राजकीय रेलवे पुलिस ने ३ मार्च को निम्नलिखित हैल्पलाइन सेवा का शुभारंभ
किया है, जिसके जरिये उत्तर प्रदेश राज्य की सीमा के अंदर रेल सफर में
यात्री चोरी, लूट, डकैती, मारपीट, छेड़खानी, हत्या, जहरखुरानी जैसे मुश्किल
हालात में डायल कर शिकायत दर्ज करा कर मदद ले सकते हैंरू- हैल्पलाइनरू
१५१२
Monday, 4 May 2015
स्टेशन आने से पहले जगाएगी अलर्ट सुविधा
ट्रेन में रात के समय सफर करने वाले बहुत से यात्रियों को गंतव्य स्टेशन
आने से पहले उठने में काफी परेशानी होती है। कई बार तो आंख न खुल पाने से
ट्रेन आगे निकल जाती है और उन्हें वापस आने में बहुत दिक्कत झेलनी पड़ती है।
इस परेशानी का निराकरण करने के लिए रेलवे ने १३९ पर फोन कर वेकअॅप
कॉल-डेस्टिनेशन alert की निम्नलिखित नई सुविधा कुछ ही दिन पहले शुरू की है। इससे गंतव्य स्टेशन आने से पहले ही मोबाइल पर अलार्म बज उठेगा
पहले alert टाइप करें, फिर PNR Number टाइप करें, फिर १३९ पर Send करें और इसके बाद PNR Number एक्टिवेट हो जाएगा।
पहले alert टाइप करें, फिर PNR Number टाइप करें, फिर १३९ पर Send करें और इसके बाद PNR Number एक्टिवेट हो जाएगा।
‘आप’ के ट्रैक पर देर से दौड़ेगी की बजट की गाड़ी
आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली का बजट पेश करने में किसी तरह की हड़बड़ी के मूड में नहीं है। दिल्ली डॉयलॉग कमीशन की टास्क फोर्स गठित होने और उसकी सिफारिश आने का इंतजार किया जाएगा।
जिन 10 विधान सभा में जनता के सुझाव से बजट का प्रावधान किया जाना हैए वह प्रक्रिया भी इस दौरान पूरी की जाएगी। हालांकि लेखानुदान से सरकार खर्चों में कटौती की शुरुआत कर सकती है। दिल्ली सरकार का बजट 37 हजार करोड़ रुपये का है। वित्त वर्ष में लोकसभा और विस का चुनाव आने से बेशक प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पाए, खर्चे कम हुए लेकिन वसूली में 4300 करोड़ रुपये की कमी हुई। अधिकारी बता रहे हैं कि लेखानुदान में कटौती बहुत जरूरी है। लेखानुदान इसलिए लेना है ताकि कर्मियों के वेतन व अन्य खर्चों की व्यवस्था की जा सके। सूत्र बताते हैं कि लेखानुदान तीन महीने का लिया जाएगा। इसके लिए विस का सत्र मार्च के अंतिम सप्ताह में दो दिन का होगा। इसकी तैयारी योजना व वित्त विभाग के अधिकारियों ने शुरू भी कर दी है।
सरकार का पूर्ण बजट मई में आएगा। तब तक दिल्ली डॉयलॉग कमीशन में दिए गए मोबाइल पर सरकार, वाई-फाई और सीसीटीवी वाली दिल्ली, अनधिकृत कॉलोनी नियमन, झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास, जॉब और जॉब सिक्योरिटी जैसे विषयों को दिल्ली के पूर्ण बजट में शामिल किए जाने की तैयारी है।
जिन 10 विधान सभा में जनता के सुझाव से बजट का प्रावधान किया जाना हैए वह प्रक्रिया भी इस दौरान पूरी की जाएगी। हालांकि लेखानुदान से सरकार खर्चों में कटौती की शुरुआत कर सकती है। दिल्ली सरकार का बजट 37 हजार करोड़ रुपये का है। वित्त वर्ष में लोकसभा और विस का चुनाव आने से बेशक प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पाए, खर्चे कम हुए लेकिन वसूली में 4300 करोड़ रुपये की कमी हुई। अधिकारी बता रहे हैं कि लेखानुदान में कटौती बहुत जरूरी है। लेखानुदान इसलिए लेना है ताकि कर्मियों के वेतन व अन्य खर्चों की व्यवस्था की जा सके। सूत्र बताते हैं कि लेखानुदान तीन महीने का लिया जाएगा। इसके लिए विस का सत्र मार्च के अंतिम सप्ताह में दो दिन का होगा। इसकी तैयारी योजना व वित्त विभाग के अधिकारियों ने शुरू भी कर दी है।
