अमलतास के फूल झर गये धीरे से
कल तक जिसने प्यार किया
जब रूठे तो मनुहार किया
आज वही अलि वादा अपना भूल गये
प्यार का प्रतिदान ऐसा भी है क्या
प्यास से जलते अधर दो मिल गये
माधुरी पीकर कहीं को उड़ चले
शेष केवल रह गयी बेबस सी चाह
काँपती जाती डगर है दूर तक
कल थे जो अपने वह न हैं यहाँ
साथ देने से भी उसको क्या मिला
हैं कहाँ वह और मंजिल है कहाँ
ठहर कर के दो पलों को सो लिया
बैठ कर छाया में आँखें मूंदकर
स्वप्न में डूबा पथिक फिर चल पड़ा
अब किसी अनजान मंजिल के लिये
जिन पर था विश्वास उन्होंने कुचल दिया
रुँधे गले से दूब कह रही धीरे से
मीत खो गये गीत सो गये
अमलतास के फूल झर गये धीरे से
कल तक जिसने प्यार किया
जब रूठे तो मनुहार किया
आज वही अलि वादा अपना भूल गये
प्यार का प्रतिदान ऐसा भी है क्या
प्यास से जलते अधर दो मिल गये
माधुरी पीकर कहीं को उड़ चले
शेष केवल रह गयी बेबस सी चाह
काँपती जाती डगर है दूर तक
कल थे जो अपने वह न हैं यहाँ
साथ देने से भी उसको क्या मिला
हैं कहाँ वह और मंजिल है कहाँ
ठहर कर के दो पलों को सो लिया
बैठ कर छाया में आँखें मूंदकर
स्वप्न में डूबा पथिक फिर चल पड़ा
अब किसी अनजान मंजिल के लिये
जिन पर था विश्वास उन्होंने कुचल दिया
रुँधे गले से दूब कह रही धीरे से
मीत खो गये गीत सो गये
अमलतास के फूल झर गये धीरे से
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