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Monday, 11 May 2015

साईकिल ट्रैक उद्देश्यपूरक

उ0प्र0 के मुख्यमन्त्री की महत्वाकांक्षी श्साईकिल ट्रैक्य योजना प्रदेश के बड़े महानगरों में सकारात्मक हो चली है। पश्चिमी उ0प्र0 में मेरठ के बाद गाजियाबाद में भी इस के स्थान नियत होने के अलावा टेण्डर प्रक्रिया आदि के साथ बजट आवटन प्रक्रिया भी हो गई है। इस योजना को गरीब की सवारी व स्वास्थ्य की दृष्टिड्ढगत उच्चतम न्यायालय के सख्त रुख के बाद ट्रैक की व्यवस्था को राज्य सरकारों को अपनाना पड़ा। सड़क बनाकर गतिवान वाहनों की बढ़ती भीड़ ने साईकिल व पैदल चालकों के लिए समस्या बना डाली थी।
मेरठ मे सीताराम हॉस्टल मेरठ से मंगल पाण्डे नगर तक नियत किया गया है। साईकिल ट्रैक वहां गाजियाबाद में इसका स्थान हापुड़ चुंगी से विवेकानंद नगर तक प्रथम चरण शुरु हो चुका है। दूसरे चरण का नया गाजियाबाद आर ओबी से गोविन्दपुरम का भी निर्मित हो चुका है। पूरे प्रोजेक्ट पर ९ करोड़ प्राधिकरण खर्च कर रहा है। तीसरे ट्रैक पर विचार हो रहा है। यह एएलटी पलाई ओवर ब्रिज से हापुड़ चुंगी तक का है।
साईकिल ट्रैक पर आम जन यानि की दुपहिया साईकिल चालकों से जब बात की तो वह इस ट्रैक व्यवस्था से खुश नही थे। इनका कहना था कि हमे ट्रैक की उपलब्धता तो तब भी नही होगी। इन ट्रैकों पर अपेक्षा अनुरुप साईकिलिंग किया जाना संभव होगा इसमें संशय है। सड़कों के किनारे व अन्य पगडंडियों पर जिस तरह चलना दुष्कर है बड़े वाहनों के खड़े रहने या चलने के प्रयास अथवा इन पर अतिक्रमण कर कारोबार होते है उसे देखकर नही लगता की यह ट्रैक जिस लक्ष्य को लेकर बन रहे है। उनसे जनता को सुविधा मिलेगी। यह जरुर है कि प्रदेश की सरकार जिसका चुनाव चिन्ह ही साईकिल है अथवा लाभ की अपेक्षा करती हो।
साईकिल निर्माता जिन्होने अब साईकिल बनाना बंद कर दिया था या बंद करने में लगे थी वापस चेहरे पर मुस्कान ला बैठे। साईकिल मरम्मत के लगे लोग भी पुनरू इस कार्य में रुचि लेने लगे है। 
साईकिल ट्रैक प्रतीकात्मक न बने रहे
वरिष्ठ नागरिक कल्यान समिति अध्यक्ष ईआरएस गुप्ता का कहना था कि जिस शो शराबे के तहद बड़े शहरों में इक्का दुक्का साईकिल ट्रैक बन रहे है या बनाने का प्रस्ताव है इससे लोगो का स्वास्थ्य नही सुधरने वाला है। इस तरह यह प्रतीकात्मक रह जायेगे। जरुरत है सड़कों के किनारे दो और जो पटरी छोडी जाती है उसे साईकिल ट्रैक संरक्षित कर उस पर अतिक्रमण रोक कर इसके दुरुपयोग का रोका जाएं। 
साईकिल ट्रैंक तो हो गया पदैल चलने की राह भी तो
साईकिल ट्रैक पर उ0प्र0 सरकार द्वारा जिस तरह की कर्मठता का प्रदर्शन दिखाया जा रहा है। इसके बाद पैदल चलने वालों जिनमें वरिष्ठ नागरिक व महिला और बच्चों ने जिज्ञासा जाहिर की है की पैदल सड़क किनारे चलना या फिर साईकिल ट्रैक की तरह स्वास्थय बनाने हेतु घुमने की राह के लिए भी इस तरह प्रदेश सरकार सोचेगी और उपलब्ध करायेगी। आज सड़कों व अन्य रास्तों पर पदैल चलने वालों के साथ भी साईकिल चालकों से कम दुघर्टना नही होती है।
       -अतिथि सम्पादक निष्ठा अग्रवाल

