Tuesday, 28 April 2015

नदियों की रेत से फूट सकती हैं प्रलय की लहरें

भूकंप का झटका जलप्रलय का भी कारण बन सकता है। जोन चार में शुमार मेरठ समेत देश की दर्जनभर शहर नदियों में समा सकते हैं। वैज्ञानिक रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप की वजह से नदियों पर धारा बदलने का खतरा है। नदियों के बेसिन क्षेत्र में नीचे की मिट्टी नाजुक एवं रेतीली जमीन से पानी का सैलाब फूट सकता है। एनसीआर क्षेत्र में अगले 50 वर्ष के अंदर भयावह भूकंप के संकेत हैं। रेतीली जमीन के बीच से अगर पृथ्वी की ऊर्जा निकली तो वह तबाही का कारण बनेगी। नदियों की बेसिन में बसे शहर जलमग्न हो सकते हैं।

भूगर्भशास्त्र के मुताबिक उत्तर प्रदेश गंगेटिक प्लेन में बसा हुआ है। यह चार शेल्फ एरिया में बंटा है। सभी चार शेल्फ एरिया एक दूसरे से उभारों के साथ मिले हुए हैं। इनमें होने वाली कोई भी हलचल क्षेत्र में बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। इंडियन प्लेट धीरे-धीरे यूरेशियन प्लेट के नीचे खिसक रही हैं, जिससे हिमालय हर वर्ष पांच मिमी उठ रहा है। पृथ्वी के अंदर टकराने वाली प्लेटों की मोटाई पचास से सौ किमी तक आंकी गई है, जिनके आपस में टकराने की वजह से भारी पैमाने पर ऊर्जा रिलीज होती है। यही ऊर्जा जिस भी क्षेत्र से निकलेगी, वहां भयावह नुकसान होगा। अगर यह क्षेत्र बेसिन हुआ तो नदियां धाराएं बदलकर शहरों में घुस जाएंगी। नदियों की रेतीली जमीन से पानी फटकर ऊपर आ सकता है। बनारस हिन्दू विवि, इलाहाबाद विवि एवं आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के मुताबिक नई दिल्ली, श्रीनगर, जम्मू, अमृतसर, मेरठ, जालंधर, बरेली, बनारस एवं कानपुर जैसे शहर जलप्रलय की भेंट चढ़ सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक मेरठ और भुज की स्थितियों में जबरदस्त समानता है। भुज साबरमती की बेसिन में होने की वजह से उसके नीचे की मिटटी अत्यंत मुलायम है। इसी प्रकार मेरठ समेत पश्चिमी उप्र -गंगा जमुना की बेसिन में है,और यहां भी जमीन के नीचे की मिट्टी बेहद मुलायम है। उच्च तीव्रता का भूकंप आने की स्थिति में नीचे की नाजुक मिट्टी खिसक जाएगी, और जमीन के अंदर का जलभंडार पूरी तरह ऊपर आ जाएगा। इसमें बड़े पैमाने पर मानव आबादी भी जमीन में समा सकती है

कूड़े से अटा शहर, हाईकोर्ट में चमन बना देने का दावा

हड़ताल समाप्त होने के बाद सफाईकर्मियों ने सोमवार से शहर की सफाई का कार्य शुरू किया। पहले दिन शाम तक लगभग 900 टन कूड़ा उठाया गया, लेकिन फिर भी शहर दस फीसदी भी साफ नहीं हो सका।

मेरठ शहर में 11 दिन की हड़ताल के बाद सोमवार से सफाई कर्मियों ने सफाई कार्य शुरू किया। पहले दिन अधिकांश कर्मचारी अपनी बीट पर पहुंच गए तथा दोपहर तक सफाई की। नगर निगम के तीनों डिपो से सभी गाड़ियां निकली तथा शाम पांच बजे तक दौड़ी। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह ने बताया कि पहले दिन शहर में 900 टन कूड़ा उठाया गया। जबकि रोजाना 600 टन कूड़ा निगम की गाड़ियां उठाती हैं। उन्होंने बताया कि शहर को साफ करने में अभी लगभग दो से तीन दिन का समय लगेगा। शहर में अभी कूड़े के ढेर लगे हैं। सोमवार से सफाई कार्य शुरू हुआ है। खुद निगम अफसरों का कहना है कि शहर के हालात सामान्य करने में अभी दो से तीन दिन का समय लगेगा। वहीं तमाम सच्चाई को झुठलाते हुए प्रमुख सचिव नगर विकास, जिलाधिकारी व नगर आयुक्त तीनों पक्षकारों की ओर से सोमवार को नगर आयुक्त एस के दुबे द्वारा हाईकोर्ट में अनुपालन आख्या जमा कराई। दरअसल, 21 अप्रैल को मेरठ शहर में हड़ताल तथा उससे बने महामारी फैलने के हालात के खिलाफ दायर जनहित याचिका में सुनवाई करके मुख्य न्यायाधीश ने उक्त तीनों अधिकारियों को 48 घंटे में शहर साफ करके तथा जनता के संकट का समाधान करके रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। उसी आदेश की अनुपालन आख्या में नगर आयुक्त ने 11 दिन तक चली हड़ताल का जिक्र तक नहीं किया। वहीं, उन्होंने कोर्ट के सामने दावा किया कि पूरे शहर में सफाई कराकर चूना और फिनायल का छिड़काव करा दिया गया है। रिपोर्ट में दावा किया है कि कोर्ट के आदेश का पूर्णतया पालन करा दिया गया है। नगर आयुक्त के इस दावे से याचिकाकर्ता लोकेश खुराना नाराज हैं। उन्होंने कहा है कि अफसरों के इस सफेद झूठ की पोल कोर्ट में खोली जाएगी।

