Tuesday, 28 April 2015

पूरी तरह अभी भी पटरी पर नहीं आई सफाई व्यवस्था

नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने के बाद शहर की सफाई व्यवस्था अभी भी पूरी तरह पटरी पर लौटती नहीं दिख रही है। ग्यारह दिन की हड़ताल जब रविवार को टूटी तो अफसरों ने राहत की सांस ली थी। मंगलवार को नगर निगम कर्मचारी सुबह से सफाई करने के लिए जुटे। सफाई एवं खाद्य निरीक्षकों की अगुवाई में टीमें बनकर चलीं। मुख्य सड़कों के साथ ही चौराहों पर अभियान चलाया गया। कई कालोनियों से भी कूड़े का उठान हुआ।
यहां हुई सफाई
मंगलवार को बेगमपुल, हापुड़ अड्डा, गांधी आश्रम, तेजगढ़ी चौराहा, बच्चा पार्क, घंटाघर, रेलवे रोड चौराहा, मेट्रो प्लाजा आदि मुख्य चौराहों के साथ ही सड़कों पर सफाई की गयी। सड़कों पर मिट्टी व कूड़े को इकट्ठा कर ट्रालियों व निगम गाड़ियों से उठान किया गया। इसके अलावा मोहल्लों में भी सफाई की सुध ली गयी। हालांकि कई मोहल्ले मंगलवार को भी सफाई की बाट जोहते रहे। साकेत, मानसरोवर कालोनी, शास्त्रीनगर, जागृति विहार, अजंता कालोनी, दामोदर कालोनी, प्रेमप्रयाग, गंगानगर, पंचशील कालोनी, बैंक कालोनी, सूरजकुंड, फूलबाग कालोनी, नेहरूरनगर आदि क्षेत्रों के कई मुहल्लों में सफाई कर्मी दिखे। पुराना इकट्ठे कूड़े का उठान किया गया। वहीं इन कालोनियों के कुछ मोहल्लों के साथ ही शहर के कई इलाकों में गंदगी के अंबार लगे रहे। नगर आयुक्त एसके दुबे ने कहा कि सफाई व्यवस्था पटरी पर आ गयी है, एक-दो दिन में व्यवस्था सामान्य हो जाएगी।

अभियान चला शराबी चालकों की धरपकड़

शराब पीकर दोपहिया और चौपहिया वाहनों को ड्राइव करने वाले लोगों की अब खैर नहीं है। ट्रैफिक पुलिस ने मंगलवार रात से अभियान चलाया। पुलिस का अभियान बेगमपुल और जीरोमाइल के अलावा कई मुख्य चौराहें पर चला, जिसमें करीब दो दर्जन से अधिक वाहनों के चालन और कई वाहन सीज किए गए।
वाहन चेकिंग के अभियान की कमान खुद ट्रैफिक सीओ बीएस वीर कुमार ने संभाल रखी थी। चार टीएसआई और पुलिसकर्मियों को जगह-जगह लगाकर वाहनों की घेराबंदी की गई। कई कारों में शराब की बोतलें, सोड़ा और नमकीन के पैकेट मिले। वहीं दोपहिया वाहन चालकों के मुंह में एलकोहल मीटर लगाकर जांच की गई। जिन वाहन चालकों की जांच में शराब पीना आया, उनका चालान काटा गया और जिनके पास वाहन के कागजात नहीं थे, उनको सीजा किया गया। बेगमपुल पर चेकिंग में एक बाइक चालक को रोका गया, लेकिन उसने बाइक तेज कर दी। घेराबंदी कर चालक को दबोचकर सड़क पर उसकी धुनाई की गई। पुलिस चेकिंग को देख कई वाहन चालक को काफी दूर से ही वापस हो गए।

मदद को बढ़ाए हाथ

मेरठ : नेपाल में आए भूकंप में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए विभिन्न स्थानों पर शोक सभाएं हुई। इस दौरान लोगों ने दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि दी और मृतकों के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