Monday, 4 May 2015

रेल सफर में तत्काल मदद को हैल्पलाइन

राजकीय रेलवे पुलिस ने ३ मार्च को निम्नलिखित हैल्पलाइन सेवा का शुभारंभ किया है, जिसके जरिये उत्तर प्रदेश राज्य की सीमा के अंदर रेल सफर में यात्री चोरी, लूट, डकैती, मारपीट, छेड़खानी, हत्या, जहरखुरानी जैसे मुश्किल हालात में डायल कर शिकायत दर्ज करा कर मदद ले सकते हैंरू-  हैल्पलाइनरू १५१२

‘आप’ के ट्रैक पर देर से दौड़ेगी की बजट की गाड़ी

आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली का बजट पेश करने में किसी तरह की हड़बड़ी के मूड में नहीं है। दिल्ली डॉयलॉग कमीशन की टास्क फोर्स गठित होने और उसकी सिफारिश आने का इंतजार किया जाएगा।
जिन 10 विधान सभा में जनता के सुझाव से बजट का प्रावधान किया जाना हैए वह प्रक्रिया भी इस दौरान पूरी की जाएगी। हालांकि लेखानुदान से सरकार खर्चों में कटौती की शुरुआत कर सकती है। दिल्ली सरकार का बजट 37 हजार करोड़ रुपये का है। वित्त वर्ष में लोकसभा और विस का चुनाव आने से बेशक प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पाए, खर्चे कम हुए लेकिन वसूली में 4300 करोड़ रुपये की कमी हुई। अधिकारी बता रहे हैं कि लेखानुदान में कटौती बहुत जरूरी है। लेखानुदान इसलिए लेना है ताकि कर्मियों के वेतन व अन्य खर्चों की व्यवस्था की जा सके। सूत्र बताते हैं कि लेखानुदान तीन महीने का लिया जाएगा। इसके लिए विस का सत्र मार्च के अंतिम सप्ताह में दो दिन का होगा। इसकी तैयारी योजना व वित्त विभाग के अधिकारियों ने शुरू भी कर दी है।
सरकार का पूर्ण बजट मई में आएगा। तब तक दिल्ली डॉयलॉग कमीशन में दिए गए मोबाइल पर सरकार, वाई-फाई और सीसीटीवी वाली दिल्ली, अनधिकृत कॉलोनी नियमन, झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास, जॉब और जॉब सिक्योरिटी जैसे विषयों को दिल्ली के पूर्ण बजट में शामिल किए जाने की तैयारी है।

बेंगलुरु दुनिया में सबसे सस्ता शहर


इकोनोमिक इंटेलीजेंस यूनिट द्वारा तैयार श्वल्र्डवाइट कॉस्ट ऑफ लिविंग रिपोर्ट, २०१५्य के अनुसार, न्यूयार्क को आधार मानकर, १३३ शहरों को शामिल कर, १६० सेवाओंध्उत्पादों की कीमतों को ध्यान में रखकर, यह घोषणा की गई है कि भारत की सूचना प्रौद्योगिकी का केंद्र बेंगलुरु और पाकिस्तान की वित्तीय राजधानी कराची को संयुक्त रूप से १३३ वें स्थान पर रखकर दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में शुमार किया गया है। यहां गुजर-बसर करना काफी सस्ता है। इसके बाद मुंबई को १३० वां, चैन्नई को१२९ वां और नई दिल्ली को १२८ वां स्थान दिया गया है। दुनिया के सबसे महंगे शहरों में सिंगापुर दूसरे वर्ष भी शीर्ष पर है। उसके बाद, पेरिस, ओस्लो, ज्यूरिख और सिडनी का नंबर आता है।

Tuesday, 28 April 2015

केदारनाथ: जहां मौत भी देती है उपहार

हिंदू धर्म में बहुत से तीर्थ स्थल हैं जिनकी यात्रा का अपना-अपना महत्व है लेकिन जब तक चार धाम यात्रा न कर लें तब तक यात्रा अपूर्ण ही रहती है। यह चार धाम है:- बद्रीनाथ, द्वारिकाधीश, जगन्नाथ और रामेश्वरम। मान्यता है की श्री हरि विष्णु बद्रीनाथ में स्नान करते हैं, द्वारिकाधीश में वस्त्र पहनते हैं, जगन्नाथ में भोजन करते हैं और रामेश्वरम में विश्राम करते हैं। शास्त्रों के अनुसार बारह ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ में स्थापित ज्योतिर्लिंग सबसे ऊंचे स्थान पर है।
धर्म शास्त्रों के अनुसार भविष्यवाणी की गई है की इस सारे क्षेत्र में जितने भी तीर्थ विद्यमान हैं वह सारे आने वाले समय में लुप्त हो जाएंगे। मान्यता है कि जब नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे उस दिन बद्रीनाथ का रास्ता पूर्ण रूप से बंद हो जाएगा। बद्रीनाथ के दर्शन सदा के लिए बंद हो जाएंगे। उत्तराखंड में धटित प्राकृतिक आपदा इस ओर संकेत करती है। भविष्य में बद्रीनाथ धाम और केदारेश्वर धाम अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और फिर लंबे समय के उपरांत भविष्य में भविष्यबद्री नाम से नए तीर्थ का उद्गम होगा।

