ये समय चुनौती का है, इसको सोकर मत खोना,
चाहे नींद झुके पलकों पर, नैनों में सपन सलोना,
सैंकड़ों हजारों बीघा,जिनके जमीन नाम,
भूल से भी मूठ नहीं पकड़ा है हल का,
हल के चलाने वाले, फसल उगाने वाले,
दुखी हैं कि हक नहीं उनको फसल का,
तय करो कौन है किसान जमींदार कौन,
काम का किसे है हक,किसको है फल का,
श्रम में नहाने वालो, फसल उगाने वालो,
जड़ से ख़तम करो, शोषण ये छल का,
अब के उधार धरती पर, हमें बीज नहीं है बोना।
ये समय चुनौती का है, ं ं ं ं
अनगिन माया जाल, सैंकड़ों करें सवाल,
करना यकीन नहीं किसी ज्ञानवान का,
पादरी भी प्रेयर करे, पंडित भी मन्त्र पढ़े,
अर्थ कोई होता नहीं, मुल्ला की अजान का,
धरम को जानने को जानना जरूरी नहीं,
बाइबिल, वेद, गुरु गं्रथ औ्य कुरान का,
ये उधार धर्म आज आदमी की जिन्दगी में,
गौर से निहारिए तो रोग है मसान का,
जीवन पर भार हुए हैं, अब कठिन है इनको ढोना।
ये समय चुनौती का है, ं ं ं ं
गौरी-गजनी को कैसे रोक लेंगे आप गर,
घर को भरेंगे सारा देश लूट-लूट कर,
उग्रवादियों को सही मार्ग पर लाने के लिए,
देश-प्रेम हदय में भरो तो कूट-कूट कर,
प्यार से दुलार से भी, जोर से भी मार से भी,
उनको मानएंगे गए जो रूठ-रूठ कर,
चाहे पंजाब कश्मीर खूब जोर करे,
देश को बिखरने न देंगे टूट-टूट कर,
इसके सँग में मत खेलो, यह देश नहीं है खिलौना।
ये समय चुनौती का है,
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