Tuesday, 31 March 2015

आप सबका दायित्व: जल संरक्षण

देश में बढ़ती आबादी और बिगड़ते पर्यावरण ने सबसे ज्यादा प्रदूषित हवा और पानी को किया है जिसके बिना जीवन का कोई अस्तित्व नहीं। ऐसे में शुद्ध जल और वायु के लिए प्रयत्नशील रहना हमारा- आपका सबका दायित्व है लेकिन वास्तव में गिन-चुने लोग हैं जो इस बारे में ईमानदार पहल करते हैं। ऐसा ही एक नाम आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने वाले हर्ष चौहान का है जिन्होंने झाबुआ जिले के भील बहुल क्षेत्र में पानी बचाने का अभियान शुरू किया। हर्ष ने वहां की स्थानीय परंपरा हलमा को इससे जोड़कर आदिवासियों को प्रेरित किया। आज वहां 20 हजार आदिवासियों का पानी के संरक्षण की मुहिम में जुटना इसका प्रमाण है कि उनके भीतर इस प्राकृतिक संपदा को बचाने की ललक बहुत गहरे जाग गई है। ठीक इसके उलट शहरों में सरकार द्वारा विज्ञापनों में लाखों रुपए फूंकने पर भी दशा जस की तस है। यह भी कटु सत्य है कि सबसे ज्यादा उपेक्षित समाज व स्थान भी आदिवासियों के ही हैं फिर भी बिना सरकारी सहायता के इतना पानी व हरियाली बचाना/बढ़ाना सचमुच स्तुत्य है। हर्ष चौहान जैसे समाजसेवियों व देशप्रेमियों को पुरस्कृत किया जाना चाहिए ताकि दूसरे प्रेरणा ले सकें।साथ ही सरकार भी तालाबों के निर्माण/व गहरी कारण के लिए यदि गर्मी में मुफ्त मुरमा निकलकर ले जाने की छूट देवे तो कई तालाब बिना खर्च के गहरे हो सकते हे! ऎसे ही नयी तालाब भी बन सकते हे! छोटी नदियों पर चेक डैम बनाने का आदर्श उदाहरण उज्जैन जिले के भट पचलाना के शिक्षक मोहन सोलंकी ने पेश किया हे उन्होने पंचायत व जान सहतोग से 8 चेक डैम निर्मित करवाकर गाव की पेय जाल समस्या दूर करने के साथ ही वात्तेर ल्व्बल में बढ़ोतरी की हे!इन्हे भी पुरस्कृत किया जाना चाहिए!

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