Topper बनना चाहते हैं तो समस्याओं का हल ढूंढना सीखो

- समय चाहे पढ़ाई का हो या परीक्षा का, समझदार छात्र अपने खानपान के साथ नींद का भी पूरा ध्यान रखते हैं। नींद न लेने से या बहुत कम लेने से भी हमारे दिमाग की याद्दाश्त क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।
- टॉपर बनने के लिए गति से अधिक दिशा महत्वपूर्ण होती है।
- वही छात्र टॉपर बन सकते हैं जो आशा धूमिल होते हुए भी प्रयास जारी रखते हैं। जिन्हें यह विश्वास होता है कि  वे सफल होंगे।
- गलतियां तो हर कोई ढूंढ लेता है, यदि टॉपर बनना चाहते हैं तो समस्याओं का हल ढूंढना सीखो ।
- टॉपर बनना उस समय तक नामुमकिन लगता है, जब तक हम उसे मुमकिन बनाने के प्रयास शुरू नहीं कर देते।
- असफलता का भय सफलता के रास्ते की सबसे प्रमुख रुकावट होती है ।
- कोई भी छात्र अपनी मेहनत और कर्मों से टॉपर बन सकता है ।
- बिना उत्साह के कभी भी कुछ महान हासिल नहीं किया जा सकता ।

महान वैज्ञानिक बोले, नहीं तो मिट जाएगा इंसान का नामोनिशान

स्टीफन हॉकिंस ने कहा है कि मानव जाति को अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए पृथ्वी को छोड़कर अंतरिक्ष में कहीं और बसेरा तलाशना होगा।
मानव जाति को ऐसा 1000 साल के अंदर करना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो मानव जाति का नामोनिशान मिट सकता है। हॉकिंस ने कहा है कि मानव जाति को अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए अंतरिक्ष में जाना होगा।
उन्होंने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि अगले 1000 साल तक मानव जाति पृथ्वी से पलायन किए बगैर सुरक्षित रह सकती है। हॉकिंस ने ये बातें सिडनी ओपेरा हाउस में आयोजित वार्ता में कही।
स्टीफन हॉकिंस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उदय से मानव जाति को खतरे की चेतावनी दी है। साथ ही मानव जाति को बचाने के लिए किसी दूसरे प्लेनेट की तलाश करने को कहा है।
इस वार्ता में हॉकिंस की उपस्थिति टेक्नोलॉजी के सहारे दर्ज हुई। हॉकिंस कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के अपने ऑफिस में ही बैठे रहे और वहीं से सिडनी ओपेरा हाउस में हुई आयोजन में हिस्सा लिया।
इसके लिए होलोग्राफिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया, जिसके जरिए हॉकिंस की 3डी इमेज सिडनी ओपेरा हाउस में पहुंचाई गई।
अपने लेक्चर के अंत में हॉकिंस ने उन्हें सुन रहे सभी लोगों को उत्साहित करने के लिए कहा कि मानव जाति को अब सितारों की ओर देखने की जरूरत है, न कि अपने पैरों के नीचे।
विश्व प्रसिद्ध महान वैज्ञानिक और बेस्टसेलर रही किताब 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' के लेखक स्टीफन हॉकिंग ने शारीरिक अक्षमताओं को पीछे छोड़ते हु्ए यह साबित किया कि अगर इच्छा शक्ति हो तो व्यक्ति कुछ भी कर सकता है।
हमेशा व्हील चेयर पर रहने वाले हॉकिंग किसी भी आम इंसान से इतर दिखते हैं। कम्प्यूटर और विभिन्न उपकरणों के ज़रिए अपने शब्दों को व्यक्त कर उन्होंने भौतिकी के बहुत से सफल प्रयोग भी किए हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ़ केम्ब्रिज में गणित और सैद्धांतिक भौतिकी के प्रेफ़ेसर रहे स्टीफ़न हॉकिंग की गिनती आईंस्टीन के बाद सबसे बढ़े भौतकशास्त्रियों में होती है। उनका जन्म इंग्लैंड में आठ जनवरी 1942 को हुआ था।
यह पूछने पर कि क्या अपनी शारीरिक अक्षमताओं की वजह से वह दुनिया के सबसे बेहतरीन वैज्ञानिक बन पाए, हॉकिंग कहते हैं, ''मैं यह स्वीकार करता हूँ मैं अपनी बीमारी के कारण ही सबसे उम्दा वैज्ञानिक बन पाया, मेरी अक्षमताओं की वजह से ही मुझे ब्रह्माण्ड पर किए गए मेरे शोध के बारे में सोचने का समय मिला। भौतिकी पर किए गए मेरे अध्ययन ने यह साबित कर दिखाया कि दुनिया में कोई भी विकलांग नहीं है।''
हॉकिंग को अपनी कौन सी उपलब्धि पर सबसे ज्यादा गर्व है? हॉकिंग जवाब देते हैं ''मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई। इसके रहस्य लोगों के लिए खोले और इस पर किए गए शोध में अपना योगदान दे पाया। मुझे गर्व होता है जब लोगों की भीड़ मेरे काम को जानना चाहती है।''
हॉकिंग के मुताबिक यह सब उनके परिवार और दोस्तों की मदद के बिना संभव नहीं था।
यह पूछने पर कि क्या वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं हॉकिंग कहते हैं, ''लगभग सभी मांसपेशियों से मेरा नियंत्रण खो चुका है और अब मैं अपने गाल की मांसपेशी के जरिए, अपने चश्मे पर लगे सेंसर को कम्प्यूटर से जोड़कर ही बातचीत करता हूँ।''
मरने के अधिकार जैसे विवादास्पद मुद्दे पर हॉकिंग बीबीसी से कहते हैं, ''मुझे लगता है कि कोई भी व्यक्ति जो किसी लाइलाज बीमारी से पीड़ित है और बहुत ज्यादा दर्द में है उसे अपने जीवन को खत्म करने का अधिकार होना चाहिए और उसकी मदद करने वाले व्यक्ति को किसी भी तरह की मुकदमेबाजी से मुक्त होना चाहिए।''
स्टीफन हॉकिंग आज भी नियमित रूप से पढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय जाते हैं, और उनका दिमाग आज भी ठीक ढंग से काम करता है।
ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी को समझने में उन्होंने अहम योगदान दिया है। उनके पास 12 मानद डिग्रियाँ हैं और अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान उन्हें दिया गया है।

