Thursday, 2 April 2015

सुप्रीम कोर्ट से एलजी को मोहलत, 12 दिन में तलाशें सरकार की संभावना

दिल्ली में सरकार बनाने के मुद्दे पर गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई 11 नवंबर तक टल गई है। इसके साथ ही अदालत ने दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर की जानेवाली उपराज्यपाल नजीब जंग की कोशिशों की तारीफ भी की। चीफ जस्टिस एचएल दत्तू ने दिल्ली में सरकार बनाने के मुद्दे पर कहा कि हमने अखबारों में पढा है कि उपराज्यपाल दिल्ली में सरकार बनाने की कोशिशें कर रहे हैं और उनके ये प्रयास एक सकारात्मक कदम हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उप राज्यपाल की कोशिश तारीफ के काबिल हैं, क्योंकि वह सरकार बनाने के लिए पार्टियों से बातचीत कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में सरकार के वकील ने यह दलील दी कि उप राज्यपाल सरकार बनाने के लिए सियासी पार्टियों से बातचीत कर रहे हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि देश में पहले भी अल्पमत की सरकारें बनी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एलजी से कहा कि अगर अल्पमत की सरकार दिल्ली में संभव है, तो संभावना तलाशें। वह अपनी कोशिशों को 11 नवंबर तक जारी रखें। कोर्ट ने कहा कि अगर 11 नवंबर तक कुछ नहीं हुआ तो देखेंगे। इसी के साथ बिना किसी दिशा-निर्देश के साथ सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई 11 नवंबर तक टाल दी। सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई के बाद सवाल यह पैदा हो रहा है कि क्या दिल्ली में भाजपा की अल्पमत की सरकार बनेगी! क्या 12 दिन में भाजपा सरकार बना पाएगी! गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल को कडी फटकार लगाई थी। पीठ ने सवाल किया था कि केंद्र क्यों मामले की सुनवाई के एक दिन पहले ही हमेशा अलग अलग बयान के साथ आती है। शीर्ष अदालत ने कहा था, मामले की सुनवाई के लिए सामने आने से ठीक पहले आप एक बयान देते हैं, इस पर पहले क्यों नहीं निर्णय किया जाता! आप इस तरह से कितने समय चलेंगे! पीठ ने कहा कि उपराज्यपाल को इस बारे में जल्द से जल्द फैसला करना चाहिए था। उपराज्यपाल की कोशिश बुधवार को उप राज्यपाल ने कहा कि वह सरकार बनाने के मामले में जल्द ही सभी दलों से बातचीत करेंगे। बुधवार को एलजी नजीब जंग ने बयान देते हुए कहा कि वह दिल्ली में सरकार बनाने की संभावनाओं पर अगले कुछ दिनों में सभी पार्टियों से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली में लोकप्रिय सरकार के गठन की संभावना तलाशने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है, लिहाजा उपराज्यपाल नजीब जंग अगले कुछ दिनों के दौरान सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से बात करके सभी संभावनाओं की तलाश करेंगे। उप राज्यपाल के इस प्रस्ताव पर केजरीवाल ने कहा कि वह कोर्ट में सुनवाई टालने के लिए ये प्रस्ताव लेकर आए हैं। भाजपा पूरे मसले पर कुछ बोलने से बच रही है। इससे पहले मंगलवार को कोर्ट ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि लोकतंत्र में लंबे समय तक राष्ट्रपति शासन ठीक नहीं है। दिल्ली विधानसभा की मौजूदा स्थिति दिल्ली विधानसभा में फिलहाल 67 विधायक हैं जिसमें भाजपा के पास 29, आम आदमी पार्टी के पास 27, कांग्रेस के पास 8 और अन्य 3 विधायक हैं। इस लिहाज से भाजपा के पास बहुमत के 34 आंकडे तक पहुंचने के लिए 5 विधायक कम पडते हैं। यदि अन्य तीन विधायक भी भाजपा को समर्थन देते हैं तब भी भाजपा बहुमत के आंकडे से 2 कदम दूर रह जाती है। दिल्ली में फरवरी 2014 से विधानसभा निलंबित है और राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। आम आदमी पार्टी की सरकार 49 दिन ही सत्ता में रहकर भाग खडी हुई थी।

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