Monday, 4 May 2015

यह पब्लिक है सब जानती है

भाजपा के रणनीतिकार आप को बहुत हल्के में लेते हुए मान रहे थे कि मोदी की सदाबाहर लोक प्रियता के बूते पार्टी लगातार राज्यों के विधानसभा चुनाव जीतती रहेगी। अहंकार के चलते नेतृत्व ने मान लिया था कि मोदी के राजनीतिक व्यक्तित्व के सामने कोई चुनौती नही है लेकिन भारतीय मतदाता जानते है कि राजनेताओ को है लेकिन भारतीय मतदाता जानते है कि राजनेताओ को कब वास्तविकता से अवगत कराया जाये। प्रधानमंत्री ने दिल्ली के विधानसभा चुनाव को अपने व्यक्तित्व पर जनमत बना दिया था, मतदाताओ ने उन्हे दो टूक आभास करा दिया कि उन्होने मतदाताओं के समर्थन का गलत अनुमान लगाया था।
लोकतंत्र में शासक जनता है जनप्रतिनिधि सेवक है। उन्हें जनता का दिल जीतने के लिये जनहित में योजनाएं बनाना उन्हे कार्यन्वित करना होगा। क्योकि यह पब्लिक है, सब जानती है।

मेरठ मेडिकल कॉलेज में स्थायी प्रधानाचार्य

मेरठ। प्रदेश के कुछ मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल काउंसिल आफ इडिया के द्वारा नियत मानकों के पूरा न होने तथा प्रदेश सरकार प्रमुख उपलब्धियों में एक सहारनपुर मेडिकल कॉलेज का अभी तक विघिवत कार्य की शुरुआत न होने व समूह श्ग्य की भर्तियों को कार्य न होने पर मुख्यमन्त्री की नाराजगी प्रदेश के स्वास्थय यहा निदेशक  शिक्षा डा0 के.के. गुप्ता को भारी पड़ी। डा0 गुप्ता को इस पद से हटा कर वापस मेरठ मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य के दायित्व निर्वहन के लिए भेजा गया है। इस वापसी को डा0 गुप्ता की पदावत कहां जा रहा है। इसके विपरीत इसे उनकी इच्छा भी कह रहे है ताकि वह अपनी गडबड निजी प्रैक्टिस को रास्ते पर ला सके।
डा0 गुप्ता द्वारा तत्काल प्रधानाचार्य का दायित्व सम्भाल लिया गया। डा0 गुप्ता के स्थान पर स्वास्थय महानिदेशक शिक्षा पद मुख्यमन्त्री द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्र कन्नौज के मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य वी.एन. त्रिपाठी को दिया गया ताकि प्रदेश में बढ़ रहे स्वाइन फ्लू की चुनौती में यह बदलाव से असफलता के असर को प्रभावहीन करने का प्रयास किया।
डा0 गुप्ता को वापस मेरठ मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य का दायित्व देने के लिए दलील इस कॉलेज में एडोक्रायोनोलॉजी विभाग होने व उसके दायित्व को के स्थान पर गत ढाई वर्ष से व्यवस्था न होने पर एमसीआई द्वारा आपत्ति करना बताया जा रहा है। डॉ0 गुप्ता अगले वर्ष सेवानिवृत्ति पूरी कर रहे है। इसके बाद यह शिक्षण कार्य सरकार की चिकित्सा शिक्षक उम्र बढाने के लाभ के अन्तर्गत कार्य कर सकेगें, परन्तु प्रधानाचार्य नियमित की जरुरत अगले वर्ष होगी। इसके लिए स्थाई प्रधानाचार्य खोज अभी से शुरु होगी संशय है।
सद्भावना समिति वरिष्ठ नागरिक फोरम ने अपेक्षा कि है लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ को भविष्य का स्थाई प्रधानाचार्य समय रहते दिए जाने की व्यवस्था प्रदेश सरकार करेगी। इस मेडिकल कॉलेज में डा0 उषा शर्मा के बाद से कुछ अवधि छोड़ अस्थाई प्रधानाचार्य लम्बे अन्तराल तक रहने की व्यवस्था में कॉलेज में गड़बडियों से इसकी शाख गिरी है। अस्थाई प्रधानाचार्य पद पर बनें रहने की कुछ लोगो की चाह से जबरदस्त गुटबाजी चल रही है। जिसमें सरकार द्वारा नई-नई व्यवस्थाओं के किए जाने के बाद भी कॉलेज छात्रों व जनता को उनका लाभ दिलाने में पिछड़ा है। स्वयं मेडिकल छात्र व जूनियरों में अनुशासनहीनता बढ रही है। कॉलेज के पास जिस तरह अतिक्रमण बढ रहा है। वह एक दिन इस कॉलेज के ्रप्रर्यावरण व कानून व्यवस्था के लिए भयकर चुनौती होगा।
व्यवस्था तो एॅडोक्रायोलांजी शिक्षण व चिकित्सा
डा0 गुप्ता की मेरठ वापसी का एक कारण प्रदेश में आगरा के बाद एॅडोक्रायोलाजी चिकित्सा व शिक्षण विषय की व्यवस्था होने व इसके शिक्षण कराने व इस मेडिकल कॉलेज में इसकी चिकित्सा हेतु चिकित्सक की व्यवस्था न होना भी कहा गया है। इस विषय के अध्ययन कर चुके छात्र चिकित्सकों व पढाई करने वाले छात्र चिकित्सकों का कहना है कि इस चिकित्सा अध्ययन व विभाग को नई व्यवस्था पर अभी से ध्यान देना होगा ताकि निकट भविष्य में इनकी सेवानिवृति व अपनी नीजि प्रैक्टिस की चाह के अवरोध से निजात मिल सके।