Monday, 27 April 2015

नेपाली तबाही कुछ कहती है

धरती डोली। एक नहीं, कई झटके आए। नेपाल में तबाही हुई। दुनिया की सबसे ऊँची चोटी - माउंट एवरेस्ट को जीतने निकले 18 पर्वतारोहियों को मौत ने खुद जीत लिया। जैसे-जैसे प्रशासन और मीडिया की पहुँच बढ़ती गई, मौतों का आँकड़ा बढ़ता गया। इसका कुछ दर्द तिब्बत, असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश ने भी झेला। दहशत में रात, दिल्लीवासियों ने भी गुजारी। जरूरी है कि हम सभी इससे दुखी हों। यमन की तरह, नेपाल के मोर्चे पर भारत सरकार मुस्तैद दिखी।
इस बार आपदा प्रबन्धन निगरानी की कमान, हमारे प्रधानमन्त्री जी ने खुद सम्भाली। एयरटेल ने नेपाल में फोन करना मुफ्त किया। बीएसएनएल ने तीन दिन के लिये नेपाल कॉल रेट, लोकल किया। स्वामी रामदेव बाल-बाल बचे। सोशल मीडिया पर लोगों ने सभी की सलामती के लिये दुआ माँगी। मीडिया ने भी जानकारी और दुआओं के लिये अपना दिल खोल दिया।

14 साल से कम उम्र के बच्चे भी कर सकेंगे काम

सरकार बाल मजदूरी में संशोधन की तैयारी कर रही है। ऐसी खबर है कि संसद के चालू सत्र में सरकार बाल मजदूरी रोकथाम अधिनियम में जो संशोधन प्रस्तावित है उसे पास कराना चाहती है।
इस संशोधन में प्रावधान है कि 14 साल से कम उम्र के बच्चे को भी उसके पारिवारिक कारोबार में काम करने की अनुमति दी जाएगी बशर्ते कि उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो। इसमें प्रावधान है कि अगर बाल स्कूल से आने के बाद या छुट्टियों के दौरान या तकनीकी संस्थान से लौटने के बाद अपने परिवार की खेतों, वनों या घर पर होने वाले किसी काम में सहायता करता है तो प्रतिबंध उन पर लागू नहीं होगा लेकिन 14 से 18 साल की उम्र के बच्चों को खतरनाक उद्योगों में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। श्रम मंत्रालय के अनुसार पारिवारिक कारोबार को छोड़कर बड़े या अन्य छोटे संगठनों में बाल मजदूरी के मौजूदा प्रावधान लागू रहेंगे। शीघ्र ही इससे संबंधित विधेयक को संसद में पेश किया जाएगा।

