अखिल भारतीय लोकाधिकार संगठन ने अफसोस जाहिर किया कि कोर्ट एवं सरकार द्वारा चिकित्सकों को दवाई निर्माता कम्पनियों द्वारा अपनी दवाईयों को लिखवाने के लिए दी जाने वाली सहुलतियों व नकद राशि व उपहारों पर दिखाने के लिए कानूनी रोक के प्राविधान किए है, इन पर सरकारी सेवा के चिकित्सक एक स्तर तक नियंत्रित हो सके है परन्तु निजी प्रैक्टिस जो रोके नही एक रही है इस नियंत्रण से खुल्लम खुल्ला मूहं मोड़े है निजी क्षेत्र में चिकित्सक व अस्पताल, नर्सिंग होम तो आपसे से बाहर है। उनका कहना है कि नियंत्रण करने वाले खुद ईमानदार नही फिर हम ईमानदार क्यों बनें।
दवाई निर्माता कम्पनियों ने भी सीधे के स्थान पर घुमावदार तरीके ईजाद किए है। वह अब दवाई बेचने वालों के माध्यम की भी ईजाद कर लिया है यह दवाई बेचने वाले बहुत कुछ दवाई निर्माताओं के माध्यम बन बैठे है। चिकित्सक अब फीस के अलावा इलाज के स्थल व दवाई बेचने वालों से भी बहुत कुछ पाने में लगकर चिकित्सा के को ठेंगा दिखाने में लगे है। चिकित्सकों की परिषद केवल संशान शिकायत पर लेती है, घटना पर स्वयं लगाने से परेहज है जबकि कोर्ट संशान लेती देखी जाने लगी है जनहित समस्या।
वरिष्ठ नागरिक सदड्ढ्भावना फोरम भी बैठक में अफसोस जाहिर इस बात पर था कि जब महंगाई पर नियंत्रण के लिए उत्पादकत्र्ता या विक्रयदाताओं पर नियंत्रण व छापे मारी होती है फिर चिकित्सा परिषद व प्रशासन स्तर से समय-समय पर चिकित्सकों व उनके कार्य स्थल चिकित्सालय व नर्सिंग होम में दवाईयों विक्रेताओं पर छापेमारी होकर लिए जाने वाले चार्ज के पर निगरानी क्यों नही। अस्पतालों, नर्सिंग होम में दवाईयों की बिक्री प्रतिबन्धित सख्ती से होनी चाहिए ताकि अस्पतालों नर्सिंग होम से ही दवाईयां खरीद के लिए मजदूरी के विवाद उत्पन्न न हो। चिकित्सा लय नर्सिंग होम केवल अपने ऑपरेशन इस्तेमाल की दवाईयां ही रख सके, खुले ब्रिकी की छूट न मिले।
दवाई निर्माता कम्पनियों ने भी सीधे के स्थान पर घुमावदार तरीके ईजाद किए है। वह अब दवाई बेचने वालों के माध्यम की भी ईजाद कर लिया है यह दवाई बेचने वाले बहुत कुछ दवाई निर्माताओं के माध्यम बन बैठे है। चिकित्सक अब फीस के अलावा इलाज के स्थल व दवाई बेचने वालों से भी बहुत कुछ पाने में लगकर चिकित्सा के को ठेंगा दिखाने में लगे है। चिकित्सकों की परिषद केवल संशान शिकायत पर लेती है, घटना पर स्वयं लगाने से परेहज है जबकि कोर्ट संशान लेती देखी जाने लगी है जनहित समस्या।
वरिष्ठ नागरिक सदड्ढ्भावना फोरम भी बैठक में अफसोस जाहिर इस बात पर था कि जब महंगाई पर नियंत्रण के लिए उत्पादकत्र्ता या विक्रयदाताओं पर नियंत्रण व छापे मारी होती है फिर चिकित्सा परिषद व प्रशासन स्तर से समय-समय पर चिकित्सकों व उनके कार्य स्थल चिकित्सालय व नर्सिंग होम में दवाईयों विक्रेताओं पर छापेमारी होकर लिए जाने वाले चार्ज के पर निगरानी क्यों नही। अस्पतालों, नर्सिंग होम में दवाईयों की बिक्री प्रतिबन्धित सख्ती से होनी चाहिए ताकि अस्पतालों नर्सिंग होम से ही दवाईयां खरीद के लिए मजदूरी के विवाद उत्पन्न न हो। चिकित्सा लय नर्सिंग होम केवल अपने ऑपरेशन इस्तेमाल की दवाईयां ही रख सके, खुले ब्रिकी की छूट न मिले।
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