Sunday, 26 April 2015

नेपाल में जली सैकड़ों अर्थियां, जहां जगह मिली लोगों ने वहीं किया अंतिम संस्कार

नेपाल में शोकाकुल परिवारों ने भूकंप में जान गंवाने वाले अपने प्रियजनों का रविवार को यहां के सुप्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर के पास अंतिम संस्कार किया। भ्रमपूर्ण स्थिति और भीड़भाड़ के बीच अंत्येष्टि संपन्न हुई। शवों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि खाली भूखंड काफी बड़ा होने के बावजूद रिश्तेदार मृतकों का अंतिम संस्कार करने के लिए जगह को लेकर एक दूसरे से धक्का-मुक्की करते देखे गए। पर्याप्त जगह न मिलने पर सैकड़ों लोगों को निश्चित स्थान के बाहर अपनों का अंतिम संस्कर करना पड़ा।

रिक्टर पैमाने पर 7.9 तीव्रता के भूकंप से शनिवार को 2,300 लोगों की मौत की आधिकारिक घोषणा की गई। सरकार ने कहा है कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। ज्यादातर मौत काठमांडू घाटी और उसके आस-पास के इलाकों में हुई है। इसी वजह से भगवान शिव के इस एतिहासिक मंदिर के पास स्थित श्मशान स्थल पर अपनों का अंतिम संस्कार करने के लिए लोगों की भारी भीड़ है।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, ‘‘रविवार को बहुत कम समय में 100 से अधिक लोगों का अंतिम संस्कार किया गया। लोगों को जहां भी जगह मिल जा रही है वहां पर वे अपनों का अंतिम संस्कार कर रहे है वह भी उचित रस्मों को पूरा किए बिना।’’ सैकड़ों लोग अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए चक्करदार कतार में खड़े थे। नेपाल की कुल जनसंख्या 2.9 करोड़ है जिसमें 80 फीसदी आबादी हिंदुओं की है। वहीं 10 फीसदी आबादी बौद्धों की है।

साइकिल के पंप से लौटा दी पिता की सांसें

बीकानेर से 180 किमी दूर केडब्ल्यूएस गांव। रात का वक्त। अचानक 62 साल के मनीराम को अस्थमा का दौरा पड़ा। सांसें उखड़नें लगीं तो परिजनों ने दवा दी, लेकिन वह बेअसर रही। शहर जाने का भी कोई साधन नहीं, गांव से बीकानेर जाने के लिए सिर्फ एक बस चलती है, वह भी दिन में। पिता को कष्ट में देखा तो अचानक बेटे सुभाष को कुछ सूझा, वह घर में रखा साइकिल में हवा भरने का पंप उठा लाया। पिता के मुंह पर मास्क लगाया। मास्क की नली को पंप से जोड़ा। दवाई डाली और हवा भरने लगा।
दवा भाप बनकर जैसे ही फेफड़ाें तक पहुंची, पिता की सांसें सध गईं। अगले दिन डॉक्टर को दिखाया तो वह भी सुभाष का ‘इनोवेशन’ देख हैरान रह गए। डॉक्टरों का कहना है-भले ही सुभाष का बनाया डिवाइस प्रामाणिक न हो, लेकिन यह प्रभावी जरूर है। इसी वजह से मनीराम बच पाए। अब अस्पताल में भी डॉक्टरों की निगरानी में इसी पंप के जरिए मनीराम को दवा दी जा रही है।
डॉक्टर बोले- यह इनोवेटिव है- सस्ता भी, कंपनियों को शोध के लिए लिखेंगे
हम इसे प्रामाणिक डिवाइस तो नहीं मान सकते लेकिन यह प्रभावी है, इनोवेटिव भी। अभी एक्सपेरिमेंटल तौर अपनी देखरेख में इसका उपयोग करने की इजाजत दे रहे हैं। कोई दिक्कतें भी होगी तो वे सामने आ जाएगी। अभी तक नतीजे अच्छे हैं। नेबुलाइजर कंपनियों से संपर्क कर कहेंगे, इस तरह की सस्ती और सब जगह उपयोग हो सकने वाली डिवाइस बनाएं।
-डा.गुंजन सोनी, एसोसिएट प्रोफेसर एवं कार्यवाहक विभागाध्यक्ष श्वसन रोग विभाग, एसपी मेडिकल कॉलेज, बीकानेर
बेटे ने कहा- मैंने तो वैसे ही किया जैसा देखा था
सिर्फ 5वीं पास 23 साल के सुभाष ने कहा-मैं तो बस इतना जानता हूं कि मेरे पिताजी बीमार थे। डाॅक्टर ने कहा था- जब दौरे जैसी हालत हो तो भाप बनाने वाली मशीन में दवाई डालकर उसे सांस के जरिये फेफड़ों तक पहुंचाना। पिताजी पहले हॉस्पिटल में भर्ती थे, मैंने वहीं पर मशीन देखी थी। बस, उसी के बारे में सोचता रहा और पंप से जोड़कर नेबुलाइजर बना दिया।
कंपनियां 1000 रु. में देती हैं, 5वीं पास किसान ने सिर्फ डेढ़ सौ में बना दिया
अमूमन अच्छी क्वालिटी के नेबुलाइजर की कीमत बाजार में एक हजार रुपए तक होती है। 5वीं पास 23 साल के सुभाष ने सिर्फ डेढ़ सौ रु. में नेबुलाइजर जैसा डिवाइस तैयार कर दिया। यह दवा को भाप के रूप में फेफड़ों तक पहुंचाता है। अस्थमा और सांस से जुड़ी दूसरी बीमारियों में काम आता है।