दुनिया में अमर रहने वाला व्यक्ति हो चुका है पैदा: साइंटिस्ट का दावा

एक ऐसा व्यक्ति जो कभी भी मरे नहीं और सभी बीमारियों से मुक्त हो, क्या संभव है? और हां, अगर यह संभव है तो उसे अमर ही माना जाएगा। हाल ही में लंदन स्थित कैंब्रिज यूनिनर्सिटी के एक साइंटिस्ट ने दावा किया है कि ऐसे ही अमर व्यक्ति का जन्म हो चुका है । जेरॉन्टोलॉजिस्ट (उम्र के बारे में सभी पहलुओं से अध्ययन करने वाला) वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत औब्रे डी ग्रे का कहना है कि अगर लोग यह सवाल करते हैं कि क्या दुनिया में किसी ऐसे व्यक्ति का अस्तित्व संभव है जो काफी वर्षों से जिंदा हो और उसे किसी भी तरह की बीमारी न हो, तो उन्हें मेरा जवाब होगा कि ऐसी संभावना बहुत ज्यादा है कि ऐसा व्यक्ति जिंदा है।
कैलिफॉर्निया स्थित स्ट्रैटजी फॉर इंजीनियर्ड नेग्लिजिबल सिनेसेंस (एसईएनएस) रिसर्च फाउंडेशन के को-फाउंडर डी ग्रे ने कहा कि इसकी 80 फीसदी से ज्यादा संभावना है कि ऐसे लोग हैं। उन्होंने कहा कि अमरत्व एक जिंदा शब्द है और इस शब्द का इस्तेमाल करना गलत नहीं है। डी ग्रे के मुताबिक, अमरत्व का मतलब होता है किसी भी बीमारी से पूरी तरह सुरक्षा। इसके कारण किसी भी व्यक्ति की बढ़ती उम्र का उसके स्वास्थय पर असर नहीं पड़ता है और वह मौत की वजहों को दरकिनार करता रहता है।

Sunday, 26 April 2015

भारत के सामने भी खतरा

 नेपाल में शनिवार को आए 7.9 तीव्रता वाले विनाशकारी भूकंप के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि अब उत्तर भारत में भी इतनी ही तीव्रता का भूकंप आ सकता है। अहमदाबाद स्थित भूकंप अनुसंधान संस्थान का कहना है कि कश्मीर, हिमाचल, पंजाब और उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में यह भूकंप आज या आज से 50 साल बाद भी आ सकता है। इन क्षेत्रों में सिस्मिक गैप की पहचान हो चुकी है जिसके कारण भूकंप आता है। 2000 किलोमीटर लंबी हिमालय श्रंखला के हर 100 किलोमीटर के क्षेत्र में उच्च तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, दिल्ली में शनिवार को छह तीव्रता वाला भूकंप आया था, जो 10 किलोमीटर गहरा था और भूकंप का झटका करीब एक मिनट तक आया। आईएमडी के वैज्ञानिक पी.आर. वैद्य ने कहा कि नेपाल अल्पाइन-पट्टी पर पड़ता है, जो धरती की सतह पर मौजूद तीन भूकंपीय पट्टियों में से एक है और इस क्षेत्र में दुनिया का 10 फीसदी भूकंप आता है।

रिक्टर स्केल पर तीव्रता को साधारण तौर पर कैसे समझें

भूकंप की तीव्रता अलग-अलग होती है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि अगर भूकंप आए तो आप सामान्य तरीके से कैसे समझ सकते हैं कि भूकंप कितना खतरनाक है।
0-1.9: केवल सीस्मोग्राफ से ही पता चलता है।
2-2.9: मामूली कंपन ही होता है, जो कई बार तो पता ही नहीं चलता।
3-3.9: कोई भारी वाहन पुल से निकले तो इतना कंपन होता है।
4-4.9: कांच की खिड़कियां चटक सकती है, दीवार से फ्रेम भी गिर सकते हैं।
5-5.9: भारी फर्नीचर और चीजें हिल सकती हैं।
6-6.9: इमारतों की नींव हिल सकती है। ऊपरी मंजिलों को खतरा।
7-7.9: इमारतें गिरने का खतरा, सड़कें फट सकती हैं।
8-8.9: इमारतें और पुल गिर जाएंगे।
9 से अधिक: इसमें सिर्फ तबाही होती है।

क्यों आते हैं भूकंप

विशेषज्ञों के अनुसार, हमारी धरती के नीचे कुल 12 टैक्टोनिक प्लेट्स हैं और इनके नीचे लावा बहता है। प्लेट्स इसी लावे पर तैरती हैं लेकिन जब ये आपस में टकराती हैं तो ऊर्जा निकलती है, इस ऊर्जा के कारण धरती हिलती है जिसे हम भूकंप कहते हैं। प्लेट्स एक जैसी नहीं होतीं बल्कि इनका आकार-प्रकार अलग होता है और कई बार तो केवल इस आकार के कारण ही इनके कोने आपस में टकरा जाते हैं।
कैसे तय होती है भूकंप की तीव्रता
बहुत साधारण भाषा में समझें तो धरती की जितनी ज्यादा गहराई में हलचल होगी या ये प्लेट टकराएंगी, भूकंप की तीव्रता उतनी ही कम होगी और जितनी कम गहराई होगी भूकंप की तीव्रता उतनी ही ज्यादा होगी।