सरकार का पूर्ण बजट मई में आएगा। तब तक दिल्ली डॉयलॉग कमीशन में दिए गए मोबाइल पर सरकार, वाई-फाई और सीसीटीवी वाली दिल्ली, अनधिकृत कॉलोनी नियमन, झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास, जॉब और जॉब सिक्योरिटी जैसे विषयों को दिल्ली के पूर्ण बजट में शामिल किए जाने की तैयारी है।
यह पब्लिक है सब जानती है
भाजपा के रणनीतिकार आप को बहुत हल्के में लेते हुए मान रहे थे कि मोदी की
सदाबाहर लोक प्रियता के बूते पार्टी लगातार राज्यों के विधानसभा चुनाव
जीतती रहेगी। अहंकार के चलते नेतृत्व ने मान लिया था कि मोदी के राजनीतिक
व्यक्तित्व के सामने कोई चुनौती नही है लेकिन भारतीय मतदाता जानते है कि
राजनेताओ को है लेकिन भारतीय मतदाता जानते है कि राजनेताओ को कब वास्तविकता
से अवगत कराया जाये। प्रधानमंत्री ने दिल्ली के विधानसभा चुनाव को अपने
व्यक्तित्व पर जनमत बना दिया था, मतदाताओ ने उन्हे दो टूक आभास करा दिया कि
उन्होने मतदाताओं के समर्थन का गलत अनुमान लगाया था।
लोकतंत्र में शासक जनता है जनप्रतिनिधि सेवक है। उन्हें जनता का दिल जीतने के लिये जनहित में योजनाएं बनाना उन्हे कार्यन्वित करना होगा। क्योकि यह पब्लिक है, सब जानती है।
लोकतंत्र में शासक जनता है जनप्रतिनिधि सेवक है। उन्हें जनता का दिल जीतने के लिये जनहित में योजनाएं बनाना उन्हे कार्यन्वित करना होगा। क्योकि यह पब्लिक है, सब जानती है।
मेरठ मेडिकल कॉलेज में स्थायी प्रधानाचार्य
मेरठ। प्रदेश के कुछ मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल काउंसिल आफ इडिया के द्वारा नियत मानकों के पूरा न होने तथा प्रदेश सरकार प्रमुख उपलब्धियों में एक सहारनपुर मेडिकल कॉलेज का अभी तक विघिवत कार्य की शुरुआत न होने व समूह श्ग्य की भर्तियों को कार्य न होने पर मुख्यमन्त्री की नाराजगी प्रदेश के स्वास्थय यहा निदेशक शिक्षा डा0 के.के. गुप्ता को भारी पड़ी। डा0 गुप्ता को इस पद से हटा कर वापस मेरठ मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य के दायित्व निर्वहन के लिए भेजा गया है। इस वापसी को डा0 गुप्ता की पदावत कहां जा रहा है। इसके विपरीत इसे उनकी इच्छा भी कह रहे है ताकि वह अपनी गडबड निजी प्रैक्टिस को रास्ते पर ला सके।
डा0 गुप्ता द्वारा तत्काल प्रधानाचार्य का दायित्व सम्भाल लिया गया। डा0 गुप्ता के स्थान पर स्वास्थय महानिदेशक शिक्षा पद मुख्यमन्त्री द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्र कन्नौज के मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य वी.एन. त्रिपाठी को दिया गया ताकि प्रदेश में बढ़ रहे स्वाइन फ्लू की चुनौती में यह बदलाव से असफलता के असर को प्रभावहीन करने का प्रयास किया।
