Tuesday, 5 May 2015

अपने लिए आप ही जिम्मेदार हैं जनाब!

सच यह है कि आपके जीवन के लिए आपके सिवा और कोई जिम्मेदार नहीं हो सकता है। अपनी सेहत, अपनी खुशियों, करियर में प्रगति, वित्तीय सुरक्षा, रिश्तों में सकारात्मकता, समय के सदुपयोग और मन की शांति आदि के लिए आप ही जिम्मेदार हैं। जिस दिन आप यह समझ लेंगे, उसी दिन से अपने जीवन में प्रगति की ओर आपके कदम खुद-ब-खुद ही बढ़ जाएंगे। याद रखिए कि आज आप जिन स्थितियों का अनुभव कर रहे हैं, वे सब अतीत में आपने ही चनी थीं। इसमें दूसरों की राय पर आगे बढना भी शामिल  हो सकता है। अगर आप बेहतर परिणाम चाहते हैं, तो आज से ही बेहतर चयन करना सीख लें।
अगर अपको लगता है कि जीवन या कोई स्थिति अपने-आप ही बेहतर में बदलेगी, तो निश्चित मानिए कि आपको निराशा ही हाथ लगेगी। आपको खुद इसके लिए कुछ करना होगा। इसीलिए अपने जीवन में बदलाव लाने की जिम्मेदारी लें। पूरी जिम्मेदारी। अपने जीवन के खुद मालिक बनें। उसका खाका खुद तैयार करें, ताकि वह आपके सपनों, लक्ष्यों और आकांक्षाओं का आईना बन सकें। इसके लिए आज से ही इन तीन बातों को अपनाएं...
दूसरों को दोष देना आज से बंद
बचपन से ही आप अपनी खामियों के लिए किसी दूसरे को दोष देते आए हैं। हालांकि अपने माता-पिता, टीचर, सहकर्मियों, अधिकारियों, सरकार, मौसम किस्मत, सितारे, ग्रह और कुंडली जैसी चीजों पर दोष मढ़कर आपको मिला कुछ नहीं। और न ही कभी मिल सकता है। इन पर आपका नियंत्रण है क्या? आप उस पर ध्यान लगाएं, जिस पर आपका नियंत्रण है- वह हैं आप स्वयं।
अब बस भी करो बहानें
हर बार जब आप किसी असमर्थता के लिए कोई बहाना लगाते हैं, बेहतरी का एक मौका गंवा रहे होते हैं। साथ ही आप एक ढीले-ढीले या अव्यावसायिक नजरिए वाले व्यक्ति की छवि अपने लिए गढ़ते हैं। अधिकतर लोग बहाने इसलिए गढ़ते हैं, क्योंकि उन्हें असफल होने से डर लगता है। पर अगर इस डर का सामना करें तो असफल होने से डर बंद हो जाएगा। आसान स्थितियों के बजाय अपने लिए कुछ चुनौतीपूर्ण चुनने की हिम्मत बंधेगी। जैसे ही आप कुछ चुनौतीपूर्ण अपने हाथ में लेंगे, आपका खुद पर तो विश्वास बढ़ेगा ही, दूसरे भी आप पर विश्वास करेेंगे। इस तरह नए अवसर आप तक पहुंचेंगे।
शिकायत क्यों और किससे?
सच मानिए कि शिकायती शख्सियतें किसी को पसंद नहीं आतीं। शिकायत करने से आपकी और दूसरों की शक्ति भी जाया होती है। यह सच है कि कभी-कभी अपने आक्रोश को अभिव्यक्त करने का मन जरूर करता है। इसके बारे में बात करना एक स्वस्थ तरीका है। या फिर इसकी चर्चा करके इसमें सुधार करने वाले बिंदुओं को पहचानकर उस दिशा में कुछ करना बहुत फायदेमंद है। पर हर वक्त शिकायत करते रहकर आप एक पीडि़त की छवि तैयार करते हैं।
मैंने देखा है कि लोग जैसे ही अपने कर्मों और जीवन की जिम्मेदारी खुद लेना शुरू करते हैं, वे बहुत ऊर्जावान हो जाते हैं, उनमें प्रेरणात्मक नजरिया बढ़ जाता है और संकल्प की दृढ़ता भी बढ़ती है। इसीलिए आज से ही अगले तीस दिनों का लक्ष्य यह बनाएं कि आप किसी को दोष नहीं देंगे, शिकायत नहीं करेंगे और बहाने नहीं बनाएंगे। जब आप अपनी जिम्मेदारी लेना शुरू करेंगे, तो आपको ये सात अनुभव जरूर होंगेरू-
१. आजादी का आनंद रू अपने जीवन में खड़ी चुनौतियों के कारणों और उनके समाधान की खोज जब आप अपने अंदर करेंगे तो आपको एक अलग ही आजादी का अनुभव होगा। आपको महसूस होगा कि आप सोच-समझकर खुद का जीवन खुद ही संवार सकने में समर्थ हैं।
२. स्थायी प्रेरणा रू कठिन समय का सामना करने के लिए हम सबको प्रेरणा की जरूरत होती है। जब आप खुद के भीतर देखते हुए जीना शुरू करेंगे, जब आपको प्रेरणा का कभी खत्म न होने वाला स्त्रोत मिल जाएगा। अंतर्मन से उठने वाली प्रेरणा से जीवन उत्साह और आनंद से भर जाएगा।
३. बेहतर नियंत्रण रू जब आप अपने जीवन की कमान खुद संभालेंगे तो खुद का चयन होगा, खुद के चुने हुए कर्म होंगे, खुद के सीचे निर्णय होंगे। और इन सबसे आप खुद को ज्यादा सामथ्र्यवान और नियंत्रण में अनुभव करेंगे।
४. निजी शक्ति रू यह अनुभव सकारात्मकता का होगा। यह वह भावना है, जिसमें आपको अपने विकास, पालन-पोषण आदि के लिए स्वयं के संपूर्ण होने का एहसास होता है। यह भावना लक्ष्य तक पहुंचाने में ईधन का काम करती है।
५. नयेपन का आगाज रू जब आप मन से शांत होते हैं, आजाद होते हैं और नए विचारों के लिए मन खुला रखे होते हैं, तो जीवन में कई श्अरे वाह्य कहने वाले मौके आते हैं। खुद की जिम्मेदारी खुद लेने की प्रक्रिया में हर दिन आपका अपनी रचनात्मकता के प्रति आत्मविश्वास बढ़ता है।
६. नजरिए का विस्तार रू अब तक आपको अपने अनुभवों की सीखों से ही काम लेना आता है, जबकि कई अन्य तरीके भी संसार से भरे पड़े हैं। जब आप उनके प्रति खुलेंगे तो सोच का दायरा भी बढ़ेगा।
७. मन की शांति रू यह तो हर किसी को चाहिए। जब आप शिकायत व बहानों का सहारा लेते हैं तो नकारात्मकता से खुद को जला रहे होते हैं।
इससे उलझनें बढ़ती हैं। जब खुद की जिम्मेदारी खुद लेना शुरू करते हैं, तो श्क्या हुआ, किसने किया्य जैसे प्रश्नों में फंसने के बजाय श्आगे क्या करना है्य सोचते हैं।
कुछ बातों पर विचार करें
२ अगर आप शिकायत करना या बहाने बनाना छोड़ दें तो अपने बारे में क्या राय बनेगी और कैसा महसूस होगा?
      -आगामी अंक में जारी....
२ अपने जीवन की हर चीज के लिए खुद जिम्मेदारी लेने पर क्या होगा? इससे आपको फायदा कैसे होगा?
२ इस आदत को विकसित करने और उसे बनाए रखने के लिए आपको क्या करना होगा?

