वर्तमान में अखबार या पत्रिका का सफल प्रकाशन करना कितना कठिन कार्य है ये एक प्रकाशक ही बता सकता है। खासतौर से स्थानीय अथवा क्षेत्रिय समाचारपत्र/पत्रिका प्रकाशकों को इसका अधिक अनुभव है। हमारे आस पास रहने वाले पाठक इस वेदना से कभी अवगत नहीं होते। क्योंकि ऐसा कभी मौका या मंच ही नहीं होता जहां क्षेत्रिय समाचारपत्र/पत्रिकाओं के प्रकाशकों की समस्यायें रखी जा सकें। “लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन” ने इस तरह की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और समाधान सुझाये हैं।
हाल ही में झारखंड की प्रसिद्ध पत्रिका “राष्ट्र संवाद” के 14 वें स्थापना दिवस के अवसर पर जब देश के बड़े अखबार कार्पोरेट जगत के दिग्गज और पाठक एक जगह एकत्रित हुये तब देश के विकास में मीडिया के योगदान की चर्चा हुई। जहां बड़ॆ अखबारों ने बाजारवाद और प्रतिस्पर्धा के कारण उभरती चुनौतियों की बात की तो कारपोरेट जगत ने मीडिया के नकारात्मक खबरें अधिक दिखाने और छापने पर चिंता व्यक्त की।
इस अवसर पर “लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन” के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुभाष सिंह ने कहा कि आज देश में इतने वर्षों में भ्रष्टाचार राजनीतिक मुद्दा बना है जिसका श्रेय मीडिया को जाता है। यह देश के विकास में मीडिया का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है। आज मीडिया को नियंत्रित करने की बातें हो रहीं हैं। मीडिया को ना तो सरकार नियंत्रित कर सकती है ना कारपोरेट। मीडिया को केवल पाठक ही नियंत्रित कर सकते हैं। यदि पाठक सकारात्मक खबरों को अधिक रूचि से पढ़े तो मीडिया वही दिखायेगा और छापेगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री सुभाष सिंह ने कहा कि मीडिया की सकारात्मक खबरों को कई बार गलत समझ लिया जाता है कि कहीं ये अखबार या पत्रिका बिक तो नहीं गयी।
सचमुच ये एक नया पहलू था चर्चा के लिये। सब ओर बात उठती है कि मीडिया सकारात्मक खबरों को नहीं दिखा रहा है। आप उदाहरण के लिये ले यदि मीडिया किसी राजनीतिक दल की या उसके नेताओं की अच्छाइयों को प्रमुखता देता है तो पाठक के मन में इसका नकारात्मक पहलू ही जल्द उभरता है।
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