बेंगलुरु दुनिया में सबसे सस्ता शहर


इकोनोमिक इंटेलीजेंस यूनिट द्वारा तैयार श्वल्र्डवाइट कॉस्ट ऑफ लिविंग रिपोर्ट, २०१५्य के अनुसार, न्यूयार्क को आधार मानकर, १३३ शहरों को शामिल कर, १६० सेवाओंध्उत्पादों की कीमतों को ध्यान में रखकर, यह घोषणा की गई है कि भारत की सूचना प्रौद्योगिकी का केंद्र बेंगलुरु और पाकिस्तान की वित्तीय राजधानी कराची को संयुक्त रूप से १३३ वें स्थान पर रखकर दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में शुमार किया गया है। यहां गुजर-बसर करना काफी सस्ता है। इसके बाद मुंबई को १३० वां, चैन्नई को१२९ वां और नई दिल्ली को १२८ वां स्थान दिया गया है। दुनिया के सबसे महंगे शहरों में सिंगापुर दूसरे वर्ष भी शीर्ष पर है। उसके बाद, पेरिस, ओस्लो, ज्यूरिख और सिडनी का नंबर आता है।

चलना होगा साथ

जम्मू-कश्मीर के विकास पर, चलना होगा साथ
राष्टड्ढ्र के हित में करनी होगी, अब तो सारी बात।
अब आंतकवाद की गंध, न केसर क्यारी में फैले
राष्टड्ढ्र-प्रेम, विश्वास, एकता पर, न हो अब आघात।।
        अपने पांव पर आप कुल्हाड़ी मारी, कुछ दीवानो ने।
        मानवता को लज्जित कर डाला, ऐसे इंसानों ने।।
        इस सुन्दर घाटी का समुचित विकास रुक गया यूं।
        बरसों लग जायेगें इसको विकसित कर पाने में।।

Sunday, 3 May 2015

मच्छरों से छुटकारा दिलाएंगे पौधे

घर के आसपास लगे कुछ पौधे ही मच्छर के बचाव के लिए सुरक्षा कवच का काम कर सकते हैं। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च के हाल ही प्रकाशित शोध पत्र में इस बात खुलासा किया है। इसमें पाया गया है कि मच्छरों से बचने के लिए किए गए किसी भी रासयनिक छिड़काव की जगह घर के किचन गार्डन में लगे कुछ जाने-माने पौधे ही मच्छरों से मुकाबला करने के लिए काफी है। सदाबहार, सांची, गारडेनिया जैसे पौधों को हम केवल उनके खूबसूरत फूलों की वजह से जानते हैं। आयुर्वेद में कभी इनका प्रयोग डायबिटिज या फिर ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, लेकिन पहली बार इनकों मच्छरों के लार्वा खत्म करने के लिए भी बेहतर माना गया है।
शोधकर्ता अनुपम घोष के अनुसार देश में हर साल मच्छर जनित बीमारियों के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए इससे बचाव के लिए नये विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए। अब तक किए गए अध्ययन में यह भी देखा  गया है कि लंबे समय तक स्प्रे या फिर मच्छररोधी छिड़काव सेहत के लिए ठीक नहीं, जबकि वेक्टर बोर्न बीमारी या मच्छर जनित बीमारियों के लिए सरकार अब तक कोई कारगर वैक्सीन भी नहीं बना पाई है। यही कारण है कि शुरू से ही मच्छरों से बचाव पर अधिक ध्यान दिया जाता है। इसी क्रम में बायोलॉजिकल स्प्रे में कुछ पौधों की पत्तियों के मिश्रण को मच्छरों को दूर भगाया जा सकता है। शोध के आधार पर अब पौधों से तैयार स्प्रे को नियमित मच्छर रोधी कार्यक्रम में शामिल करने की पैरवी की जा रही है। अहम यह है कि इन पौधों को आसानी से घर पर लगाया जा सकता है।
कैसे हुआ अध्ययन
इस बावत भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और जूलॉजी विभाग क्रिश्चियन कॉलेज बाकुरा की टीम द्वारा अध्ययन किया गया। अध्ययन में क्यूलेक्स प्रजाति के १०० से अधिक मच्छरों के लार्वा को स्वच्छ पानी में रखा गया। शोध टीम में शामिल डॉ. अनुपम घोष ने बताया कि लार्वा को बढने के लिए कुछ अप्राकृतिक खाद्य सामग्री भी पानी में डाली गई। जिसमें यीस्ट पाउडर और कुत्तों को दिए जाने वाले बिस्कुट शामिल थे। लार्वा को ३१ से ३३ डिग्री सेल्सियस के तापमान पर एक हफ्ते तक रचाा गया। इससे पहले यीस्ट पॉउडर में चिकित्सीय पौधों को पत्ती से तैयार मिश्रण को मिलाया गया।

