय नौसेना में कार्यरत थे, आइवी से शादी के कुछ महीने बाद छुट्टियों के लिए घर लौट रहे थे कि उनकी मोटरसाइकिल दुर्घटना का शिकार हो गई। मस्तिष्क में चोट लगी और उनका जीवन हमेशा के लिए बदल गया। अब वह न बोल सकते हैं, न खा सकते हैं, न चलफिर सकते हैं और डॉक्टरों के अनुसार उनके फिर से सक्रिय होने की संभावना नहीं है। पच्चीस साल से वह बिस्तर पर पड़े हैं, नाक में ट्यूब डली हुई है, खाने के लिए वो टयूब का और खिलाने के लिए आइवी का सहारा लेते हैं। आइवी सिंह की कहानी इन पच्चीस वर्षों में उनकी हर ज़रूरत आइवी सिंह ने पूरी की है। उनकी उम्र लगभग 48 साल है।शादी के समय उन्होंने जवानी में क़दम रखा ही था कि इस हादसे ने उनका जीवन भी हमेशा के लिए बदल दिया। वे बताती हैं, "हम केवल छह-सात महीने ही साथ रहे। वह भी लगातार नहीं, क्योंकि आनंद की नौकरी ही ऐसी थी और फिर यह दुर्घटना हो गई। तब से मेरा जीवन आनंद की देखभाल में ही गुज़रा है।" जिस कमरे में आनंद दिन-रात लेटे रहते हैं, वह किसी अस्पताल के कमरे से कम नहीं है। एक अलमारी दवाइयों से भरी हुई है और उसमें ज़रूरत का सारा सामान मौजूद है, इंजेक्शन की सिरिंज से लेकर 'नेबोलाइज़र' ट्यूब तक। आइवी खुद एक प्रशिक्षित नर्स से कम नहीं हैं। मैं झिझकते हुए वो दो सवाल पूछ ही लेता हूँ जो मेरे दिल में तो हैं लेकिन ज़ुबान पर आसानी से नहीं आते कि क्या आपने आनंद को छोड़कर कभी दूसरी शादी के बारे में नहीं सोचा? और आपने अपना जीवन तो आनंद को जीवित रखने में गुज़ार दिया लेकिन वो क्या हालात होंगे जिनमें आप भी 'मर्सी किलिंग' या इच्छा मृत्यु का समर्थन कर सकती हैं? आईवी बताती हैं, "यदि कोई व्यक्ति कोमा में हो, पूरी तरह बेहोश और परिवार के पास इतना पैसा नहीं हो कि देखभाल कर सके तो यह किया जा सकता है क्योंकि उसे तो कुछ पता ही नहीं ।।।" और "हाँ मैंने शादी के बारे में सोचा था, लेकिन मेरी एक शर्त थी कि मेरे जीवन में जो भी दूसरा व्यक्ति आए उसे आनंद को भी स्वीकार करना होगा!" आइवी सिंह के जीवन में कोई दूसरा व्यक्ति तो नहीं आया। वे कहती हैं, "बीमार कोई जानबूझकर तो होता नहीं, शायद यही मेरी तक़दीर थी, मेरे माता-पिता ने हमेशा ही सिखाया था कि जिससे शादी हो रही है उसके दुख और परेशानी में शामिल रहना।" लेकिन दस साल पहले उन्होंने एक बच्ची को गोद लेने का फ़ैसला किया। भूमिका की कहानी आइवी सिंह बताती हैं, ''भूमिका एक यतीमख़ाने में पल रही थी। मुझे बेटी चाहिए थी, मैं उसे घर ले आई।'' अब भूमिका की उम्र दस-ग्यारह साल है। स्कूल से लौटते ही वह आनंद सिंह के साथ खेल में लग जाती है। "मुंह खोलो, मुंह बंद ।।। बोलो ए, बी, सी ।।। सब चीज़ें एक ही तरह बोलोगे।।।!" मुझे भी आनंद की बेजान आँखों में थोड़ी चमक नज़र आती है। वो गले से कुछ आवाज़ तो निकालने की कोशिश करते हैं लेकिन शायद इसका मतलब आइवी और भूमिका ही समझ सकते हैं।भूमिका भी अब पूरी फुर्ती के साथ वह सारे काम करती है जो पच्चीस वर्षों से आइवी करती आई हैं। इस बच्ची ने अपने जीवन का रास्ता भी तय कर रखा है, बड़े होकर वह डॉक्टर बनना चाहती है। मुश्किल सा सवाल आइवी और नन्ही भूमिका ने आनंद को ज़िन्दा रखा है। "उन्हें कुछ दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा तो घर बिल्कुल सूना हो गया।" लेकिन मेरे मन में यह सवाल उठता है कि जो प्यार और देखभाल आनंद को मिली है, वो दूसरे कितने लोगों को मिल पाती होगी? कितने लोग आईवी की तरह अपना जीवन क़ुर्बान करने का जज़्बा रखते होंगे और यदि मरीज़ के ठीक होने की कोई संभावना न हो तो क्या उन्हें ये क़ुर्बानी देनी भी चाहिए? यही चर्चा आजकल हिंदुस्तान में चल रही है। क्या जीवन के अधिकार में मृत्यु का अधिकार भी शामिल है? किन परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को अपना जीवन ख़त्म करने का अधिकार होना चाहिए? जीवन का मालिक कौन है और यह मुश्किल फ़ैसला करने के लिए अधिकृत व्यक्ति कौन है? यह ज़िंदगी और मौत का सवाल है। ज़िंदगी कब जीने लायक़ नहीं रहती, इस जटिल सवाल का कोई आसान जवाब नहीं है।