डा0 गुप्ता को वापस मेरठ मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य का दायित्व देने के लिए दलील इस कॉलेज में एडोक्रायोनोलॉजी विभाग होने व उसके दायित्व को के स्थान पर गत ढाई वर्ष से व्यवस्था न होने पर एमसीआई द्वारा आपत्ति करना बताया जा रहा है। डॉ0 गुप्ता अगले वर्ष सेवानिवृत्ति पूरी कर रहे है। इसके बाद यह शिक्षण कार्य सरकार की चिकित्सा शिक्षक उम्र बढाने के लाभ के अन्तर्गत कार्य कर सकेगें, परन्तु प्रधानाचार्य नियमित की जरुरत अगले वर्ष होगी। इसके लिए स्थाई प्रधानाचार्य खोज अभी से शुरु होगी संशय है।
सद्भावना समिति वरिष्ठ नागरिक फोरम ने अपेक्षा कि है लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ को भविष्य का स्थाई प्रधानाचार्य समय रहते दिए जाने की व्यवस्था प्रदेश सरकार करेगी। इस मेडिकल कॉलेज में डा0 उषा शर्मा के बाद से कुछ अवधि छोड़ अस्थाई प्रधानाचार्य लम्बे अन्तराल तक रहने की व्यवस्था में कॉलेज में गड़बडियों से इसकी शाख गिरी है। अस्थाई प्रधानाचार्य पद पर बनें रहने की कुछ लोगो की चाह से जबरदस्त गुटबाजी चल रही है। जिसमें सरकार द्वारा नई-नई व्यवस्थाओं के किए जाने के बाद भी कॉलेज छात्रों व जनता को उनका लाभ दिलाने में पिछड़ा है। स्वयं मेडिकल छात्र व जूनियरों में अनुशासनहीनता बढ रही है। कॉलेज के पास जिस तरह अतिक्रमण बढ रहा है। वह एक दिन इस कॉलेज के ्रप्रर्यावरण व कानून व्यवस्था के लिए भयकर चुनौती होगा।
व्यवस्था तो एॅडोक्रायोलांजी शिक्षण व चिकित्सा
डा0 गुप्ता की मेरठ वापसी का एक कारण प्रदेश में आगरा के बाद एॅडोक्रायोलाजी चिकित्सा व शिक्षण विषय की व्यवस्था होने व इसके शिक्षण कराने व इस मेडिकल कॉलेज में इसकी चिकित्सा हेतु चिकित्सक की व्यवस्था न होना भी कहा गया है। इस विषय के अध्ययन कर चुके छात्र चिकित्सकों व पढाई करने वाले छात्र चिकित्सकों का कहना है कि इस चिकित्सा अध्ययन व विभाग को नई व्यवस्था पर अभी से ध्यान देना होगा ताकि निकट भविष्य में इनकी सेवानिवृति व अपनी नीजि प्रैक्टिस की चाह के अवरोध से निजात मिल सके।
डा0 गुप्ता द्वारा तत्काल प्रधानाचार्य का दायित्व सम्भाल लिया गया। डा0 गुप्ता के स्थान पर स्वास्थय महानिदेशक शिक्षा पद मुख्यमन्त्री द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्र कन्नौज के मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य वी.एन. त्रिपाठी को दिया गया ताकि प्रदेश में बढ़ रहे स्वाइन फ्लू की चुनौती में यह बदलाव से असफलता के असर को प्रभावहीन करने का प्रयास किया।
डा0 गुप्ता को वापस मेरठ मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य का दायित्व देने के लिए दलील इस कॉलेज में एडोक्रायोनोलॉजी विभाग होने व उसके दायित्व को के स्थान पर गत ढाई वर्ष से व्यवस्था न होने पर एमसीआई द्वारा आपत्ति करना बताया जा रहा है। डॉ0 गुप्ता अगले वर्ष सेवानिवृत्ति पूरी कर रहे है। इसके बाद यह शिक्षण कार्य सरकार की चिकित्सा शिक्षक उम्र बढाने के लाभ के अन्तर्गत कार्य कर सकेगें, परन्तु प्रधानाचार्य नियमित की जरुरत अगले वर्ष होगी। इसके लिए स्थाई प्रधानाचार्य खोज अभी से शुरु होगी संशय है।
