ट्रेनों में सफर के दौरान सुरक्षा संबंधी खतरों से बचने और तुरन्त मदद पाने के लिए पीआरएस सिस्टम से जारी होने वाले सभी रेल टिकटों पर निम्नलिखित तत्काल नंबर और सूचनाएं प्रिन्ट की जाएंगीरू- १. आपात स्थिति में संपर्क किए जाने वाले व्यक्ति का नाम व फोन नंबर दर्ज करें। २. खतरे की स्थिति उत्पन्न हेाने पर रेलवे सुरक्षा हैल्पलाइन नंबर डायल करें रू- तत्काल मदद नं0 रू १८२
Sunday, 3 May 2015
मिलावटखोरों की शिकायत करें
मेरठ मंडल के आयुक्त आलोक सिन्हा ने चिकित्सा-स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा आदि विभागों के अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया है कि वे होली तक मिलावटखोर मैडिकल स्टोरों, दूध की डेयरियों, हलवाइयों के खिलाफ ऐसा शिकंजा कसें कि ये लोग मिलावट न कर पाएं। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि निम्न हैल्पलाइन नंबर सभी विकास खंडों और सरकारी भवनों पर अंकित करा दें, ताकि जनता मिलावट खोरों की शिकायत कर सके रू- १८०० १८० ५५३३
स्वच्छ भारत अभियान, चढ़े परवान
प्रधानमंत्री के ‘स्वच्छ भारत’ अभियान से स्वयं को बड़ा प्रतिष्ठित व ख्याति प्राप्त समझने वाले लोग भी जुडने की घोषणा करते आ रहे है। क्या अपना दोहरा चरित्र जीने वाले इन लोगो से पूछा गया कि वे कहां-कहां सफाई-अभियान में लोगो को जागरूक करने गये। एक दिन हाथ में झाडू लेकर सफाई नही हो सकती। लोगो को समझाये कि वे सफाई की आदत बनाये यहां तो लोग अपने घर को साफ कर कूड़ा सडक पर बिखेर देते है। नाली में थूकने के बजाय सडक के बीच में थूकना अपनी शान समझते है। पान व गुटका खाकर लोग सार्वजनिक स्थलो की दीवारो पर आधुनिक पेन्टिंग बना देते है। ऐसे लेागो को कौन समझा सकता है, कानून का पालन करवा सकता है सफाई के लिए सभी को सचेत होना होगा। पश्चिम के लोग खुद ही पहल करते है। उनके कानून भी सख्त है पकड़े गये तो भारी जुर्माना अदा करना ही पड़ेगा।
पॉलीथीन सफाई का सबसे बड़ा दुश्मन हैं। यह पर्यावरण के लिए घातक है। उसी के प्रयोग से नाली, सीवर तो चोक होते ही है। यह नदियो के लिए भी गंभीर समस्या है। पॉलीथीन का बढ़ता प्रयोग हमारी धरा की जल शोषण की क्षमता क्षीण कर रहा है। जिससे कृषि जगत पर भी एक अदृश्य काला साया मंडरा रहा है। नगरों में ही नही देहातो में भी हवा में उड़ता, बिखरा पॉलीथीन इस बात को बार-बार समझा रहा है कि मेरा उपयोग बड़ा घातक है इसका प्रयोग रोको किन्तु इस ओर न तो हम देखना चाहते है और न ही कुछ करना चाहते है। आज जिस थोड़ी सुविधा के लिए हम पोलीथीन की पन्नियों का प्रयोग करते है यही सुविधा हमारे बच्चों के लिए घातक है। स्वच्छता अभियान सफल बनाने के लिये हम दृढ संकल्प ले।
यमुना को प्रदूषण मुक्त करने हेतु राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एन.जी.टी.) की सार्थक पहल सचमुच प्रशसनीय है।
अब यमुना नदी में कूड़ा या धार्मिक सामग्री डालते पाये जाने पर ५०० रु. का जुर्माना देना होगा तथा निर्माण सामग्री फैकना भी प्रतिबंधित होगा ऐसा करने वालों पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने ५०,००० रु. का जुर्माना लगाने का निर्देश यमुना को प्रदूषण मुक्त करने हेतेु सार्थक पहल है।
