Monday, 30 March 2015

गंगोत्री से गंगा सागर तक

भागीरथ की कठिन तपस्या , आखिर रंग लाई थी।
ज्येष्ठ मास दश्मी को मागंगे पृथ्वी पर आई थी।।
आगे-आगे चले भागीरथ, पीछे गंगा की थी धारा।
जहां से होकर निकली गंगा, तीर्थ बन गया प्यारा।।
गंगोत्री से गंगा सागर तक, गंगा मां की महिमा।
ठंडे मीठे पवित्र जल से है, विश्व में इनकी गरिमा।।
गंगोत्री से गंगा सागर तक, अनेक तीर्थस्थल न्यारे।
कपिल मुनि के आश्रम में, शापित सभी पिटर तारे।।
ऋषिकेश, हरिद्वार, शुक्रताल, शिववल्लभ गढ़मुक्तेश्वर।
तीर्थराज प्रयाग,वाराणसी, हरिहर क्षेत्र मनोहर।।
भागीरथ के नाम पर गंगा, भागीरथी भी कहलाती।
इसकी सुन्दर अविरल धारा, गंगोत्री से है आती।।
उत्तराखंड में पंच प्रयागों का है अद्भुत संगम।
कल-कल करती मंदाकिनी का है, दृश्य मनोरथ।।
वह स्थान जहां पर ऋषियों ने धोय थे अपने केश।
ऐसे पावनधाम को, हम सब कहते है ऋषिकेश।।
स्वर्गाश्रम, लक्ष्मणझूला का भी दृश्य निराला है।
ईशवानंद झूले पर चढे यात्री, फेरे शिव की माला है।।
हर की पौड़ी हरिद्वरार में, लगता कुम्भ का मेला है।
तीर्थयात्री हर कोने से आते, दृश्य बड़ा अलबेला है।।
शुकदेव मुिन ने राजा परीक्षित को, भगवत कथा सुनाई।
जनपद मुज्जफरनगर में श्शुक्रताल्य विलक्षण तीर्थ है भाई।।
शिवगणों ने स्नानकर, जहां अपने शाप से मुक्ति पाई।
शिववल्लभ तीर्थनगरी ही अब गढमुक्तेश्वर कलाई।।
शिव के त्रिशूल पर बसी हुई है, अद्भुत नगरी काशी।
कुछ लोग बनारस भी कहते इसे, वही है वाराणसी।।
गज-ग्राह का यही हुआ था, एक अद्भुत संग्राम।
सोन नदी के तट पर, हरिहर क्षेत्र है अनुपम धाम।।
पश्चिमी बंगाल में हुगली नाम से, गंगा का सागर से हुआ मिलन।
सारे तीर्थ बार-बार, गंगा सागर एक बार कहते है सज्जन।।
बंगलादेश में पद्मा नदी भी गंगा की ही धारा है।
बंगाल की खाड़ी में गिरने का उसका सुन्दर नजारा है।।
गंगा, गीता, गायत्री ये तीनो भारत भूमिकी पहचान।
इनकी अनुपम प्रतिष्ठा से, विदेशों मे है भारत का मान।।
गंगाजल को अब हमने निर्मल और पवित्र यदि रखना है।
औद्योगिक रसायन, कूड़ा-कचरा के प्रदूषण से मुक्त करना है।।
अब नमामि गंगें का प्रधानमंत्री ने रखा है एकदम ध्यान।
आओ हम सब सफल बनाये उनका यह सुन्दर अभियान।।
पोलीथीन, प्लास्टिक के कचरे से कितना बढता है प्रदूषण।
कूड़े के ढेर में गुम हो रहे शहर, करना है सही निवारण।।
           - सुमनपाल सिंह, उप सम्पादक

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