Monday, 4 May 2015

रेल सफर में तत्काल मदद को हैल्पलाइन

राजकीय रेलवे पुलिस ने ३ मार्च को निम्नलिखित हैल्पलाइन सेवा का शुभारंभ किया है, जिसके जरिये उत्तर प्रदेश राज्य की सीमा के अंदर रेल सफर में यात्री चोरी, लूट, डकैती, मारपीट, छेड़खानी, हत्या, जहरखुरानी जैसे मुश्किल हालात में डायल कर शिकायत दर्ज करा कर मदद ले सकते हैंरू-  हैल्पलाइनरू १५१२

स्टेशन आने से पहले जगाएगी अलर्ट सुविधा

ट्रेन में रात के समय सफर करने वाले बहुत से यात्रियों को गंतव्य स्टेशन आने से पहले उठने में काफी परेशानी होती है। कई बार तो आंख न खुल पाने से ट्रेन आगे निकल जाती है और उन्हें वापस आने में बहुत दिक्कत झेलनी पड़ती है। इस परेशानी का निराकरण करने के लिए रेलवे ने १३९ पर फोन कर वेकअॅप कॉल-डेस्टिनेशन alert  की निम्नलिखित नई सुविधा कुछ ही दिन पहले शुरू की है। इससे गंतव्य स्टेशन आने से पहले ही मोबाइल पर अलार्म बज उठेगा
पहले alert  टाइप करें, फिर PNR Number टाइप करें, फिर १३९ पर Send करें और इसके बाद PNR Number एक्टिवेट हो जाएगा।    