साधना और उपासना के बीच में अंतर
साधक में कुछ खोना नहीं है, पाना है और उपासक में सिवाय खोने के कुछ भी नहीं ळे
कृष्ण के व्यक्तित्व में साधना जैसा कुछ भी नहीं है। हो नहीं सकता। साधना में जो मौलिक तत्व है, वह प्रयास है, इफर्ट है। बिना प्रयास के साधना नहीं हो सकती। दूसरा जो अनिवार्य तत्व है, वह अस्मिता है, अहंकार है। बिना श्मैं्य के साधना नहीं हो सकती। करेगा कौन? कर्ता के बिना साधना कैसे होगी, कोई करेगा तभी होगी। साधना शब्द, जिनके लिए कोई परमात्मा नहीं है, आत्मा ही है, साधना शब्द उनका है। आत्मा साधेगी और पाएगी।
उपासना शब्द बिल्कुल उलटे लोगों का है। आमतौर से हम दोनों को एक साथ चलाए जाते हैं। उपासना शब्द उनका है, जो कहते हैं कि आत्मा नहीं, परमात्मा है। सिर्फ उसके पास जाना, पास बैठनाकृउप-आसन, निकट होते जाना, निकट होते जाना। और निकट होने का अर्थ है, खुद मिटते जाना, और कोई अर्थ नहीं है।
हम उससे उतने ही दूर हैं, जितने हम हैं। जीवन के परम सत्य से हमारी दूरी, हमारी डिस्टेंस उतना ही है, जितने हम हैं। जितना हमारा होना है, जितना हमारा मैं है, जितना हमारा ईगो है, जितनी हमारी आत्मा है, उतने ही हम दूर हैं। जितने हम खोते हैं और विगलित होते हैं, पिघलते हैं और बहते हैं, उतने ही हम पास होते हैं। जिस दिन हम बिलकुल नहीं रह जाते, उस दिन उपासना पूरी हो जाती है और हम परमात्मा हो जाते हैं। जैसे बर्फ पानी बन रहा हो, बस उपासना ऐसी है कि बर्फ पिघल रहा है, पिघल रहा है...
साधना क्या कर रहा है बर्फ? साधना करेगा तो और सख्त होता चला जाएगा। क्योंकि साधना का मतलब होगा कि बर्फ अपने को बचाए। साधना का मतलब होगा कि बर्फ अपने को सख्त करे। साधना का मतलब होगा कि बर्फ और क्रिस्टलाइज्ड हो जाए। साधना का मतलब होगा कि बर्फ और आत्मवान बने। साधना का मतलब होगा कि बर्फ अपने को बचाए और खोए न।
साधना का अर्थ अंततरू आत्मा हो सकता है। उपासना का अर्थ अंततरू परमात्मा है। इसलिए जो लोग साधना से जाएंगे, उनकी आखिरी मंजिल आत्मा पर रुक जाएगी। उसके आगे की बात वे न कर सकेंगे। वे कहेंगे, अंततरू हमने अपने को पा लिया। उपासक कहेगा, अंततरू हमने अपने को खो दिया। ये दोनों बातें बड़ी उलटी हैं। बर्फ की तरह पिघलेगा। उपासक और पानी की तरह खो जाएगा। साधक तो मजबूत होता चला जाएगा।
इसलिए कृष्ण के जीवन में साधना का कोई तत्व नहीं है। साधना का कोई अर्थ नहीं है। अर्थ है तो उपासना का है। उपासना की यात्रा ही उलटी हैं। उपासना का मतलब ही यह है कि हमने अपने को पा लिया, यही भूल है। हम हैं, यही गलती है। टू बी इज दि ओनली बांडेज। होना ही एकमात्र बंधन है। न होना ही एकमात्र मुक्ति है। साधक जब कहेगा तो वह कहेगा, मै मुक्त होना चाहता हूं। उपासक जब कहेगा तो वह कहेगा, मैं श्मैं्य से मुक्त होना चाहता हूं। साधक कहेगा, मैं मुक्त होना चाहता हूं। मैं मोक्ष पाना चाहता हूं। लेकिन श्मैं्य मौजूद रहेगा। उपासक कहेगा, श्मै्य से मुक्त होना है। श्मैं्य से मुक्ति पानी है। उपासक के मोक्ष का अर्थ है, श्ना-मैं्य की स्थिति। साधक के मोक्ष का मतलब है, श्मैं्य की परम स्थिति। इसलिए कृष्ण की भाषा में साधना के लिए कोई जगह नहीं हैय उपासना के लिए जगह है।
