कवीन्द्र रवीन्द्र नाथ टैगोर, स्वामी विवेकानन्द, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, रास बिहारी बोस जैसे महान लोगों की धरती बंगाल से जुड़े अजित कुमार श्अजीत्य मेरठ की साहित्यिक संस्था श्काव्य सागर्य के महासचिव है। क्रान्तिधरा मेरठ में हिन्दी साहित्य की अलख जगा रहे है। बाग्लां भाषी होते हुए भी हिन्दी साहित्य के प्रति उनकी लगन उनके लेखन में स्पष्ट झलकती है। बंसतोत्सव पर सरस्वती पूजा के अवसर पर जब मैं उनसे मिला तो उनकी सादगी, सरल हदयता से प्रभावित हुए बिना न रहा। मैने उनसे कहा था कि हमारे समाचार पत्र का नाम श्श्रम शिखर्य है और मेरा मानना है कि श्रम करने वाले शिखर पर पहुंचते है।
श्दादा्य अजित कुमार को मेरी बात ध्यान रही तभी उन्होने मौन तपस्वी की भांति साहित्य-साधना में लीन होकर कहानी संग्रह श्महालया से विसर्जन तक्य की रचना की, जो साहित्यिक दृष्टिड्ढकोण से सभी के लिये प्रेरणा स्पद है। इस संग्रह में प्रकाशित कहानियां निश्चय ही समाज को एक नई दिशा देगी ऐसा मेरा विश्वास है। सभी कहानियों में दार्शनिक विचारधारा पर भरपूर प्रयोग सागर से निकली सीप में मोती की भांति है। जिसके लिये बधाई के पात्र है- श्उत्कर्ष प्रकाशन मेरठ्य जिन्होने इसे प्रकाशित किया। जो साहित्य अज्ञान रुपी अंधकार दूरकर ज्ञान रुपी प्रकाश से मन-मस्तिष्क को सरावोर कर सके, वही सत्साहित्य की श्रेणी में आता है। वही लेखन सार्थक है जिसे पढ़कर पाठक अच्छे संस्कार ग्रहण कर सकें मैने प्रकाशक हेमन्त शर्मा ने कहा- रविवार दिनांक ०५-०४-२०१५ को मध्यान्ह १.०० बजे सदर थाने के पीछे स्थित श्री बिल्वेश्वर संस्कृत महाविद्यालय में काव्यसागर साहित्यिक संस्था (पंजी0) मेरठ के तत्वाधान में इस कहानी संग्रह श्महालया से विसर्जन तक्य का लोकार्पण को समर्पित आयोजन में सम्मान समारोह तथा एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध इतिहासकार डा0 किरण सिंह डी.लिट ने की। मुख्य अतिथि के रूप में महाविद्यालय के प्राचार्य डा0 चिन्तामणि जोशी, लोकार्पण कत्र्ता के रूप में दैनिक जागरण के सम्पादकीय प्रभारी श्री मनोज झा, श्रम-शिखर उपसम्पादक सुमनपाल सिंह, कहानीकार डा0 सुधाकर आशावादी, डा0 प्रदीप त्यागी श्सरावा्य आदि मंच पर आसीन रहे। मां सरस्वती वन्दना के उपरान्त सभागार में उपस्थित सभी अतिथियों ने लेखक श्दास बाबू्य को बधाईया दी तथा सम्मान-समारोह में ३२ विभूतियों को विभिन्न सम्मानो से अलंकृत किया गया। डा0 ईश्वर चन्द गंभीर (कवि), सुमनपाल सिंह (उपसम्पादक), चरण सिंह स्वामी (सम्पादक कलम पुत्र) ने काव्य पंक्तियों के माध्यम से लेखक को प्रोत्साहित किया। अन्त में वंदे मातरम् गान से कार्यक्रम का समापन हुआ।
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