‘आप’ के ट्रैक पर देर से दौड़ेगी की बजट की गाड़ी

आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली का बजट पेश करने में किसी तरह की हड़बड़ी के मूड में नहीं है। दिल्ली डॉयलॉग कमीशन की टास्क फोर्स गठित होने और उसकी सिफारिश आने का इंतजार किया जाएगा।
जिन 10 विधान सभा में जनता के सुझाव से बजट का प्रावधान किया जाना हैए वह प्रक्रिया भी इस दौरान पूरी की जाएगी। हालांकि लेखानुदान से सरकार खर्चों में कटौती की शुरुआत कर सकती है। दिल्ली सरकार का बजट 37 हजार करोड़ रुपये का है। वित्त वर्ष में लोकसभा और विस का चुनाव आने से बेशक प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पाए, खर्चे कम हुए लेकिन वसूली में 4300 करोड़ रुपये की कमी हुई। अधिकारी बता रहे हैं कि लेखानुदान में कटौती बहुत जरूरी है। लेखानुदान इसलिए लेना है ताकि कर्मियों के वेतन व अन्य खर्चों की व्यवस्था की जा सके। सूत्र बताते हैं कि लेखानुदान तीन महीने का लिया जाएगा। इसके लिए विस का सत्र मार्च के अंतिम सप्ताह में दो दिन का होगा। इसकी तैयारी योजना व वित्त विभाग के अधिकारियों ने शुरू भी कर दी है।
सरकार का पूर्ण बजट मई में आएगा। तब तक दिल्ली डॉयलॉग कमीशन में दिए गए मोबाइल पर सरकार, वाई-फाई और सीसीटीवी वाली दिल्ली, अनधिकृत कॉलोनी नियमन, झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास, जॉब और जॉब सिक्योरिटी जैसे विषयों को दिल्ली के पूर्ण बजट में शामिल किए जाने की तैयारी है।

यह पब्लिक है सब जानती है

भाजपा के रणनीतिकार आप को बहुत हल्के में लेते हुए मान रहे थे कि मोदी की सदाबाहर लोक प्रियता के बूते पार्टी लगातार राज्यों के विधानसभा चुनाव जीतती रहेगी। अहंकार के चलते नेतृत्व ने मान लिया था कि मोदी के राजनीतिक व्यक्तित्व के सामने कोई चुनौती नही है लेकिन भारतीय मतदाता जानते है कि राजनेताओ को है लेकिन भारतीय मतदाता जानते है कि राजनेताओ को कब वास्तविकता से अवगत कराया जाये। प्रधानमंत्री ने दिल्ली के विधानसभा चुनाव को अपने व्यक्तित्व पर जनमत बना दिया था, मतदाताओ ने उन्हे दो टूक आभास करा दिया कि उन्होने मतदाताओं के समर्थन का गलत अनुमान लगाया था।
लोकतंत्र में शासक जनता है जनप्रतिनिधि सेवक है। उन्हें जनता का दिल जीतने के लिये जनहित में योजनाएं बनाना उन्हे कार्यन्वित करना होगा। क्योकि यह पब्लिक है, सब जानती है।