सपेरे के पास मिला 31 किलो का किंग कोबरा

कोटा. वन विभाग ने मंडाना क्षेत्र से अलवर निवासी एक सपेरे से 13 फीट लंबा किंग कोबरा पकड़ा है। कोटा में पहली बार वन विभाग ने शिड्यूल वन में इस संरक्षित सांप सहित सपेरे को गिरफ्तार किया है, लेकिन राजस्थान के किसी भी स्नेक पार्क में इतने बड़े सांप को रखने की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते इसे अहमदाबाद या दिल्ली भेजा जाएगा।
सांप को लाडपुरा रेंज में विशेष बंदोबस्त के साथ रखवाया है। शनिवार को मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के एसीएफ राजीव कपूर की सूचना पर वन विभाग के रेंजर दीपक गुप्ता जाब्ते सहित केवलनगर से सांप का खेल दिखा रहे अलवर निवासी नवलनाथ को गिरफ्तार किया है।
31 किलो वजन, 16 हजार में खरीदा था
अधिकारियों ने बताया कि नागराज 31 किलो 700 ग्राम वजनी है। इसे 16 हजार रुपए में खरीदा गया था। यह 500 ग्राम बकरे का मीट खाता है। सामान्यतया दक्षिण पूर्व एशिया में यह सांप मिलता है। यह एशिया के सबसे बड़े खतरनाक सांपों में से एक है।
पालतू होने से स्नेक पार्क में रखना होगा
सांप को रिलीज करने के लिए चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन से परामर्श मांगा है। उच्चाधिकारियों ने कोर्ट के आदेश के अनुसार ही इसे रिलीज करने के निर्देश दिए। अफसरों ने बताया कि यह पालतू होने से इसे जंगल में छोड़ नहीं सकते। प्रदेश के चिड़ियाघरों में भी संपर्क किया, लेकिन हर जगह से कहा गया कि इसको रखने की व्यवस्था नहीं है।
सपेरे के पास मिला 31 किलो का किंग कोबरा
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जेसिका लाल के हत्यारे मनु शर्मा ने की शादी


नई दिल्ली. मॉडल जेसिका लाल की हत्या मामले में उम्र कैद काट रहे मनु शर्मा उर्फ सिद्धार्थ वशिष्ठ ने मुंबई की एक लड़की से शादी कर ली है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक ‘फरलो’ पर दो हफ्ते के लिए जेल से बाहर आए 37 साल के मनु की शादी 22 अप्रैल को चंडीगढ़ में हुई। शादी के मौके पर केवल परिवार के करीबी लोगों को ही बुलाया गया था।
पिता ने नहीं दी जानकारी

शादी के बारे में पूछे जाने पर मनु के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा ने यह कहते हुए टिप्पणी से इनकार कर दिया कि यह ‘मनु के निजी जीवन का हिस्सा’ है। सूत्रों के अनुसार, मनु और इस लड़की का परिचय 10 साल पुराना है, लेकिन साल 2006 में मनु को दिल्ली हाईकोर्ट ने जेसिका लाल मर्डर केस में दोषी करार दिया और यह शादी टल गई। इसके बाद साल 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने भी मनु की सजा को बहाल रखा।
तिहाड़ ने की ‘फरलो’ की पुष्टि