भारतीय बौद्ध महासभा की ओर से बुद्ध विहार में लोगों ने दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान महेंद्र सिंह, ललित बौद्ध, रवि कुमार, पवन कुमार, यशपाल, श्री पाल आदि मौजूद थे। नोबल पब्लिक स्कूल में छात्र-छात्राओं ने कैंडल मार्च निकालकर दो मिनट का मौन धारण किया। श्रद्धांजलि देने वालों में प्रिंसिपल संतोष मेहता, अनिल चौधरी और अमित चौधरी शामिल रहे। डा. भीमराव अंबेडकर कल्याणकारी सेवा संस्थान के कार्यालय पर बैठक हुई, जिसमें आपदा में मारे गए लोगों को दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मोहन लाल सहगल, डा. सेवा राम कैन, जौहरी मल, रीना गौतम कैली, चतर सिंह, ज्योति प्रसाद जाटव आदि उपस्थित रहे।

उधर, भूकंप पीड़ितों की आर्थिक मदद के लिए अब अधिवक्ता भी आगे आ गए हैं। उन्होंने बुधवार से पीड़ित परिवारों की मदद के लिए धनराशि एकत्र करने का निर्णय लिया। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव कुमार त्यागी व महामंत्री संदीप चौधरी ने बताया कि भूकंप पीड़ितों की आर्थिक मदद के लिए बुधवार से कचहरी में धनराशि एकत्र करेंगे। धनराशि डीएम पंकज यादव को सौंपी जाएगी।

केदारनाथ: जहां मौत भी देती है उपहार

हिंदू धर्म में बहुत से तीर्थ स्थल हैं जिनकी यात्रा का अपना-अपना महत्व है लेकिन जब तक चार धाम यात्रा न कर लें तब तक यात्रा अपूर्ण ही रहती है। यह चार धाम है:- बद्रीनाथ, द्वारिकाधीश, जगन्नाथ और रामेश्वरम। मान्यता है की श्री हरि विष्णु बद्रीनाथ में स्नान करते हैं, द्वारिकाधीश में वस्त्र पहनते हैं, जगन्नाथ में भोजन करते हैं और रामेश्वरम में विश्राम करते हैं। शास्त्रों के अनुसार बारह ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ में स्थापित ज्योतिर्लिंग सबसे ऊंचे स्थान पर है।
धर्म शास्त्रों के अनुसार भविष्यवाणी की गई है की इस सारे क्षेत्र में जितने भी तीर्थ विद्यमान हैं वह सारे आने वाले समय में लुप्त हो जाएंगे। मान्यता है कि जब नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे उस दिन बद्रीनाथ का रास्ता पूर्ण रूप से बंद हो जाएगा। बद्रीनाथ के दर्शन सदा के लिए बंद हो जाएंगे। उत्तराखंड में धटित प्राकृतिक आपदा इस ओर संकेत करती है। भविष्य में बद्रीनाथ धाम और केदारेश्वर धाम अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और फिर लंबे समय के उपरांत भविष्य में भविष्यबद्री नाम से नए तीर्थ का उद्गम होगा।

Topper बनना चाहते हैं तो समस्याओं का हल ढूंढना सीखो

- समय चाहे पढ़ाई का हो या परीक्षा का, समझदार छात्र अपने खानपान के साथ नींद का भी पूरा ध्यान रखते हैं। नींद न लेने से या बहुत कम लेने से भी हमारे दिमाग की याद्दाश्त क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।
- टॉपर बनने के लिए गति से अधिक दिशा महत्वपूर्ण होती है।
- वही छात्र टॉपर बन सकते हैं जो आशा धूमिल होते हुए भी प्रयास जारी रखते हैं। जिन्हें यह विश्वास होता है कि  वे सफल होंगे।
- गलतियां तो हर कोई ढूंढ लेता है, यदि टॉपर बनना चाहते हैं तो समस्याओं का हल ढूंढना सीखो ।
- टॉपर बनना उस समय तक नामुमकिन लगता है, जब तक हम उसे मुमकिन बनाने के प्रयास शुरू नहीं कर देते।
- असफलता का भय सफलता के रास्ते की सबसे प्रमुख रुकावट होती है ।
- कोई भी छात्र अपनी मेहनत और कर्मों से टॉपर बन सकता है ।
- बिना उत्साह के कभी भी कुछ महान हासिल नहीं किया जा सकता ।

