Saturday, 28 March 2015

महीनों पगार नहीं फिर काम के घंटे की भी सीमा नहीं

उ0प्र0 में सबसे बडे उ0प्र0 सरकार के उपक्रम उ0प्र0 पावर कारपोरेशन के उत्पादन, वितरण व ड्रास्कों में विभिन्न रूप से लगभग ६०-७० हजार से अधिक विभिन्न रुपों में संविदा या कम से कम ८.१० वर्ष से जबसे निगम बना है। इनको आदेशों के बाबजूद न ते इनके अधिकांशतरू खण्ड खाते है न बीमा पर काम करते सैकड़ों से हमारे तक भरते है या दुघर्टना ग्रस्त होते है। इनकी दुर्घटना पर जिम्मेदारी लेने वाला कोई नही। इसके विपरीत उ0प्र0 रोडवेज में विभाग द्वारा विज्ञापन द्वारा आवेदन रखकर सीधे संविदा दी जा रही है इनके कार्य एवं जिदंगी व छुट्टी आदि की व्यवस्था ही नही बल्कि नियमित सेवा के अवसर है।
प्रश्न यह उठता है कि एक ही राज्य में अलग-अलग व्यवस्था में संविदा पर नौजवानों के भविष्य की व्यवस्था किस कारण। बिजली में परिचालन व दफ्तर कार्यो हेतु ठेकेदारी या फ्रेचाइंजी से तो रोडवेज में सीधे संविदा रखने की व्यवस्था। राजस्थान की भांति उ0प्र0 मे संविदा कार्मिकों की समस्या हेतु समाधान क्यों नही। संविदा पर अब तो शिक्षक हो, चिकित्सक ही अथवा अन्य अधिकांश कार्यो मे नियमित भर्ति के स्थान पर संविदा या फिर अपने सेवानिवृत को रखने की ही व्यवस्था जोर शोर से चालू है। इससे प्रदेश का भला ही या ने हो, विभाग की लाभ हो ने हो पर विभाग के लोग व कुछ अन्य के स्वार्थ सिद्ध तो हो ही रहे है। भ्रष्टाचार व भाई भतिजा या फिर उपकार पनपन रहा है, काम करने वाले सम्पर्क में आने वाली जनता को लूट रहे लूटे भर्ति न होने का बहाना सब कुछ दायित्व फ्री कर रहा है।

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