Tuesday, 31 March 2015

घूस में वाकई दम है...

कल मेरे एक साथी ने कहा, सर जहाँ हम जा रहे है ज्यादा हरिशचंद्र नहीं बनना है, मैं आपको दिखाऊंगा 500 और 1000 के नोट में कितना दम होता है। हम सरकारी दफ्तर पहुंचे, कलर्क से कहा, बैक डेट में एक पेपर पर अपने विभाग का मुहर लगा दो, उसने पूरा कानून समझा दिया और नहीं माना फिर मेरे साथी ने कहा सेवा करेंगे, उसने बोला 500 दो तो काम हो जायेगा, हमने हाँ बोला उसने मुहर लगाकर दे दिया।मेरे साथी ने कहा उसने 500 माँगा है, हम उसे हज़ार देंगे और देखना आप कल से ये हमारी गुलामी करेगा, जहाँ देखेगा हमें सलाम ठोकेगा, उसे हज़ार दिया तो उसके चेहरे की मुस्कुराहट रोकने से नहीं रुक रही थी, और सलामी देने का तो जवाब ही नहीं।एक दूसरी घटना में मेरे साथी ने कहा ये तो कलर्क है मैं आपको इससे बड़े रैंक के अधिकारी को दिखता हूँ, वो कैसे दुम हिलाता है पैसे देने पर... उन्होंने फिर एक दूसरे काम के लिए पैसे की पेशकश की, उसका रवैया बदल गया, बहुत खुश, फिर हमने कहा यही लेंगे या बाहर चलकर लेंगे, कहा बाहर चलते है, बाहर चाय के दुकान पर वो सेवक के भांति खडा था, पैसे देने से पहले मेरे साथ के लोग उससे आप और सर करके बात कर रहे थे जैसे ही हज़ार के दो नोट पकड़ाये, पहली लाइन हमारी साथियों की थी, तुम हमारी भक्ती करो, फल मिलता रहेगा और वो अधिकारी, जी सर, जी सर कहता रहा, बाद में उसने कहा मैं भी बहुत बड़ा केजरीवाल भक्त था लेकिन उससे काम नहीं चलेगा।उस अधिकारी के चेहरे की मुस्कराहट, केजरीवाल की नाकामियों को साफ-साफ बता रही थी... मैंने भी सोचा खाना खाने जाते है तो 100 – 50 की टिप देते है, वेटर खुश, आपकी भरपूर सेवा करता है, वैसे ही सरकारी कर्मचारियों – अधिकारीयों को टिप दें तो क्या बुराई, वो भी हमारी सेवा करेगा। मैं वाकई बेहद हैरान था कैसे हजारों रुपयों की नौकरी करने वाला अधिकारी अपनी दुम हिलाता है 500 के नोट पर। ऐसे कर्मचारी और अधिकारी क्या शिक्षा देते होंगे अपने बच्चों को.. भगवान बचाए इस देश को....

No comments:

Post a Comment