जीवन कितना क्षणभंगुर है फिर भी हम इस बात को समझ नहीं पाते लेकिन कुछ घटनाएं होती हैं जीवन की जो इस भौतिक शरीर की कमजोरी और किसी पराशक्ति के होने का आभास कराती है, जो हमें चलाती है। कई बार घटनाएं हमारे सोचने का ढंग बदल देती हैं। हमारे साथ सुखद और दुखद दोनो तरह की घटनाएं होती हैं। कई लोग छोटी-छोटी तकलीफों से परेशान हो जाते हैं। हम कई छोटी-छोटी तकलीफों में नकारात्मक हो उस ईश्वर से शिकायत करने लगते हैं। लेकिन कई लोग हैं जो बड़ी से बड़ी तकलीफ का सामना हंस कर करते हैं। जीवन को उन बुरी घटनाओं के बाद भी इतनी सकारात्मकता से लेतें हैं कि हैरान कर देते हैं। ऐसे ही हैं सीए भगवान झा।
जब उनका एक धन्यवादपत्र मुझे मिला तो उनकी अच्चाई और ईश्वर के प्रति श्रद्धा से मैं हैरान रह गई।
मुझे याद है जब 2013 में मैं उनसे मिली तो उन्हें कुछ तकलीफ में देखा वो अपनी गर्दन नहीं घुमा पा रहे थे। मगर उतनी तकलीफ में भी उनकी मुस्कान बहुत सहज थी। देखने से पता ही नहीं चल रहा था कि एक छोटे से एक्सीडेंट ने उनका जीवन ही बदल कर रख दिया था।
सीए बनने के कुछ ही दिनों के बाद की बात है सीए भगवान झा जी ऑटो से कहीं जा रहे थे। अचानक उनके ऑटो के सामने मोटरसाइकिल टकराई। कोई गम्भीर दुर्घटना नहीं थी किसी अन्य को चोट नहीं लगी, लेकिन जब ऑटो पलटा तब भगवान झा जी की गरदन की हड्डी टूट चुकी थी। किसी को एहसास नहीं था कि ये इतनी भयानक घटना है। उन्हे एम्स ले जाया गया जहां पहले उन्हे ट्रैक्शन दिया गया उसके लिये उनके सिर के पीछे से हैडफोन के आकार का एक यंत्र दो बड़े कीलों के माध्यम से कस दिया गया। करीब 2-2 इंच तक वो कील उनके माथे में धंसाये गये। बुरा ये हुआ कि इस प्रक्रिया को करने के लिये पहले डॉक्टर्स को पेशेंट सिर को सुन्न करना था लेकिन डॉ0 ने ये जाने बगैर कि शरीर का चोटिल भाग सुन्न है या नहीं कील कसने का काम शुरू कर दिया। मरीज के उस दर्द को चोट का दर्द समझ कर डॉ0 लापरवाही से अपना काम करते रहे।
तीन दिन बाद डॉक्टर्स को अपनी गलती का एहसास हुआ। इलाज के दौरान सिचुएशन आई कि जब उनके शरीर के बांये हिस्से को लकवा मारने लगा। इस स्थिति से बचने के लिये उनकी गरदन को लोहे की रोड से हमेशा के लिए स्ट्रेट जोड़ दिया गया। वो अपना सिर झुका नहीं सकते या गरदन को भी इधर उधर नहीं घुमा सकते लेकिन उनका हौसला देखिये हमेशा मुस्कुराते मिलते हैं। इतनी तकलीफ के बाद भी उन्होंने एक पत्र के माध्यम से ईश्वर डॉक्टर्स और मित्रों को धयन्यवाद दिया है। उनका ये पत्र शायद आपके लिये भी प्रेरणा का स्रोत बन सके इसलिये ये पत्र मैं ऐसे ही यहां पोस्ट कर रही हूं....
जीवन का पुनर्जन्म
बड़े हर्ष के साथ,मुझे,आज दिनाकं 02-सितम्बर-2014,मेरा जीवन कापुनर्जन्म का पहला जन्मदिन देखने और कुछ लिखने कासौभाग्य प्राप्त हो रहा है। यहसत्य है कि जो जीव-प्राणी जन्म लेते हैं। उनके जीवन की अंतिम यात्रा अवश्य होती है। यहभी कहाजाता है कि जीव-प्राणी को अपने कर्मो के अनुसार किसी न किसी रूप में पुनर्जन्म लेनापड़ता है। परन्तु पिछले साल (अगस्त2013) मेरे जीवन के साथ जो बीती उसने मेरा जीवन बदल दिया। ,लेकिनईश्वर की असीम कृपा से,भगवान रूपीचिकित्सकोंकेअथक प्रयास और खासकर दोस्तों एवं सगे सम्बंधियों के आशीर्वाद से,ईश्वर कीप्रार्थना,सहयोग एवं अटूट साहस से आज मैंअपने जीवनका पुनर्जन्म के पहले जन्मदिन पर यहछोटा सा धन्यवाद पत्र लिखने का शुभ अवसर प्राप्त कर रहा हूं।
एक जन्म तो माता –पिता की कृपा से मिला लेकिन इसी जन्म का फिर से पुनर्जन्म आज ही के दिन दिनांक 2 सितम्बर 2013 में हुआ। यह जीवन ईश्वर, चिकित्सकों, दोस्तों, सगे सम्बन्धियों की आशीर्वाद से मिला। इसका ऋण मैं कभी चुकता नहीं कर सकता। बस मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि इन सभी को खुशी एवं स्वास्थ्य प्रदान करने की कृपा करें।
कहते हैं कि भगवान के कई रूप होते हैं, जिन्हे पहचानना बहुत कठिन है। यदि दु:ख-तकलीफ मिलती हैं तो ईश्वर किसी ना किसी रूप में किसी को भेजकर मदद कर देते हैं। इस दुर्घटना के बाद मेरा शरीर किसी काम का नहीं था। मगर इंसान रूपी भगवान ने मुझे आश्रय दिया, जिसके परिणामस्वरूप में खुद को एक सम्मानजनक स्थिति में देख पाता हूं। इन सभी को कोटी-कोटी धन्यवाद।
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