सफाई न हो तो यहां शिकायत करें

नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह ने शहर की जनता से कूड़ा डलावघर में डालने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में सफाई नहीं होती है तो शहर की जनता नगर निगम के नंबर 0121-2515133, नगर आयुक्त कैंप ऑफिस के नंबर 0121-2660045 पर अथवा नगर स्वास्थ्य अधिकारी के मोबाइल नंबर 9412700550 पर शिकायत दर्ज करा सकती है।

प्रेम सिंह के समर्थन में आए मनोनीत पार्षद

सफाई कर्मचारी जहां नवनियुक्त नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह को हटाने की मांग कर रहे हैं वहीं डा. प्रेम सिंह के समर्थन में नगर निगम के मनोनीत पार्षद उतर आए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, नगर विकास मंत्री आजम खां को पत्र भेजकर डा. प्रेम सिंह को न हटाने की मांग की है। पत्र में अफजाल सैफी, नरेश मलिक, राजीव शर्मा, नरेंद्र यादव, रामदत्त शर्मा, ज्योत्सना गुर्जर, आस मोहम्मद, सुनीता सिंह, अनीता राणा आदि मनोनीत पार्षदों के हस्ताक्षर हैं।

Monday, 27 April 2015

नेपाली तबाही कुछ कहती है

धरती डोली। एक नहीं, कई झटके आए। नेपाल में तबाही हुई। दुनिया की सबसे ऊँची चोटी - माउंट एवरेस्ट को जीतने निकले 18 पर्वतारोहियों को मौत ने खुद जीत लिया। जैसे-जैसे प्रशासन और मीडिया की पहुँच बढ़ती गई, मौतों का आँकड़ा बढ़ता गया। इसका कुछ दर्द तिब्बत, असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश ने भी झेला। दहशत में रात, दिल्लीवासियों ने भी गुजारी। जरूरी है कि हम सभी इससे दुखी हों। यमन की तरह, नेपाल के मोर्चे पर भारत सरकार मुस्तैद दिखी।
इस बार आपदा प्रबन्धन निगरानी की कमान, हमारे प्रधानमन्त्री जी ने खुद सम्भाली। एयरटेल ने नेपाल में फोन करना मुफ्त किया। बीएसएनएल ने तीन दिन के लिये नेपाल कॉल रेट, लोकल किया। स्वामी रामदेव बाल-बाल बचे। सोशल मीडिया पर लोगों ने सभी की सलामती के लिये दुआ माँगी। मीडिया ने भी जानकारी और दुआओं के लिये अपना दिल खोल दिया।

14 साल से कम उम्र के बच्चे भी कर सकेंगे काम

सरकार बाल मजदूरी में संशोधन की तैयारी कर रही है। ऐसी खबर है कि संसद के चालू सत्र में सरकार बाल मजदूरी रोकथाम अधिनियम में जो संशोधन प्रस्तावित है उसे पास कराना चाहती है।
इस संशोधन में प्रावधान है कि 14 साल से कम उम्र के बच्चे को भी उसके पारिवारिक कारोबार में काम करने की अनुमति दी जाएगी बशर्ते कि उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो। इसमें प्रावधान है कि अगर बाल स्कूल से आने के बाद या छुट्टियों के दौरान या तकनीकी संस्थान से लौटने के बाद अपने परिवार की खेतों, वनों या घर पर होने वाले किसी काम में सहायता करता है तो प्रतिबंध उन पर लागू नहीं होगा लेकिन 14 से 18 साल की उम्र के बच्चों को खतरनाक उद्योगों में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। श्रम मंत्रालय के अनुसार पारिवारिक कारोबार को छोड़कर बड़े या अन्य छोटे संगठनों में बाल मजदूरी के मौजूदा प्रावधान लागू रहेंगे। शीघ्र ही इससे संबंधित विधेयक को संसद में पेश किया जाएगा।

IB अलर्ट, दिल्‍ली में ड्रोन से हमला कर सकते हैं आतंकी!