अब यह उपासना क्या है, इसे थोड़ा समझें।
पहली तो यह बात समझ लें कि उपासना साधना नहीं है, इससे समझने में आसानी बनेगी। अन्यथा भ्रांति निरंतर होती रहती है। और उपासक हममें से बहुत कम लोग होना चाहेंगे, यह भी ख्याल में ले लें। साधक हममें से सब होना चाहेंगे।
क्योंकि साधक में कुछ खोना नहीं है, पाना है। और उपासक में सिवाय खोने के कुछ भी नहीं है, पाना कुछ भी नहीं है। खोना ही पाना है, बस। उपासक कौन होना चाहेगा? इसलिए कृष्ण को मानने वाले भी साधक हो जाते हैं। कृष्ण के मानने वाले भी साधना की भाषा बोलने लगते हैं। क्योंकि वह भीतर जो अहंकार है, वह साधना की भाषा बुलवाता है। वह कहता है, साधो! पाओ! पहुंचो! उपासना बड़ी कठिन बात है, आरडुअस। इससे ्ययादा कठिन कोई बात नहीं हैकृपिघलो, मिटो, खो जाओ।
-ओशो
पुस्तकरू कृष्ण स्मृति
प्रवचन नं.12 से संकलित
Wednesday, 29 April 2015
राजस्थान में खनन माफिया चट कर गए पहाड़ भी
राजस्थान के मेवात क्षेत्र में खनन माफियाओं का खौफ किस कदर बढ़ता जा रहा है इसकी बानगी तब देखने को मिली जब प्रदेश के खुफिया विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) उत्कल रंजन साहू ने अलवर के एसपी विकास कुमार को हाल ही चिट्ठी लिखकर खनन माफियाओं से सतर्क रहने को कहा. चिट्ठी में कहा गया था, ''अलवर में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान से खनन माफियाओं और मेव कट्टर पंथियों में नाराजगी है. उनसे आपकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है. '' दरअसल कुमार ने अलवर में अवैध खनन के खिलाफ सघन अभियान चला रखा है. जनवरी 2014 से अब तक उन्होंने अवैध खनन के खिलाफ एक हजार से अधिक कार्रवाई की और सात सौ से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है. फिर भी अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली जिले में अवैध खनन का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है. यहां खनन माफियाओं की आपस में या पुलिस से आए दिन हिंसक झड़पें होने लगी हैं.
बीती 2 अप्रैल को भरतपुर जिले के पहाड़ी थाना क्षेत्र के नागल क्रेसर जोन में खनन माफियाओं के दो गुटों में हुई झड़प में दो लोगों की मौत हो गई थी जबकि पांच अन्य घायल हो गए थे. इस घटना के कुछ ही दिन पहले, 18 मार्च को करौली जिले के मासलपुर थाना क्षेत्र में खनन रोकने गई पुलिस पर खनन माफियाओं ने हमला कर दिया था. यहां से पुलिस ने पत्थरों से भरा एक ट्रक और खनन मशीन जब्त की थी. अवैध खनन के मुख्य केंद्र अलवर में तीन साल में खनन माफिया ने पचास से ज्यादा बार पुलिस और वन विभाग के दल पर हमला किया है. 16 फरवरी को अलवर के ही राजगढ़ क्षेत्र में अवैध खनन की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन ग्रीन अभियान के दौरान झोपड़ी नांगल गांव के पास अवैध खनन कर पत्थर ले जा रहे दो ट्रैक्टर चालकों ने वन विभाग की सरकारी गाड़ी को पचास फुट तक घसीट दिया था.