कल्याणं करोति का नेत्र शिविर

स्व0 पं0 हरस्वरूप शर्मा जी की पुण्य स्मृति में, तन्मय ट्रस्ट, कल्याणं करोति मेरठ (पंजीकृत) एवं जिला दृष्टिड्ढहीनता निवारण समिति (मेरठ)  के संयुक्त तत्वाधान में लैन्स की सुविधा के साथ निरूशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन राधा गोविन्द पब्लिक स्कूल, कॉपरेटिव सोसाईटी के पीछे, खरखौदा, (मेरठ) के प्रांगण में आयोजित किया गया। जिसमें १५५ नेत्र रोगियों की जांच डा0 पी.पी. मित्तल द्वारा की गयी, सभी नेत्र रोगियों का निरूशुल्क दवाईयां वितरित करके १४ के मोतियाबिन्द के आपरेशन हेतु चयन किया गया। सभी नेत्र रोगियों को मोतियाबिन्द के आपरेशन हेतु कल्याणं करोति, मेरठ द्वारा संचालित निरूशुल्क नेत्र चिकित्सालय कैन्टोनमैन्ट जनरल अस्पताल, मेरठ छावनी में लाया गया।
सभी आपरेशन डा0 पी0पी0 मित्तल द्वारा किये गये। चश्में के लिए ६२ नेत्र रोगियों की जांच श्री संजय कुमार द्वारा की गयी और २३ को रियायती दर पर चश्में उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। शिविर को सफल बनाने हेतु सर्व श्रीमतीध्श्री तिलकराज अरोड़ा, ईश्वरचन्द गुप्ता, डा0 (कु0) सरोजनी वासन, ब्रहमदत्त शर्मा, शैलजा दत्त, प्रशान्त शर्मा,   मीता एवं विजय आदि ने विशेष योगदान दिया।
कैन्टोनमैन्ट जनरल अस्पताल, बेगमपुल, मेरठ   पिन-२५०००१
फोन: (का0) ०१२१-२६६४७२२, (अध्यक्ष) ९४१२२०६२१०, (महामंत्री) ९४५६८३८४५६ म्उंपसरू ााउउममतनज/हउंपसण्बवउ

ओशो सत्संग और मेडिटेशन

गोमती आत्मदर्शन की धारा में आज स्वामी देव प्रकाश एडवोकेट ने दीप प्रज्वलित किया। ओशो के १ घंटे प्रवचन का रहा। सभी साधकों ने प्रवचन श्रवणकर आत्मिक लाभ उठाया।
स्वामी आत्मो कामरान ने कीर्तन ध्यान और नादबृहय ध्यान कराया। आज ध्यान की बहुत आवश्यकता है, विक्षिप्ता और मनोरोगो से छुटकारा पाना सम्भव है। हम ध्यान रहने की कला जानते तो जीवन जीना आ गया।
नटराज ध्यान १ घंटे तक कराया हम नृत्य करना भूल गये। हमे नृत्य करना आ जायें तो जीवन में उत्सव उतरने लगता है। मीता के पैरों नाच है, चैतेन्य प्र्रभु के पैरों में नाच है। यह नाच तुम्हारे पैरों में उतर आये तो जीवन उत्सव से धन्य हो जायेगा। तब पता चल जायेगा कि जीवन क्यों मिला। निश्चित ही मन धन्यवाद देने का भाव उमड़ पड़ेगा। प्रत्येक रविवार को १२ बजे शिविर लगता है।
सद्भावना समिति (पंजी.) स्वामी आत्मो कामरान 8057982656, 8273548730