Tuesday, 31 March 2015

देश को बनाना है वाईफाई कंट्री: प्रो0एनके गोयल

भारत में सीएमएआई के नाम से सभी परिचित हैं, खासतौर से टेलीकॉम सेक्टर। सीएमएआई इंफोर्मेशन एंड टेक्नॉलॉजी के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान दे रही है। सीएमएआई के अध्यक्ष प्रो0 एन के गोयल से हुई एक मुलाकात में उन्होंने बताया कि किस तरह सीएमएआई आईसीटी सेक्टर और डिजिटल इंडिया में योगदान कर रही है। सीएमएआई देश की पहली और अकेली ऐसी सोसिएशन है जो शिक्षा, साइबर सुरक्षा, संचार, मल्टीमीडिया, मन्युफैक्चरिंग और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के काम कर रही है। CMAI ने अब तक साइबर सुरक्षा में 10,000 से अधिक प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया है। अब सीएमएआई का सपना है कि पूरा हिन्दुस्तान वाईफाई से लैस हो।

देश मे डिजिटल इंडिया का दौर चल रहा है, सूचना प्रोद्योगिकी से जुड़े होने के नाते आप डिजिटल इंडिया को कैसे सपोर्ट कर रहे हैं? 
डिजिटल इंडिया भारत सरकार का एक ऐसा प्रोग्राम है जिसमें हम चाहते हैं कि भारत के हर गांव और शहर के बच्चे के हाथ में इंटरनेट कनेक्शन हो चाहे मोबाइल से हो या कम्प्युटर से हो, उसके लिये हमारी एसोसिएशन सीएमएआई, टेक्नॉलॉजी को देश भर में सुलभ बनाने के लिये काम कर रही है। इसके लिये सबसे आसान तरीका है मोबाइल। इस क्षेत्र में हमारी एसोसिएशन के सदस्य डाटाविंड ने सबसे सस्ता फोन इंटरनेट सुविधा के साथ भारतीय बाजार में इंट्रोड्यूस कर दिया है। ये एक महत्वपूर्ण कदम है।
आपका अगला विजन क्या है?
हमारा अगला विजन है हिन्दुस्तान को वाईफाईलैस कंट्री बनाने का। भारत सरका भी इस दिशा मं बात कर रही है। लेकिन इसमे सबसे बड़ी समस्या ये है टेक्नॉलॉजी की, इसके समाधान के लिए हमने एक टेक्नॉलॉजी आईडेंटीफाई की है उस पर काम हो रहा रहा। उम्मीद है हम जल्द ही इसे भी भारत में पेश करेंगे।
डाटाविड के इस रिवोल्युशननरी डिवाइस की बात करे तो अभी इसका प्रोडक्शन कितना हुआ है, अभी तो ये फोन भारत से बाहर बन रहे हैं?
जी हां!, प्रोडक्शन का काफी काम हो चुका है कुछ डिवाइसेस अभी बाहर से ही आ रही हैं।, लेकिन तीन महीने के अन्दर-अन्दर इसका 90% प्रोडेक्शन भारत में शिफ्ट हो जायेगा, जिससे यहां नये जॉब्स क्रिएट होंगे।

सीएमएआई का इसमे क्या रोल होगा
हमारी एसोसिएशन है जिसमे डाटाविंड मेम्बर हैं, हम इन्हे हेल्प करते रहते हैं,  जैसे टेक्नॉलॉजी लाने में, या हिन्दुस्तान में स्थापित होने के लिये सारी फेसिलिटी उपल्ब्ध कराने के लिये हम काम करते रहते हैं।

No comments:

Post a Comment