सड़क पर रहने वाले बच्चे बना रहे अपना बजट

दिल्ली सरकार इन दिनों जनता से बजट तैयार करने के लिए रायशुमारी कर रही है। यह रायशुमारी वो मोहल्ला सभाओं के माध्यम से कर रही है।
दिल्ली सरकार का ये तरीका सड़क पर रहने वाले कुछ बच्चों को इतना भा गया है कि उन बच्चों को बजट से क्या चाहिए इसका पूरा मेमोरंडम तैयार कर डाला है।
इन बच्चों ने राय ‌मश्विरे करके एक मसौदा तैयार किया है जिसमें उन्होंने ये लिखा है कि बच्चों को केजरीवाल सरकार से क्या उम्मीदें हैं।
बता दें कि ये बच्चे स्ट्रीट चिल्ड्रेन की एक फेडरेशन 'बढ़ते कदम' से जुड़े हैं। शनिवार को जब सरकार दिल्ली में मोहल्ला सभाओं की श्रंखला आयोजित कर रही थी तब ये बच्चे खुद एक-दूसरे सलाह मश्विरा कर खुद के अनुभव के आधार पर अपना बजट बनाने में लगे हुए थे।
ये सभी बच्चे अपने अपने-अपने चार्ट और मार्करों के साथ अपना प्लान बनाने बैठे थे ताकि वो सरकार के बजट बनाने की प्रक्रिया में सहायता कर सकें। जब मुशरत परवीन से पूछा गया कि उस जैसे लगभग 16 साल के बच्चों की क्या जरूरत है तो अपनी मां के साथ घरों में काम करने वाली मुशरत बोली कि 'सर्वे जरूरी है।'
मुशरत की बात का समर्थन करते हुए बेघर लोगों के लिए बने रैनबसेरे में रहने वाली ज्योति कहती है कि ‌अगर सर्वे होगा तो वो और बच्चों से मिल पाएंगे और उन्हें समझा पाएंगे कि कमाई के लिए पढ़ाई कितनी जरूरी है।
इन बच्चों ने न केवल यह सुझाया है कि सर्वे होने चाह‌िए बल्कि इन लोगों ने सर्वे किस तरह से किए जाएंगे उसका पूरा विस्तार में खाका भी तैयार कर लिया है। इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे 11 जिलों में ये सर्वे होंगे और इस वक्त वो सर्वे पर कितना खर्च आएगा उसे तैयार करने में लगे हैं।
चांदनी जो शहीद कैंप वेस्ट दिल्ली में रहती है सीएम से और रैनबसेरों की मांग करने वाली है। ये बच्चे जब बजट तैयार कर रहे थे तो इनके बहस का जो सबसे बड़ा मुद्दा था वो बच्चों के लिए और रैनबसेरों की मांग का ही था।
दूसरा जो मुद्दा सबसे अहम था वो स्वास्थ्य का सामने आया। वर्तमान समय में अगर उन्हें किसी का साथ न मिले तो उन्हें स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं होती।
कूड़ा बिनने वाले बच्चों में कुत्ता काटने की समस्या आम बात है। लेकिन अगर वो इसके इलाज के लिए सरकारी अस्पताल जाते हैं तो या तो उन्हें भगा दिया जाता है या उनका इलाज करने से मना कर दिया जाता है।
इन बच्चों ने ही बताया कि कई ऐसे बच्चे रेबीज के शिकार हो जाते हैं बल्कि कई मर भी जाते हैं। वेटर का काम करने वाले चंदन ने बोला कि वो दिल्ली सरकार से कम से कम बच्चों के लिए चार अस्पताल बनाने को कहेंगे ताकि उन्हें सही इलाज मिल सके।