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद बेहद हिंसक हो चुके खनन माफिया अलवर स्थित अरावली की पहाडिय़ों में अवैध खनन लगातार जारी रखे हुए हैं. अवैध खनन की वजह से ही भिवाड़ी, टपूकड़ा, तिजारा और किशनगढ़बास क्षेत्र से पहाडिय़ां गायब होती जा रही हैं. अलवर में डीएफओ रह चुके पी.काथिरवेल के आकलन के मुताबिक भिवाड़ी क्षेत्र में खनन माफियाओं ने बीते 15 साल में 50 हजार करोड़ रु. का अवैध खनन किया है और खनन इसी रफ्तार से जारी रहा तो इस क्षेत्र के पहाड़ तीन साल में खत्म हो जाएंगे. वन विभाग की ही एक रिपोर्ट बताती है कि टपूकड़ा क्षेत्र के चूहड़पुर, उधनवास, उलावट, ग्वालदा, इंदौर, सारे कलां, सारे खुर्द, खोहरी कलां, मायापुर, छापुर, नाखनौल, कहरानी, बनबन, झिवाणा, निंबाड़ी में हरियाणा के माफिया भी व्यापक स्तर पर फैले हुए हैं. और यहां के करीब एक हजार हैक्टेयर इलाके में पहाड़ खत्म हो चुके हैं. यहां पहाड़ों के खत्म होने के कगार पर पहुंचने के बाद माफियाओं ने तिजारा और किशनगढ़बास में अपना कारोबार फैलाया और नीमली, बाघोर, देवता, मांछा क्षेत्र के पहाड़ों में खनन शुरू कर दिया है.
काथिरवेल के मुताबिक, 1998 से 2003 के बीच एक हजार वाहनों से प्रति दिन दो ट्रिप के हिसाब से छह हजार करोड़ रु. का अवैध खनन हुआ. इसी तरह 2003 से 2008 के बीच 12 हजार करोड़ रु. और 2008 से 2013 के बीच 30 हजार करोड़ रु.का अवैध खनन हुआ है.
खनन रोकने में सबसे बड़ी परेशानी है इस कारोबार से जुड़े लोगों के पास भारी मात्रा मंड विस्फोटक और अवैध हथियारों का होना, जिनके मुकाबले पुलिस के संसाधन पर्याप्त नहीं हैं. धौलपुर के एसपी राजेश सिंह कहते हैं, ''खनन माफिया के लोग गुट बनाकर चलते हैं. ये लोग खनन के रास्ते में आने वाले की जान लेने से परहेज नहीं करते चाहे वह कितना बड़ा अधिकारी ही क्यों न हो. ''
हिंसक रुख अख्तियार कर चुके खनन माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब उनके डंपर पुलिस चौकी, थानों और वन विभाग की चौकियों के सामने से बेखौफ निकलते हैं. और अपने खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाने से वे डरते नहीं.