तिहाड़ जेल के एक अधिकारी ने मनु को ‘फरलो’ की पुष्टि करते हुए साफ किया कि वह पैरोल पर नहीं है जिसमें कानूनी प्रतिबंध होते हैं। हालांकि, इस अधिकारी ने यह नहीं बताया कि मनु को ‘फरलो’ किन आधारों पर दिया गया। इस साल की शुरुआत में मनु ने जेल से ही अपना पोस्ट ग्रैजुएशन पूरा किया है।
क्या है ‘फरलो’
फरलो का मतलब जेल से मिलने वाली छुट्‌टी से है। यह पारिवारिक, व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए दी जाती है।
- एक साल में कैदी तीन बार फरलो ले सकता है, लेकिन इसकी कुल अवधि 7 सप्ताह से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ठोस कारणों की स्थिति में फरलो 120 दिन के लिए मंजूर की जा सकती है।
- यह भी जरूरी है कि कैदी ने इससे पहले तीन साल की सजा पूरी कर ली हो और जेल में उसका बर्ताव अच्छा हो। इसकी मंजूरी जेल विभाग के महानिदेशक देते हैं।
क्या है जेसिका लाल हत्याकांड

मॉडल जेसिका लाल की 29 अप्रैल 1999 को मनु शर्मा ने उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी थी, जब दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके में कुतुब कोलोनाडे में सोशलाइट बीना रमानी के स्वामित्व वाले टैमरिंड कोर्ट में उसने उसे शराब परोसने से मना कर दिया था। इस मामले में निचली अदालत ने फरवरी 2006 में उसे बरी कर दिया था। इसके बाद देशभर में गुस्से की लहर फैल गई थी। बाद में हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए केस को फिर से खोला और कानूनी प्रक्रिया के बाद मनु शर्मा को हत्या का दोषी पाया। सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी सजा पर मुहर लगा दी।

भारत के सामने भी खतरा

 नेपाल में शनिवार को आए 7.9 तीव्रता वाले विनाशकारी भूकंप के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि अब उत्तर भारत में भी इतनी ही तीव्रता का भूकंप आ सकता है। अहमदाबाद स्थित भूकंप अनुसंधान संस्थान का कहना है कि कश्मीर, हिमाचल, पंजाब और उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में यह भूकंप आज या आज से 50 साल बाद भी आ सकता है। इन क्षेत्रों में सिस्मिक गैप की पहचान हो चुकी है जिसके कारण भूकंप आता है। 2000 किलोमीटर लंबी हिमालय श्रंखला के हर 100 किलोमीटर के क्षेत्र में उच्च तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, दिल्ली में शनिवार को छह तीव्रता वाला भूकंप आया था, जो 10 किलोमीटर गहरा था और भूकंप का झटका करीब एक मिनट तक आया। आईएमडी के वैज्ञानिक पी.आर. वैद्य ने कहा कि नेपाल अल्पाइन-पट्टी पर पड़ता है, जो धरती की सतह पर मौजूद तीन भूकंपीय पट्टियों में से एक है और इस क्षेत्र में दुनिया का 10 फीसदी भूकंप आता है।

रिक्टर स्केल पर तीव्रता को साधारण तौर पर कैसे समझें

भूकंप की तीव्रता अलग-अलग होती है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि अगर भूकंप आए तो आप सामान्य तरीके से कैसे समझ सकते हैं कि भूकंप कितना खतरनाक है।
0-1.9: केवल सीस्मोग्राफ से ही पता चलता है।
2-2.9: मामूली कंपन ही होता है, जो कई बार तो पता ही नहीं चलता।
3-3.9: कोई भारी वाहन पुल से निकले तो इतना कंपन होता है।
4-4.9: कांच की खिड़कियां चटक सकती है, दीवार से फ्रेम भी गिर सकते हैं।
5-5.9: भारी फर्नीचर और चीजें हिल सकती हैं।
6-6.9: इमारतों की नींव हिल सकती है। ऊपरी मंजिलों को खतरा।
7-7.9: इमारतें गिरने का खतरा, सड़कें फट सकती हैं।
8-8.9: इमारतें और पुल गिर जाएंगे।
9 से अधिक: इसमें सिर्फ तबाही होती है।

क्यों आते हैं भूकंप

विशेषज्ञों के अनुसार, हमारी धरती के नीचे कुल 12 टैक्टोनिक प्लेट्स हैं और इनके नीचे लावा बहता है। प्लेट्स इसी लावे पर तैरती हैं लेकिन जब ये आपस में टकराती हैं तो ऊर्जा निकलती है, इस ऊर्जा के कारण धरती हिलती है जिसे हम भूकंप कहते हैं। प्लेट्स एक जैसी नहीं होतीं बल्कि इनका आकार-प्रकार अलग होता है और कई बार तो केवल इस आकार के कारण ही इनके कोने आपस में टकरा जाते हैं।
कैसे तय होती है भूकंप की तीव्रता
बहुत साधारण भाषा में समझें तो धरती की जितनी ज्यादा गहराई में हलचल होगी या ये प्लेट टकराएंगी, भूकंप की तीव्रता उतनी ही कम होगी और जितनी कम गहराई होगी भूकंप की तीव्रता उतनी ही ज्यादा होगी।