मेरठ मेडिकल कॉलेज में स्थायी प्रधानाचार्य

मेरठ। प्रदेश के कुछ मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल काउंसिल आफ इडिया के द्वारा नियत मानकों के पूरा न होने तथा प्रदेश सरकार प्रमुख उपलब्धियों में एक सहारनपुर मेडिकल कॉलेज का अभी तक विघिवत कार्य की शुरुआत न होने व समूह श्ग्य की भर्तियों को कार्य न होने पर मुख्यमन्त्री की नाराजगी प्रदेश के स्वास्थय यहा निदेशक  शिक्षा डा0 के.के. गुप्ता को भारी पड़ी। डा0 गुप्ता को इस पद से हटा कर वापस मेरठ मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य के दायित्व निर्वहन के लिए भेजा गया है। इस वापसी को डा0 गुप्ता की पदावत कहां जा रहा है। इसके विपरीत इसे उनकी इच्छा भी कह रहे है ताकि वह अपनी गडबड निजी प्रैक्टिस को रास्ते पर ला सके।
डा0 गुप्ता द्वारा तत्काल प्रधानाचार्य का दायित्व सम्भाल लिया गया। डा0 गुप्ता के स्थान पर स्वास्थय महानिदेशक शिक्षा पद मुख्यमन्त्री द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्र कन्नौज के मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य वी.एन. त्रिपाठी को दिया गया ताकि प्रदेश में बढ़ रहे स्वाइन फ्लू की चुनौती में यह बदलाव से असफलता के असर को प्रभावहीन करने का प्रयास किया।
डा0 गुप्ता को वापस मेरठ मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य का दायित्व देने के लिए दलील इस कॉलेज में एडोक्रायोनोलॉजी विभाग होने व उसके दायित्व को के स्थान पर गत ढाई वर्ष से व्यवस्था न होने पर एमसीआई द्वारा आपत्ति करना बताया जा रहा है। डॉ0 गुप्ता अगले वर्ष सेवानिवृत्ति पूरी कर रहे है। इसके बाद यह शिक्षण कार्य सरकार की चिकित्सा शिक्षक उम्र बढाने के लाभ के अन्तर्गत कार्य कर सकेगें, परन्तु प्रधानाचार्य नियमित की जरुरत अगले वर्ष होगी। इसके लिए स्थाई प्रधानाचार्य खोज अभी से शुरु होगी संशय है।
सद्भावना समिति वरिष्ठ नागरिक फोरम ने अपेक्षा कि है लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ को भविष्य का स्थाई प्रधानाचार्य समय रहते दिए जाने की व्यवस्था प्रदेश सरकार करेगी। इस मेडिकल कॉलेज में डा0 उषा शर्मा के बाद से कुछ अवधि छोड़ अस्थाई प्रधानाचार्य लम्बे अन्तराल तक रहने की व्यवस्था में कॉलेज में गड़बडियों से इसकी शाख गिरी है। अस्थाई प्रधानाचार्य पद पर बनें रहने की कुछ लोगो की चाह से जबरदस्त गुटबाजी चल रही है। जिसमें सरकार द्वारा नई-नई व्यवस्थाओं के किए जाने के बाद भी कॉलेज छात्रों व जनता को उनका लाभ दिलाने में पिछड़ा है। स्वयं मेडिकल छात्र व जूनियरों में अनुशासनहीनता बढ रही है। कॉलेज के पास जिस तरह अतिक्रमण बढ रहा है। वह एक दिन इस कॉलेज के ्रप्रर्यावरण व कानून व्यवस्था के लिए भयकर चुनौती होगा।
व्यवस्था तो एॅडोक्रायोलांजी शिक्षण व चिकित्सा
डा0 गुप्ता की मेरठ वापसी का एक कारण प्रदेश में आगरा के बाद एॅडोक्रायोलाजी चिकित्सा व शिक्षण विषय की व्यवस्था होने व इसके शिक्षण कराने व इस मेडिकल कॉलेज में इसकी चिकित्सा हेतु चिकित्सक की व्यवस्था न होना भी कहा गया है। इस विषय के अध्ययन कर चुके छात्र चिकित्सकों व पढाई करने वाले छात्र चिकित्सकों का कहना है कि इस चिकित्सा अध्ययन व विभाग को नई व्यवस्था पर अभी से ध्यान देना होगा ताकि निकट भविष्य में इनकी सेवानिवृति व अपनी नीजि प्रैक्टिस की चाह के अवरोध से निजात मिल सके।

बेंगलुरु दुनिया में सबसे सस्ता शहर


इकोनोमिक इंटेलीजेंस यूनिट द्वारा तैयार श्वल्र्डवाइट कॉस्ट ऑफ लिविंग रिपोर्ट, २०१५्य के अनुसार, न्यूयार्क को आधार मानकर, १३३ शहरों को शामिल कर, १६० सेवाओंध्उत्पादों की कीमतों को ध्यान में रखकर, यह घोषणा की गई है कि भारत की सूचना प्रौद्योगिकी का केंद्र बेंगलुरु और पाकिस्तान की वित्तीय राजधानी कराची को संयुक्त रूप से १३३ वें स्थान पर रखकर दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में शुमार किया गया है। यहां गुजर-बसर करना काफी सस्ता है। इसके बाद मुंबई को १३० वां, चैन्नई को१२९ वां और नई दिल्ली को १२८ वां स्थान दिया गया है। दुनिया के सबसे महंगे शहरों में सिंगापुर दूसरे वर्ष भी शीर्ष पर है। उसके बाद, पेरिस, ओस्लो, ज्यूरिख और सिडनी का नंबर आता है।