बीती 2 अप्रैल को भरतपुर जिले के पहाड़ी थाना क्षेत्र के नागल क्रेसर जोन में खनन माफियाओं के दो गुटों में हुई झड़प में दो लोगों की मौत हो गई थी जबकि पांच अन्य घायल हो गए थे. इस घटना के कुछ ही दिन पहले, 18 मार्च को करौली जिले के मासलपुर थाना क्षेत्र में खनन रोकने गई पुलिस पर खनन माफियाओं ने हमला कर दिया था. यहां से पुलिस ने पत्थरों से भरा एक ट्रक और खनन मशीन जब्त की थी. अवैध खनन के मुख्य केंद्र अलवर में तीन साल में खनन माफिया ने पचास से ज्यादा बार पुलिस और वन विभाग के दल पर हमला किया है. 16 फरवरी को अलवर के ही राजगढ़ क्षेत्र में अवैध खनन की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन ग्रीन अभियान के दौरान झोपड़ी नांगल गांव के पास अवैध खनन कर पत्थर ले जा रहे दो ट्रैक्टर चालकों ने वन विभाग की सरकारी गाड़ी को पचास फुट तक घसीट दिया था.
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद बेहद हिंसक हो चुके खनन माफिया अलवर स्थित अरावली की पहाडिय़ों में अवैध खनन लगातार जारी रखे हुए हैं. अवैध खनन की वजह से ही भिवाड़ी, टपूकड़ा, तिजारा और किशनगढ़बास क्षेत्र से पहाडिय़ां गायब होती जा रही हैं. अलवर में डीएफओ रह चुके पी.काथिरवेल के आकलन के मुताबिक भिवाड़ी क्षेत्र में खनन माफियाओं ने बीते 15 साल में 50 हजार करोड़ रु. का अवैध खनन किया है और खनन इसी रफ्तार से जारी रहा तो इस क्षेत्र के पहाड़ तीन साल में खत्म हो जाएंगे. वन विभाग की ही एक रिपोर्ट बताती है कि टपूकड़ा क्षेत्र के चूहड़पुर, उधनवास, उलावट, ग्वालदा, इंदौर, सारे कलां, सारे खुर्द, खोहरी कलां, मायापुर, छापुर, नाखनौल, कहरानी, बनबन, झिवाणा, निंबाड़ी में हरियाणा के माफिया भी व्यापक स्तर पर फैले हुए हैं. और यहां के करीब एक हजार हैक्टेयर इलाके में पहाड़ खत्म हो चुके हैं. यहां पहाड़ों के खत्म होने के कगार पर पहुंचने के बाद माफियाओं ने तिजारा और किशनगढ़बास में अपना कारोबार फैलाया और नीमली, बाघोर, देवता, मांछा क्षेत्र के पहाड़ों में खनन शुरू कर दिया है.
काथिरवेल के मुताबिक, 1998 से 2003 के बीच एक हजार वाहनों से प्रति दिन दो ट्रिप के हिसाब से छह हजार करोड़ रु. का अवैध खनन हुआ. इसी तरह 2003 से 2008 के बीच 12 हजार करोड़ रु. और 2008 से 2013 के बीच 30 हजार करोड़ रु.का अवैध खनन हुआ है.
खनन रोकने में सबसे बड़ी परेशानी है इस कारोबार से जुड़े लोगों के पास भारी मात्रा मंड विस्फोटक और अवैध हथियारों का होना, जिनके मुकाबले पुलिस के संसाधन पर्याप्त नहीं हैं. धौलपुर के एसपी राजेश सिंह कहते हैं, ''खनन माफिया के लोग गुट बनाकर चलते हैं. ये लोग खनन के रास्ते में आने वाले की जान लेने से परहेज नहीं करते चाहे वह कितना बड़ा अधिकारी ही क्यों न हो. ''
हिंसक रुख अख्तियार कर चुके खनन माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब उनके डंपर पुलिस चौकी, थानों और वन विभाग की चौकियों के सामने से बेखौफ निकलते हैं. और अपने खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाने से वे डरते नहीं.