नेपाल और उत्तर भारत में आए भूकंप का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं EXPERTS की चेतावनी: दो महीने तक जारी रह सकते हैं भूकंप के झटके

नई दिल्ली. नेपाल में शनिवार को आए शक्तिशाली भूकंप के झटके अगले दो महीने तक नेपाल और उत्तर भारत को हिलाते रह सकते हैं। यह आशंका भूगर्भीय विशेषज्ञों ने जाहिर की है। विशेषज्ञों ने कहा है कि नेपाल में आए भूकंप की तीव्रता काफी अधिक थी और इसी कारण इतनी तबाही देखने मिल रही है, हालांकि आफ्टर शॉक्स कम तीव्रता वाले होंगे लेकिन ये एक से दो महीने तक समूचे प्रभावित क्षेत्र को हिलाते रह सकते हैं।
भूकंप के बाद सामान्य हैं आफ्टर शॉक्स

विशेषज्ञों का कहना है कि हर शक्तिशाली भूकंप के बाद आफ्टर शॉक्स आना बिल्कुल सामान्य बात है और इसके लिए तैयार रहना चाहिए। शनिवार को आए 7.9 की तीव्रता के भूकंप के बाद रविवार को 6.9 की तीव्रता के ऑफ्टर शॉक्स आए। एक विशेषज्ञ कहते हैं कि बड़े भूकंप के पहले कई बार छोटे भूकंप भी आते हैं लेकिन ये उतने तीव्र नहीं होते। उनका कहना है कि धरती के अंदर होने वाली हलचल इसके लिए जिम्मेदार है। उनका कहना है अब तक आफ्टर शॉक्स और फोर शॉक्स (मुख्य तीव्रता वाले भूकंप के पहले हल्के झटके) का अनुमान लगाने की कोई तकनीक किसी के भी पास नहीं है, इसलिए सतर्कता बरतना ही सबसे बेहतर उपाय है।
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने भी चेताया

USGS ने नेपाल में आए भूकंप के बाद चेतावनी दी है कि नेपाल में इस सप्ताह 5 से ज्यादा तीव्रता वाले करीब 3 से 14 आफ्टर शॉक्स आ सकते हैं। संगठन ने यह चेतावनी भी दी है कि 54 प्रतिशत इस बात की संभावना है कि 6 की तीव्रता वाले झटके आएं। इसके अलावा सात फीसदी आशंका इस बात की है कि 7 से ज्यादा की तीव्रता वाले आफ्टर शॉक्स महसूस किए जाएं। USGS के मुताबिक इंडिया और यूरेशिया के नीचे की प्लेटों की हलचल के कारण यह भूकंप आया।
ये उदाहरण खास लेकिन चिंता देने वाला

विशेषज्ञों के मुताबिक साल 1950 में चीन और अरुणाचल प्रदेश में भूकंप आया, इसे इस क्षेत्र में आने वाला सबसे बड़ा भूकंप माना गया। विशेषज्ञ आज भी इस बात को लेकर हैरान हैं कि इस भूकंप के आफ्टर शॉक्स दो साल बाद तक महसूस किए गए और वो भी शक्तिशाली। नेपाल लगभग उसी क्षेत्र में आता है। 1950 का भूकंप 8.2 की तीव्रता है और इसके आफ्टर शॉक्स करीब 8 की तीव्रता वाले थे, यानी साफ तौर पर हर बार तबाही। ताजा मामले में जानकारों को इसी बात की चिंता सता रही है।

Saturday, 25 April 2015

12वीं पास की भर्ती, 35 हजार रुपए सैलरी

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पर्सनल असिस्टेंट के खाली पदों को भरने के लिए विज्ञप्ति जारी की गई है। विज्ञापित पदों की कुल संख्या 14 है, जिसमें अनारक्षित वर्ग के 09, अनुसूचित जाति के 03 और अनुसूचित जनजाति के 02 पद शामिल हैं।

विज्ञापित पदों को भरने की शैक्षिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय से 12वीं उत्तीर्ण निर्धारित की गई है। अन्य योग्यता के अंर्तगत उम्मीदवारों को शार्टहैंड (100 शब्‍द प्रति मिनट) का ज्ञान होना आवश्यक है। अनुभव के तहत उम्मीदवारों ने न्यूनतम दो वर्ष स्टेनोग्राफर के रूप में कार्य किया होना चाहिए।