सद्भावना समिति वरिष्ठ नागरिक फोरम ने अपेक्षा कि है लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ को भविष्य का स्थाई प्रधानाचार्य समय रहते दिए जाने की व्यवस्था प्रदेश सरकार करेगी। इस मेडिकल कॉलेज में डा0 उषा शर्मा के बाद से कुछ अवधि छोड़ अस्थाई प्रधानाचार्य लम्बे अन्तराल तक रहने की व्यवस्था में कॉलेज में गड़बडियों से इसकी शाख गिरी है। अस्थाई प्रधानाचार्य पद पर बनें रहने की कुछ लोगो की चाह से जबरदस्त गुटबाजी चल रही है। जिसमें सरकार द्वारा नई-नई व्यवस्थाओं के किए जाने के बाद भी कॉलेज छात्रों व जनता को उनका लाभ दिलाने में पिछड़ा है। स्वयं मेडिकल छात्र व जूनियरों में अनुशासनहीनता बढ रही है। कॉलेज के पास जिस तरह अतिक्रमण बढ रहा है। वह एक दिन इस कॉलेज के ्रप्रर्यावरण व कानून व्यवस्था के लिए भयकर चुनौती होगा।
व्यवस्था तो एॅडोक्रायोलांजी शिक्षण व चिकित्सा
डा0 गुप्ता की मेरठ वापसी का एक कारण प्रदेश में आगरा के बाद एॅडोक्रायोलाजी चिकित्सा व शिक्षण विषय की व्यवस्था होने व इसके शिक्षण कराने व इस मेडिकल कॉलेज में इसकी चिकित्सा हेतु चिकित्सक की व्यवस्था न होना भी कहा गया है। इस विषय के अध्ययन कर चुके छात्र चिकित्सकों व पढाई करने वाले छात्र चिकित्सकों का कहना है कि इस चिकित्सा अध्ययन व विभाग को नई व्यवस्था पर अभी से ध्यान देना होगा ताकि निकट भविष्य में इनकी सेवानिवृति व अपनी नीजि प्रैक्टिस की चाह के अवरोध से निजात मिल सके।
बेंगलुरु दुनिया में सबसे सस्ता शहर
इकोनोमिक इंटेलीजेंस यूनिट द्वारा तैयार श्वल्र्डवाइट कॉस्ट ऑफ लिविंग रिपोर्ट, २०१५्य के अनुसार, न्यूयार्क को आधार मानकर, १३३ शहरों को शामिल कर, १६० सेवाओंध्उत्पादों की कीमतों को ध्यान में रखकर, यह घोषणा की गई है कि भारत की सूचना प्रौद्योगिकी का केंद्र बेंगलुरु और पाकिस्तान की वित्तीय राजधानी कराची को संयुक्त रूप से १३३ वें स्थान पर रखकर दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में शुमार किया गया है। यहां गुजर-बसर करना काफी सस्ता है। इसके बाद मुंबई को १३० वां, चैन्नई को१२९ वां और नई दिल्ली को १२८ वां स्थान दिया गया है। दुनिया के सबसे महंगे शहरों में सिंगापुर दूसरे वर्ष भी शीर्ष पर है। उसके बाद, पेरिस, ओस्लो, ज्यूरिख और सिडनी का नंबर आता है।
चलना होगा साथ
जम्मू-कश्मीर के विकास पर, चलना होगा साथ
राष्टड्ढ्र के हित में करनी होगी, अब तो सारी बात।
अब आंतकवाद की गंध, न केसर क्यारी में फैले
राष्टड्ढ्र-प्रेम, विश्वास, एकता पर, न हो अब आघात।।
अपने पांव पर आप कुल्हाड़ी मारी, कुछ दीवानो ने।
मानवता को लज्जित कर डाला, ऐसे इंसानों ने।।
इस सुन्दर घाटी का समुचित विकास रुक गया यूं।
बरसों लग जायेगें इसको विकसित कर पाने में।।
राष्टड्ढ्र के हित में करनी होगी, अब तो सारी बात।
अब आंतकवाद की गंध, न केसर क्यारी में फैले
राष्टड्ढ्र-प्रेम, विश्वास, एकता पर, न हो अब आघात।।
अपने पांव पर आप कुल्हाड़ी मारी, कुछ दीवानो ने।
मानवता को लज्जित कर डाला, ऐसे इंसानों ने।।
इस सुन्दर घाटी का समुचित विकास रुक गया यूं।
बरसों लग जायेगें इसको विकसित कर पाने में।।
Subscribe to:
Posts (Atom)