बूस्टर सीजन -4 का फाइनल नौ जून को
आबूलेन पीपीपी कांफ्रेंस हॉल के निकट स्थित बीट्स ऑफ डांस के डांस बूस्टर सीजन-4 का ऑडीशन मेरठ रॉकर्स एकेडमी में किया गया। ऑडीशन में बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बीट्स ऑफ डांस के डायरेक्टर समीर खुर्शीद ने बताया कि डांस बूस्टर सीजन का तीसरा और आखिरी ऑडीशन तीन मई को होगा। इसका फाइनल नौ जून को होगा। इस मौके पर डांस इंडिया डांस की कोरियोग्राफर गीता कपूर बच्चों के हुनर को परखेंगी। दूसरे ऑडीशन में जज के रूप में दिव्या जैन, मीता, समीर खुर्शीद रहे।
दुश्मन मिले सबेरे लेकिन मतलबी यार न मिले
नौचंदी के पटेल मंडप में मंगलवार रात लखनऊ से पहुंचे भोजपुरी अवध गायक सुरेश कुशवाहा एंड ग्रुप ने रंगारंग प्रस्तुति पेश करते हुए समां बांध दिया। कलाकारों के ग्रुप ने भोजपुरी गीतों के साथ नृत्य कर दर्शकों की तालियां बटोरीं।
शुभारंभ विशाल कुमार ने साई भजन से किया। भोजपुरी गायक सुरेश ने मंच संभाला और भोजपुरी स्टाइल में भगवान शिव की स्तुति का गुणगान किया। 'रटन कहने लगी राम ही राम' गीत के बाद सुरेश ने 'दुश्मन मिले सबेरे लेकिन मतलबी यार न मिले' गीत गाकर प्रेम भावना से रहने का संदेश दिया। समाज में बढ़ती जा रही दहेज प्रथा को 'दूल्हे का मुंह जैसे फैजाबादी बंडा, दहेज में मां-बाप मांगे हीरो-होंडा' से बयां कर दहेज लोभियों को करारा जवाब दिया। 'यदि घर-घर के रगड़े-झगड़े आपस में मिट जाएंगे, गांधी के पुजारी खद्दर वाले कहां जाएंगे' गीत सुनाकर राजनीति के गिरते स्तर पर तीखा कटाक्ष किया। इसके बाद गायिका जया ने मंच संभाला। उन्होंने 'रेलिया बैरन पिया को लिया जाए रे, दीन भर चाहे जहां रही हो हमार पिया' गीत की नृत्य के साथ रंगारंग प्रस्तुति दी। भोजपुरी कलाकारों के ग्रुप में आफाक वारसी ने ढोलक, लालधर वर्मा ने आर्गन, सिबले ने बैन्जों के अलावा पैड पर शिवम व जयनाथ यादव ने झींका पर सुरीले संगीत से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शुभारंभ विशाल कुमार ने साई भजन से किया। भोजपुरी गायक सुरेश ने मंच संभाला और भोजपुरी स्टाइल में भगवान शिव की स्तुति का गुणगान किया। 'रटन कहने लगी राम ही राम' गीत के बाद सुरेश ने 'दुश्मन मिले सबेरे लेकिन मतलबी यार न मिले' गीत गाकर प्रेम भावना से रहने का संदेश दिया। समाज में बढ़ती जा रही दहेज प्रथा को 'दूल्हे का मुंह जैसे फैजाबादी बंडा, दहेज में मां-बाप मांगे हीरो-होंडा' से बयां कर दहेज लोभियों को करारा जवाब दिया। 'यदि घर-घर के रगड़े-झगड़े आपस में मिट जाएंगे, गांधी के पुजारी खद्दर वाले कहां जाएंगे' गीत सुनाकर राजनीति के गिरते स्तर पर तीखा कटाक्ष किया। इसके बाद गायिका जया ने मंच संभाला। उन्होंने 'रेलिया बैरन पिया को लिया जाए रे, दीन भर चाहे जहां रही हो हमार पिया' गीत की नृत्य के साथ रंगारंग प्रस्तुति दी। भोजपुरी कलाकारों के ग्रुप में आफाक वारसी ने ढोलक, लालधर वर्मा ने आर्गन, सिबले ने बैन्जों के अलावा पैड पर शिवम व जयनाथ यादव ने झींका पर सुरीले संगीत से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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