विज्ञापित पदों पर उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट प्रदान की जाएगी। वेतनमान के तौर पर चयनित उम्मीदवारों को 9,300 रुपये से लेकर 34,800 रुपये व ग्रेड पे 4,200 रुपये प्रतिमाह दिया जाएगा।विज्ञापित पदों पर केवल ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं व दिए हुए निर्देशों के अनुसार सावधानीपूर्वक आवेदन पत्र को भरें।

इन पदों के लिए सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 300 रुपये का डीडी 'फाइनेंस ऑफिसर, जेएनयू नई-दिल्ली' के पक्ष में बनवाकर जमा करना होगा। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन निशुल्क है।

पूर्ण रूप से भरे हुए आवेदन पत्र का प्रिंटआउट निकालकर उसके साथ शैक्षिक प्रमाणपत्रों की प्रति और डिमांड ड्रॉफ्ट को संलग्न करें व 'डिप्टी रजिस्ट्रॉर (एडमिनिस्ट्रेशन/आर एंड सी सेल), कमरा नंबर 310, एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, न्यू महरौली रोड, नई दिल्ली-110067' के पते पर भेजें।

योग्य उम्मीदवारों को कौशल परीक्षा और लिखित परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। आवेदन पत्र निर्धारित पते पर पहुंचने की अंतिम तिथि 18 मई, 2015 निर्धारित की गई है।‌ आवेदन करने के लिए या किसी अन्य जानकारी के लिए उम्मीदवार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट www.jnu.ac.in पर लॉग ऑन करें।

भारत के दो छात्रों का कमाल : जूता चार्ज करेगा आपका फोन

यह बात सूनने में थोड़ी अटपटी लग सकती है मगर रांची के दिल्ली पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले दो छात्रो ने ऐसा जूता बनाया है जो फोन को चार्ज कर सकता है। 10वीं कक्षा के छात्र उदेश और उत्कर्ष ने मोबाइल को चार्ज करने वाले जूते का मॉडल तैयार किया है।

एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार ये छात्र गुड़गांव सेक्टर-10 स्थित ब्ल्यू बेल्स पब्लिक स्कूल में आयोजित केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में हिस्सा लेने आए थे। इस माॅडल को तैयार करने में महज 100 रुपए का खर्च आया है। छात्रों द्वारा बनाया गया यह मॉडल प्रिंसिपल ऑफ एनर्जी पर काम करता है जो मांसपेशियों की ऊर्जा को इलेक्ट्रिक ऊर्जा में बदलता है। मगर इन जूतों से उत्पन्न हुई ऊर्जा व्यर्थ नहीं होती।

इस जूते से फोन को चार्ज करने में उतना ही समय लगता है जितना आम तौर पर लगता है। छात्र उदेश और उत्कर्ष ने बताया कि जूते के नीचे एक स्प्रिंग लगाया गया है। इसके अलावा जूते के पीछे के हिस्से में छोटा सा अल्टरनेटर, कैपेस्टर, डायोड और गियर सेट तथा मोबाइल की चार्जर केबल लगाई गई है, जो फोन को चार्ज करती है।

Thursday, 23 April 2015

57 करोड़ रुपये में हुई टीपू सुल्तान के शस्त्रों की नीलामी

मैसूर के अंतिम बादशाह टीपू सुल्तान के शस्त्र और कवच को नीलाम किया गया. हैदर अली के बड़े बेटे और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के पहले सिपाही टीपू सुल्तान के शस्त्रों की नीलामी से लगभग 57 करोड़ रुपये मिले.
21 अप्रैल को लंदन में आयोजित बोन्हैम्स इस्लामी एवं भारतीय कला नीलामी के दौरान टीपू सुल्तान की 30 वस्तुएं नीलाम की गईं. इसके खरीदार की पहचान गुप्त रखी गई है.
इस शस्त्रों में सबसे अधिक टीपू सुल्तान की दुर्लभ रत्न-जड़ित और बाघ के सिर के मूठ वाली तलवार रही. यह 20.45 करोड़ रुपये में बिकी. जबकि इसकी नीलामी में महज 57 से 76 लाख रुपये मिलने का ही अनुमान लगाया गया था.
बाघ टीपू सुल्तान की खास पसंद का जानवर था. यही कारण था कि उनकी पसंद की कलाकृतियों और शस्त्रों में बाघ की पट्टी का डिजाइन हुआ करता था.
उनकी तीन पहिए वाली तोप के 13.54 करोड़ रुपये जबकि उनकी पुरानी बंदूक के भी, अनुमान से सात गुनी अधिक कीमत, 6.86 करोड़ रुपये मिले.