महान वैज्ञानिक बोले, नहीं तो मिट जाएगा इंसान का नामोनिशान

स्टीफन हॉकिंस ने कहा है कि मानव जाति को अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए पृथ्वी को छोड़कर अंतरिक्ष में कहीं और बसेरा तलाशना होगा।
मानव जाति को ऐसा 1000 साल के अंदर करना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो मानव जाति का नामोनिशान मिट सकता है। हॉकिंस ने कहा है कि मानव जाति को अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए अंतरिक्ष में जाना होगा।
उन्होंने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि अगले 1000 साल तक मानव जाति पृथ्वी से पलायन किए बगैर सुरक्षित रह सकती है। हॉकिंस ने ये बातें सिडनी ओपेरा हाउस में आयोजित वार्ता में कही।
स्टीफन हॉकिंस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उदय से मानव जाति को खतरे की चेतावनी दी है। साथ ही मानव जाति को बचाने के लिए किसी दूसरे प्लेनेट की तलाश करने को कहा है।
इस वार्ता में हॉकिंस की उपस्थिति टेक्नोलॉजी के सहारे दर्ज हुई। हॉकिंस कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के अपने ऑफिस में ही बैठे रहे और वहीं से सिडनी ओपेरा हाउस में हुई आयोजन में हिस्सा लिया।
इसके लिए होलोग्राफिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया, जिसके जरिए हॉकिंस की 3डी इमेज सिडनी ओपेरा हाउस में पहुंचाई गई।
अपने लेक्चर के अंत में हॉकिंस ने उन्हें सुन रहे सभी लोगों को उत्साहित करने के लिए कहा कि मानव जाति को अब सितारों की ओर देखने की जरूरत है, न कि अपने पैरों के नीचे।
विश्व प्रसिद्ध महान वैज्ञानिक और बेस्टसेलर रही किताब 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' के लेखक स्टीफन हॉकिंग ने शारीरिक अक्षमताओं को पीछे छोड़ते हु्ए यह साबित किया कि अगर इच्छा शक्ति हो तो व्यक्ति कुछ भी कर सकता है।
हमेशा व्हील चेयर पर रहने वाले हॉकिंग किसी भी आम इंसान से इतर दिखते हैं। कम्प्यूटर और विभिन्न उपकरणों के ज़रिए अपने शब्दों को व्यक्त कर उन्होंने भौतिकी के बहुत से सफल प्रयोग भी किए हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ़ केम्ब्रिज में गणित और सैद्धांतिक भौतिकी के प्रेफ़ेसर रहे स्टीफ़न हॉकिंग की गिनती आईंस्टीन के बाद सबसे बढ़े भौतकशास्त्रियों में होती है। उनका जन्म इंग्लैंड में आठ जनवरी 1942 को हुआ था।
यह पूछने पर कि क्या अपनी शारीरिक अक्षमताओं की वजह से वह दुनिया के सबसे बेहतरीन वैज्ञानिक बन पाए, हॉकिंग कहते हैं, ''मैं यह स्वीकार करता हूँ मैं अपनी बीमारी के कारण ही सबसे उम्दा वैज्ञानिक बन पाया, मेरी अक्षमताओं की वजह से ही मुझे ब्रह्माण्ड पर किए गए मेरे शोध के बारे में सोचने का समय मिला। भौतिकी पर किए गए मेरे अध्ययन ने यह साबित कर दिखाया कि दुनिया में कोई भी विकलांग नहीं है।''
हॉकिंग को अपनी कौन सी उपलब्धि पर सबसे ज्यादा गर्व है? हॉकिंग जवाब देते हैं ''मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई। इसके रहस्य लोगों के लिए खोले और इस पर किए गए शोध में अपना योगदान दे पाया। मुझे गर्व होता है जब लोगों की भीड़ मेरे काम को जानना चाहती है।''
हॉकिंग के मुताबिक यह सब उनके परिवार और दोस्तों की मदद के बिना संभव नहीं था।
यह पूछने पर कि क्या वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं हॉकिंग कहते हैं, ''लगभग सभी मांसपेशियों से मेरा नियंत्रण खो चुका है और अब मैं अपने गाल की मांसपेशी के जरिए, अपने चश्मे पर लगे सेंसर को कम्प्यूटर से जोड़कर ही बातचीत करता हूँ।''
मरने के अधिकार जैसे विवादास्पद मुद्दे पर हॉकिंग बीबीसी से कहते हैं, ''मुझे लगता है कि कोई भी व्यक्ति जो किसी लाइलाज बीमारी से पीड़ित है और बहुत ज्यादा दर्द में है उसे अपने जीवन को खत्म करने का अधिकार होना चाहिए और उसकी मदद करने वाले व्यक्ति को किसी भी तरह की मुकदमेबाजी से मुक्त होना चाहिए।''
स्टीफन हॉकिंग आज भी नियमित रूप से पढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय जाते हैं, और उनका दिमाग आज भी ठीक ढंग से काम करता है।
ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी को समझने में उन्होंने अहम योगदान दिया है। उनके पास 12 मानद डिग्रियाँ हैं और अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान उन्हें दिया गया है।