दिल्ली में एक बार फिर आतंकी हमले को लेकर खुफिया ब्‍यूरो (आईबी) ने दिल्ली पुलिस को चेताया है। आईबी का कहना है कि दिल्ली शहर में ड्रोन के जरिए हमले का खतरा है। इसलिए दिल्ली पुलिस को जारी चेतावनी में खुफिया एजेंसी ने ड्रोन उड़ाने वाले व्यक्तियों पर नजर रखने को कहा है।
आईबी की इस चेतावनी के बाद अब दिल्ली पुलिस के डीसीपी स्तर के अफसर ड्रोन उड़ाने वालों पर नजर रखेंगे। वहीं, मुंबई हमले के मास्टर माइंड व लश्कर आतंकी जकीउर रहमान लखवी के पिछले दिनों पाकिस्तान की जेल से रिहा होने के बाद खुफियां एजेंसियां विशेष सर्तकता बरत रही हैं, ताकि ऐसी किसी भी योजना को विफल किया जा सके।

दुनिया में अमर रहने वाला व्यक्ति हो चुका है पैदा: साइंटिस्ट का दावा

एक ऐसा व्यक्ति जो कभी भी मरे नहीं और सभी बीमारियों से मुक्त हो, क्या संभव है? और हां, अगर यह संभव है तो उसे अमर ही माना जाएगा। हाल ही में लंदन स्थित कैंब्रिज यूनिनर्सिटी के एक साइंटिस्ट ने दावा किया है कि ऐसे ही अमर व्यक्ति का जन्म हो चुका है । जेरॉन्टोलॉजिस्ट (उम्र के बारे में सभी पहलुओं से अध्ययन करने वाला) वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत औब्रे डी ग्रे का कहना है कि अगर लोग यह सवाल करते हैं कि क्या दुनिया में किसी ऐसे व्यक्ति का अस्तित्व संभव है जो काफी वर्षों से जिंदा हो और उसे किसी भी तरह की बीमारी न हो, तो उन्हें मेरा जवाब होगा कि ऐसी संभावना बहुत ज्यादा है कि ऐसा व्यक्ति जिंदा है।
कैलिफॉर्निया स्थित स्ट्रैटजी फॉर इंजीनियर्ड नेग्लिजिबल सिनेसेंस (एसईएनएस) रिसर्च फाउंडेशन के को-फाउंडर डी ग्रे ने कहा कि इसकी 80 फीसदी से ज्यादा संभावना है कि ऐसे लोग हैं। उन्होंने कहा कि अमरत्व एक जिंदा शब्द है और इस शब्द का इस्तेमाल करना गलत नहीं है। डी ग्रे के मुताबिक, अमरत्व का मतलब होता है किसी भी बीमारी से पूरी तरह सुरक्षा। इसके कारण किसी भी व्यक्ति की बढ़ती उम्र का उसके स्वास्थय पर असर नहीं पड़ता है और वह मौत की वजहों को दरकिनार करता रहता है।

9000 एनजीओ के पंजीकरण निरस्त

विदेश से चंदा लेने वाले गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर एक और कड़ी कार्रवाई की गई है। इसी क्रम में सरकार ने विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) का उल्लंघन करने वाली 8,975 गैर सरकारी संगठनों के पंजीकरण रद कर दिए हैं।
गृह मंत्रालय ने अपने एक आदेश में कहा है कि साल 2009-10, 2010-11 और 2011-12 के लिए सालाना रिटर्न नहीं भरने वाले 10,343 एनजीओ को नोटिस जारी किए गए थे। गत वर्ष 16 अक्टूबर को जारी किए गए इन नोटिसों में कहा गया था कि वे एक माह के भीतर अपने-अपने सालाना रिटर्न दाखिल करें। इसमें उन्हें यह भी बताना था कि विदेश से उन्हें कितना चंदा मिला, चंदे का स्रोत और इसे लेने के पीछे उद्देश्य क्या था। साथ ही यह जानकारी भी देनी थी कि एनजीओ ने इस चंदे का क्या उपयोग किया।
रविवार को गृह मंत्रालय से जारी अधिसूचना के अनुसार, 10,343 एनजीओ में से महज 229 ने ही अब तक जवाब दिए हैं। इससे पहले, सरकार ग्रीनपीस इंडिया का एफसीआरए लाइसेंस निरस्त कर चुकी है। साथ ही कथित रूप से कई कानूनों का उल्लंघन करने पर उसके सात बैंकों के खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। गत सप्ताह सरकार ने अपने आदेश में कहा था कि कोई भी बैंक, गृह मंत्रालय से आवश्यक अनुमति लिए बगैर, अमेरिका की फोर्ड फाउंडेशन से प्राप्त होने वाली किसी भी राशि को, किसी भी भारतीय एनजीओ के खाते में जारी नहीं करे।