देखिए तस्वीरें, दुनिया के अंत का संकेत है यह!

प्राकृतिक ने हमें सब कुछ दिया है तो क्या यह हमारा कर्तव्य नहीं हैं कि हम इसे संभाल कर साफ-सुथरा रखें लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। बढ़ती जनसंख्या और गंदगी से धरती को खराब करते हम लोग अपने भविष्य को देख नहीं रहें हैं।
इस धरती पर 22 हजार लोग रोज पैदा होते हैं। जनसंख्या वृ‌द्घि के बारे में लोगों का ध्यान आ‌कर्षित करने के लिए एक किताब ने इन तस्वीरों को छापा गया है।  यह सभी तस्वीरें मिरर में छापी गई है।इस किताब का नाम है ओवरडेवलपमेंट, ओवरपॉपुलेशन और ओवरशूटा। आप इन तस्वीरों को देखकर समझ सकते हैं कि किस हद तक हम अपने कामों से धरती को तबाह कर चुकें हैं।
इनमें से कई तस्वीरों में हम देख रहें हैं कि कैसे हमारा पर्यावरण घनघोर प्रदूषण और जनसंख्या के बोझ से खराब होता चला जा रहा है। अगर हमने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो परिणाम बहुत ही खौफनाक हो सकते हैं। अंधा-धुंध पेड़ों की कटाई, पानी में फैक्ट्रियों का कैमिकल मिलना पेड़ों जीव-जन्तुओं की जान भी खतरे में डाल रहा है। किताब में लोगों को गंदगी कम फैलाने और  जीव-जतुंओं और पेड़ की रक्षा करने के बारे में सचेत किया गया है। जरा आप भी देखे तस्वीरें।










रबड़ के जैसे घूमता है इस शख्स का शरीर, कहते हैं उसे 'RUBBER BOY'

आपने बहुत सारे अजीबोगरीब और अनोखे लोगों को देखा होगा। किसी ने नाखून बड़ा कर रिकार्ड बनाया है तो किसी ने अपना मोटापा बढ़ा के। लेकिन इस लड़के की बात तो जरा हट के ही है।
पंजाब के रहने वाले जसप्रीत सिंह कालरा के बदन के लचीलेपन को देख लेंगे तो  सोचेंगे कि क्या ये लड़का बिना हड्डियों का है? आप देखिए किस फूर्ति से वो अपने बदन को कहीं भी कितना भी घुमा लेता है। 15 साल का जसप्रीत रबर ब्वॉय नाम से पॉपुलर है। वह अपने बदन के हर एक हिस्से को जितना चाहें जहां चाहें घुमा लेता है। जसप्रीत का कहना है कि उसका ऐसा कर पाने की पीछे की वजह योगा है। 
उन्होंने बताया कि वह पिछले 4 साल से योगा कर रहा है। बदन को घुमाने में उसे कभी भी दर्द नहीं हुआ। लोगों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है लेकिन उनके लिए ये हॉबी की तरह है। अब जसप्रीत इस काम को अपना फुल टाइम करियर बनाना चाहते हैं। वो 'इंडियाज गॉट टैलेंट' नाम के शो में भी आ चुके हैं। आप खुद ही देख सकते हैं कि कैसे जसप्रीत बदन को कहीं भी कितना भी घुमाने में जरा सी दिक्कत नहीं महसूस करता।

200 रुपए में करें केदारनाथ यात्रा

केदारनाथ की पैदल यात्रा इस बार बेहद सस्ते में की जा सकेगी। महज 200 रुपए में केदारनाथ की यात्रा कर सकेंगे। 200 रुपए में एक तीर्थयात्री को एक वक्त का नाश्ता, 2 वक्त का खाना तथा टैंट में रात गुजारने की सुविधा भी मिलेगी। इतने सस्ते में केदारनाथ की यात्रा पहले कभी नहीं की जा सकती थी।
अगर आप प्री-फैब्रिकेटिड हट्स में रात गुजारना चाहते हैं, तो फिर आपकी जेब में 300 रुपए होने चाहिएं। यानी 2 से 3 सौ रुपए में आप रहने की बेहतरीन व्यवस्था और खाने के लजीज व्यंजनों का आनंद भी ले सकते हैं। बाबा केदार के दर्शन कर पुण्य के भागीदार बन सकते हैं। इससे पहले इन सुविधाओं के लिए तीर्थ यात्रियों को 1 से 3 हजार रुपए तक चुकाने पड़ते थे, लेकिन इस बार जी.एम.वी.एन. द्वारा सस्ती दरों पर तीर्थ यात्रियों को खाने की व्यवस्था दी जा रही है और अत्याधुनिक टैंटों में रात गुजारने के लिए मामूली किराया वसूला जा रहा है।