हिंदू धर्म में बहुत से तीर्थ स्थल हैं जिनकी यात्रा का अपना-अपना महत्व है
लेकिन जब तक चार धाम यात्रा न कर लें तब तक यात्रा अपूर्ण ही रहती है। यह
चार धाम है:- बद्रीनाथ, द्वारिकाधीश, जगन्नाथ और रामेश्वरम। मान्यता है की
श्री हरि विष्णु बद्रीनाथ में स्नान करते हैं, द्वारिकाधीश में वस्त्र
पहनते हैं, जगन्नाथ में भोजन करते हैं और रामेश्वरम में विश्राम करते हैं।
शास्त्रों के अनुसार बारह ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ में स्थापित
ज्योतिर्लिंग सबसे ऊंचे स्थान पर है।
धर्म शास्त्रों के अनुसार भविष्यवाणी की गई है की इस सारे क्षेत्र में जितने भी तीर्थ विद्यमान हैं वह सारे आने वाले समय में लुप्त हो जाएंगे। मान्यता है कि जब नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे उस दिन बद्रीनाथ का रास्ता पूर्ण रूप से बंद हो जाएगा। बद्रीनाथ के दर्शन सदा के लिए बंद हो जाएंगे। उत्तराखंड में धटित प्राकृतिक आपदा इस ओर संकेत करती है। भविष्य में बद्रीनाथ धाम और केदारेश्वर धाम अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और फिर लंबे समय के उपरांत भविष्य में भविष्यबद्री नाम से नए तीर्थ का उद्गम होगा।
धर्म शास्त्रों के अनुसार भविष्यवाणी की गई है की इस सारे क्षेत्र में जितने भी तीर्थ विद्यमान हैं वह सारे आने वाले समय में लुप्त हो जाएंगे। मान्यता है कि जब नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे उस दिन बद्रीनाथ का रास्ता पूर्ण रूप से बंद हो जाएगा। बद्रीनाथ के दर्शन सदा के लिए बंद हो जाएंगे। उत्तराखंड में धटित प्राकृतिक आपदा इस ओर संकेत करती है। भविष्य में बद्रीनाथ धाम और केदारेश्वर धाम अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और फिर लंबे समय के उपरांत भविष्य में भविष्यबद्री नाम से नए तीर्थ का उद्गम होगा।


